child marriage stopped betul: बारात आने से पहले रुकी नाबालिग की शादी, परिवार कर चुका था सभी तैयारियां, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
Betul: Minor's wedding halted before wedding procession, family had made all preparations, administration takes major action

child marriage stopped betul: बैतूल जिले के आमला ब्लॉक में एक बाल विवाह को अंतिम समय पर रोक दिया गया। जब शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और बारात आने ही वाली थी, तभी प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और जांच के बाद विवाह को रुकवा दिया। इस कार्रवाई के बाद जहां एक ओर कानून का पालन सुनिश्चित हुआ, वहीं दूसरी ओर परिवार को अचानक फैसले का सामना करना पड़ा।
छिंदवाड़ा से आने वाली थी बारात
यह मामला बिसखान पंचायत के एक गांव का है। यहां एक परिवार अपनी बेटी की शादी की तैयारी कर रहा था। बारात छिंदवाड़ा जिले के एक गांव से आने वाली थी। घर में मेहमानों के स्वागत की पूरी व्यवस्था की जा चुकी थी और भोजन भी तैयार था। माहौल पूरी तरह शादी का था, लेकिन इसी बीच प्रशासन को सूचना मिली और टीम तुरंत गांव पहुंची।
दस्तावेजों में सामने आया विरोधाभास
एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया के निर्देशन में पहुंची टीम ने लड़की की उम्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड में लड़की को बालिग बताया गया था, जबकि आंगनवाड़ी रिकॉर्ड और सर्वे पंजी में उसकी उम्र 18 वर्ष से कम दर्ज थी। जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग दस्तावेजों में 11 अप्रैल 2008 और 11 अप्रैल 2011 की दो जन्म तिथियां दर्ज हैं।
प्रशासन ने रुकवाया विवाह
रिकॉर्ड में विसंगति और आंगनवाड़ी दस्तावेजों के आधार पर लड़की को नाबालिग मानते हुए प्रशासन ने शादी को रुकवा दिया। अधिकारियों ने परिवार को समझाया कि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करना अवैध है। समझाइश के बाद परिवार ने भी सहमति जताई और तय किया कि लड़की के बालिग होने के बाद ही विवाह किया जाएगा।
परिवार ने जताई नाराजगी
हालांकि इस कार्रवाई से लड़की के पिता नाराज नजर आए। उनका कहना था कि अगर पहले ही स्पष्ट जानकारी दे दी जाती, तो वे इतनी तैयारी और खर्च नहीं करते। उन्होंने बताया कि आठ दिन पहले सूचना मिलती तो मेहमानों को बुलाने और भोजन बनाने से बचा जा सकता था।
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स्थानीय स्तर पर उठे सवाल
इस घटना के बाद गांव में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब शादी की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं, तब स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी होने के बावजूद समय रहते उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, कोटवार, पटवारी, सरपंच और सचिव जैसे स्थानीय कर्मचारियों की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है।
अधिकारी बोले- दी थी सलाह
आमला के सीडीपीओ निर्मल सिंह ठाकुर ने बताया कि स्थानीय कार्यकर्ता ने करीब 15 दिन पहले परिवार को बेटी के नाबालिग होने की जानकारी देकर विवाह न करने की सलाह दी थी, लेकिन परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उच्च स्तर पर समय रहते सूचना पहुंचती, तो पहले ही कार्रवाई की जा सकती थी।
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कार्रवाई में शामिल यह टीम
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान परियोजना अधिकारी निर्मल सिंह ठाकुर, तहसीलदार ऋचा कौरव, पर्यवेक्षक देवा बेले सहित राजस्व और महिला बाल विकास विभाग की टीम मौजूद रही। साथ ही देर से सूचना देने के मामले में स्थानीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।
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