लापरवाही की पराकाष्ठा: सराड़ पंचायत में आज तक एक भी हितग्राही को नहीं मिला पीएम आवास

एक तरफ सरकारी योजनाओं का लाभ देने तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं, खुद आला अफसर गांव-गांव तक पहुंच रहे हैं बल्कि रात्रि विश्राम तक कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय बैतूल से महज 20 किलोमीटर दूर ही दिया तले अंधेरे की स्थिति नजर आ रही है।
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आपको जानकर शायद घोर आश्चर्य होगा कि बैतूल जनपद के अंतर्गत आने वाली एक पंचायत के किसी भी गांव में आज तक एक भी ग्रामीण को प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojna) का लाभ नहीं मिल सका है।
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वैसे तो हर नगरीय निकाय और ग्राम पंचायत में बड़ी संख्या में लोगों को PM आवास योजना का लाभ मिला है, लेकिन बैतूल जनपद की ग्राम पंचायत सराड़ ऐसी अनूठी पंचायत है जहां एक भी हितग्राही को PM आवास नहीं मिल सका है।
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मजे की बात यह है कि जिन कारणों से ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिला है, उन कारणों का निदान करने की आज तक ना तो जनप्रतिनिधियों ने कोशिश की और ना ही जनपद के अधिकारियों ने ही जहमत उठाना जरुरी समझा।
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लगभग 4 हजार की आबादी वाली इस आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत के सराड़ के अलावा इसी पंचायत के चिचढ़ाना, डोमाढाना, पीपलढाना, भट्टाझिरी गांवों में आज पर्यंत किसी भी गरीब आदिवासी का आशियाना इस महत्वकांक्षी योजना के तहत नहीं बन पाया है।
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ग्राम के बलिराम मोरले, सतन इवने ने बताया कि ग्रामीण पीएम आवास के लिए बीते 5 सालों से ग्राम पंचायत को आवेदन पत्र लगाकर मिन्नतें करते रहे हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत तक पूरे सिस्टम ने इन गरीबों को आवास उपलब्ध नहीं कराए।
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इतना ही नहीं इस कार्य में ग्राम सरपंच ने भी कोई रूचि नहीं ली। नतीजतन पूरी पंचायत PM आवास जैसी योजना से वंचित है। ऐसा नहीं है कि इस गांव के लोगों को इस योजना की जरूरत नहीं है, बल्कि गरीबी के चलते यहां के लोगों को अधिक जरूरत है। लेकिन, अभी तक कई कोशिशों के बावजूद उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
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ग्रामीण बताते हैं कि ग्राम पंचायत का दफ्तर भी हमेशा बंद रहता है। कभी कभार जब कर्मचारियों की मर्जी हो तो खुल जाता है नहीं तो अक्सर बंद ही रहता है। इस वजह से ग्रामीण सरकार की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पीएम आवास के पात्र हितग्राही अपने आवास के लिए दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं।
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बैतुल विकासखंड की ग्राम पंचायत सराड़ इकलौती ऐसी पंचायत है जो पीएम आवास योजना में सबसे पीछे है और इससे पंचायत की जनता का अहित ही हो रहा है। सरकार तो चाहती है कि सबका अपना आशियाना हो, लेकिन अंधेर नगरी के समान पंचायत सिस्टम ने सभी ग्रामवासियों के भाग्य से पीएम आवास छीन लिया है।
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ग्रामीणों के अनुसार आज तक इस ओर जनपद के अधिकारियों ने भी ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने ना इस ओर ख़ुद ध्यान दिया और ना ही शिकायतों पर गंभीरता दिखाई। अब ग्रामवासियों ने जिले के संवेदनशील कलेक्टर अमनवीर सिंह बैस से पंचायत की पूरी जांच कर ग्रामवासियों को पीएम आवास उपलब्ध करने की माग की है।
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इस संबंध में ग्राम पंचायत के सचिव रामू पवार का कहना है कि वर्ष 2011 की सर्वे सूची में ग्रामीणों का नाम न होने के कारण यह स्थिति बनी है। हम इसमें कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं कि ग्रामीणों को आखिर पीएम आवास का लाभ कैसे मिलेगा। हालांकि सचिव यह नहीं बता पाए कि उन्होंने इस त्रुटि का सुधार करवाने के लिए क्या प्रयास किए।
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यही नहीं जनपद के अधिकारियों की लापरवाही भी इसमें साफ झलक रही है। योजनाओं की लगातार समीक्षा होती है। इसके बावजूद उन्होंने इस ओर आज तक ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा कि इस पंचायत से आज तक एक भी हितग्राही को योजना का लाभ क्यों नहीं मिला। जानकारी में हो भी तो उन्होंने सर्वे सूची दुरुस्त करवाने की जहमत नहीं उठाई।
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