जब केवट की चतुराई देख मुस्कुरा उठे प्रभु श्रीराम, खुश होकर दिया यह वरदान

प्राचीन शिव मंदिर खेड़ला किला में चल रहे श्री पंचकुंडी शिवशक्ति महायज्ञ एवं श्री राम कथा के आयोजन में परम पूज्य संत विमलेश त्रिवेदी ने भक्तों को बताया कि भगवान श्री राम वन यात्रा में गंगा के किनारे पधारे। गंगा जी पार करने के लिए वे केवट से नाव मांग रहे थे। परंतु केवट नाव नहीं लाता है और कहता है कि प्रभु आपके चरण रज में मनुष्य बनाने की शक्ति है। अतः आप पहले अपने चरण कमल धूला लीजिए। तत्पश्चात हम आपको गंगा जी पार पहुंचा देंगे।
यह सुनकर भगवान श्री राम केवट की चतुराई देख कर हंसने लगे। प्रभु को ह़सता देख सीता मैया और लक्ष्मण जी को बहुत प्रसन्नता हुई। क्योंकि जब से वनवास का प्रसंग चल रहा था, जब से भगवान थोड़े से गंभीर थे। लेकिन धन्य है यह भक्त केवट जिसने भगवान को हंसा दिया।

उन्होंने बताया भगवान भक्त के वश में हैं। अतः भगवान ने भक्त केवट को अपने चरणों को धुलने की आज्ञा दी। फिर केवट ने भगवान श्री राम के चरण धोकर गंगा जी के पार किया तथा भगवान ने केवट को विमल शक्ति का वरदान देकर उसे कृतार्थ किया।
मानस कोकिला सुश्री मोहिनी वैष्णव ने भक्तों को प्रभु के नाम की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि जो पुण्य सतयुग में तपस्या करने से प्राप्त होता था। त्रेता युग में यज्ञ करने से प्राप्त होता था। द्वापर में मूर्ति पूजा करने से प्राप्त होता था। वह पुण्य कलयुग में 24 घंटे के श्री राम नाम संकीर्तन से प्राप्त होता है। कलयुग में भगवान के नाम जपने की बड़ी महिमा है।
प्राचीन शिव मंदिर खेड़ला किला में चल रही रामकथा का एवं यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ रविवार समापन हुआ। बलरामपुरी नागा बाबा ने बताया कि सोमवार विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। जिसमें दस हजार लोगों को प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। सभी भक्त पधार कर पुण्य लाभ अर्जित करें।



