Sabse Jahreela Sanp : इस मोनोकल्ड कोबरा के जहर पर एंटीवेनम भी बेअसर, स्टडी में हुआ खुलासा

Sabse Jahreela Sanp : इस मोनोकल्ड कोबरा के जहर पर एंटीवेनम भी बेअसर, स्टडी में हुआ खुलासा

Sabse Jahreela Sanp : दुनिया भर में सांपों की हजारों प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कुछ जहां जहरीले नहीं होते हैं वहीं कुछ जहरीले और जानलेवा भी होते हैं। अभी तक माना जाता था कि सांपों के काटने का इलाज हमारे पास है, लेकिन हाल ही में हुए एक शोध ने इस बात को झुठला दिया दिया।

हाल ही में वैज्ञानिकों के एक समूह ने लंबे समय तक की स्टडी में सांप की एक ऐसी प्रजाति ढूंढ निकाली है, जिसके डंसने पर वर्तमान में उपलब्ध एंटीवेनम भी असर नहीं करता है। सांप की यह प्रजाति है मोनोकल्ड कोबरा। वैज्ञानिकों ने इस सांप के काटने के बाद होने वाले उपचार प्रक्रिया में सुधार के लिए प्रजाति-विशिष्ट और क्षेत्र-विशिष्ट विषरोधी की आवश्यकता जताई है।

कैसे होते हैं और कहां पाए जाते हैं

मोनोकल्ड कोबरा (नाजा कौथिया) मुंह के सामने के हिस्से में स्थायी रूप से उभरे हुए नुकीले दांत वाले जहरीले सांप होते हैं। इस तरह के सांप पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया तथा दक्षिणी चीन में पाए जाते हैं।

Sabse Jahreela Sanp : इस मोनोकल्ड कोबरा के जहर पर एंटीवेनम भी बेअसर, स्टडी में हुआ खुलासा

कैसे करता है इसका जहर असर

नाजा कौथिया या मोनोकल्ड कोबरा के काटने से मस्तिष्क या परिधीय तंत्रिका तंत्र (peripheral nervous system) को काफी क्षति होती है। ये सांप शरीर के जिस हिस्से में काट लेते हैं, वहां के ऊतक नष्ट हो जाते हैं। इससे एक गंभीर चिकित्सा स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

इन वैज्ञानिकों ने की यह स्टडी

यह स्टडी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक स्वायत्त संस्थान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उच्च अध्ययन संस्थान (IASST), गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर आशीष के मुखर्जी के नेतृत्व में तेजपुर विश्वविद्यालय से हीराकज्योति काकती तथा अमृता विश्व विद्यापीठम से डॉ. अपरूप पात्रा जैसे प्रमुख वैज्ञानिकों के एक समूह ने की।

इस समूह ने विभिन्न भौगोलिक हिस्सों में नाजा कौथिया सांप के जहर (NKV) की संरचना में विविधता का पता लगाने के लिए प्रोटीन और उनकी कोशिकीय गतिविधियों की परस्पर क्रिया, कार्य, संरचना व अन्य प्रक्रियाओं का अध्ययन एवं जैव रासायनिक जांच की है।

उपचार के प्रभाव को करता बाधित

वैज्ञानिकों के इस समूह ने अध्ययन में यह पाया है कि इसका जहर एक जैसी आइसोफॉर्म (समान अमीनो एसिड अनुक्रम वाले प्रोटीन) में गुणात्मक एवं मात्रात्मक भिन्नताओं के परिणामस्वरूप घातकता तथा पैथोफिजियोलॉजिकल उपलब्धता में परिवर्तनशीलता विषरोधी चिकित्सा की प्रभावकारिता को बाधित कर सकता है।

एंटीवेनम में पाई गई एंटीबॉडी की कमी

शोधकर्ताओं ने सामान्य उपयोग की विषरोधी औषधि में जहर-विशिष्ट एंटीबॉडी को मापा और कमर्शियल नमूनों में नाजा कौथिया सांप के जहर के खिलाफ ऐसे एंटीबॉडी की कमी पाई। इसलिए विभिन्न नाजा कौथिया सांप के जहर के नमूनों की घातकता और विषाक्तता को कमर्शियल पॉलीवैलेंट एंटीवेनम (PAV) द्वारा प्रभावी ढंग से बेअसर नहीं किया गया।

वैज्ञानिकों ने स्टडी में की यह सिफारिश

एल्सेवियर जर्नल टॉक्सिकॉन में प्रकाशित अध्ययन में नाजा कौथिया विष के बेहतर प्रबंधन के लिए कमर्शियल पीएवी मिश्रण में एनकेवी के खिलाफ प्रजाति विशिष्ट और क्षेत्र-विशिष्ट एंटीबॉडी को शामिल करने की सिफारिश की गई है।

इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने उन क्षेत्रों में नाजा कौथिया सांप के जहर पर नैदानिक जांच (Clinical Investigation) का भी सुझाव दिया है, जहां सांप आमतौर पर पाए जाते हैं और इस जानकारी तथा स्थानीय एनकेवी संरचना के बीच संबंधों का आकलन किया जाता है।

टीकाकरण प्रोटोकॉल में सुधार जरुरी

इस सांप के कम इम्युनोजेनिक जहर घटकों के खिलाफ एंटीबॉडी के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्तमान टीकाकरण प्रोटोकॉल में सुधार के साथ-साथ नाजा कौथिया के जहर के बेहतर और अधिक प्रभावी अस्पताल प्रबंधन से सांप के काटने के इलाज के उपायों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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