Section 377 Ruling: वैवाहिक संबंधों पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, पति-पत्नी के बीच संबंध धारा 377 के दायरे से बाहर
Section 377 Ruling: High Court makes important observation on marital relations, says relationship between husband and wife is outside the scope of Section 377

Section 377 Ruling: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए वैवाहिक संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट के इस फैसले ने पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंधों से जुड़े कानून की व्याख्या को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने भिंड जिले के एक दंपति से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि विवाह के भीतर पति-पत्नी के बीच बने शारीरिक संबंधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ आरोपी पति को इस विशेष धारा से राहत देते हुए एफआईआर में से इस आरोप को हटाने के निर्देश दिए हैं।
तीन साल पहले दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। भिंड की रहने वाली महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग, मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। महिला का कहना था कि विवाह के समय उसके पिता ने बाइक, सोने-चांदी के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान और चार लाख रुपये नकद दिए थे, लेकिन इसके बावजूद ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त दस लाख रुपये और बुलेट मोटरसाइकिल की मांग की जा रही थी।
पति पर लगाए गए गंभीर आरोप
महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि जब उसके मायके वालों ने अतिरिक्त मांग पूरी करने से इनकार किया, तो पति और ससुराल के अन्य लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उसे मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इसी के साथ महिला ने पति पर जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाने का आरोप भी लगाया, जिससे उसे काफी शारीरिक और मानसिक कष्ट हुआ।
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हाईकोर्ट की टिप्पणी और आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के वकील विश्वजीत रतोनिया ने जानकारी दी कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि वैवाहिक संबंधों के दायरे में पति-पत्नी के बीच बने यौन संबंधों को धारा 377 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी पति के खिलाफ इस धारा में दर्ज आरोपों को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।
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अन्य धाराओं में जारी रहेगी सुनवाई
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले से जुड़ी अन्य धाराएं, जैसे दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न से संबंधित आरोप, अभी भी बरकरार रहेंगे और इन पर आगे सुनवाई जारी रहेगी। इस फैसले के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अन्य आरोपों के आधार पर आगे बढ़ेगी, जिस पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।
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