MP Pension Rules: पेंशन प्रकरणों में देरी पर अफसरों पर गिरेगी गाज, वित्त विभाग ने तय की 15 दिनों की समय-सीमा
MP Pension Rules: Officials to face action for delays in pension cases; Finance Department sets 15-day deadline.

MP Pension Rules: मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के पेंशन संबंधी मामलों के निपटारे में अब अनावश्यक विलंब नहीं हो सकेगा। वित्त विभाग ने शासकीय सेवा से मुक्त होने वाले कर्मचारियों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से एक कठोर प्रशासनिक कदम उठाया है। विभाग ने राज्य केंद्रीकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (एससीपीपीसी) के माध्यम से संचालित होने वाली डिजिटल पेंशन व्यवस्था में हर एक स्तर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तथा कार्य पूरा करने की अंतिम सीमा स्पष्ट रूप से रेखांकित कर दी है। यदि निर्धारित कार्यदिवसों के भीतर फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर सीधी प्रशासनिक गाज गिरना तय है।
तीन स्तरों पर बंटी पूरी व्यवस्था के लिए 15 दिन तय
डिजिटल प्रणाली के अंतर्गत किसी भी नए पेंशन आवेदन को अनिवार्य रूप से तीन मुख्य चरणों से गुजरना होगा। सबसे पहले क्रिएटर फाइल तैयार करेगा, जिसके बाद वेरीफायर उसकी बारीकी से जांच करेगा और अंत में अप्रूवर द्वारा उसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। शासन ने इन तीनों ही स्तरों पर काम पूरा करने के लिए पांच-पांच दिनों का समय निश्चित किया है। इस प्रकार से किसी भी सामान्य नए प्रकरण को निपटाने के लिए कुल 15 कार्यदिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिससे कर्मचारियों को अपनी पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए भटकना न पड़े।
संशोधित मामलों और वेतन निर्धारण के लिए कम समय
विभाग ने पेंशन में संशोधन और वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों की गति बढ़ाने के लिए और भी सख्त समय-सीमा तय की है। दोबारा संशोधित की जाने वाली पेंशन फाइलों के लिए क्रिएटर को चार दिन तथा जांचकर्ता एवं स्वीकृति देने वाले अधिकारी को तीन-तीन दिन का समय मिलेगा, यानी यह काम 10 दिनों में पूरा होगा। वहीं दूसरी ओर, वेतन निर्धारण संबंधी आवेदनों को निपटाने के लिए क्रिएटर को पांच दिन तथा शेष दो अधिकारियों को तीन-तीन दिन का समय दिया गया है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया 11 दिनों के भीतर संपन्न हो सकेगी।
लंबी पेंडेंसी और सुस्त कार्यप्रणाली पर सरकार की सख्ती
हाल ही में वित्त विभाग द्वारा संभागीय एवं जिला स्तर के कार्यालयों के कामकाज का सूक्ष्म मूल्यांकन किया गया था। इस समीक्षा के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अनेक दफ्तरों में पेंशन की फाइलें महीनों से धूल फांक रही थीं और अधिकारी बेवजह देरी कर रहे थे। शासन ने इस लापरवाही को नियमों का घोर उल्लंघन माना और तत्काल प्रभाव से हर टेबल की जवाबदेही तय करने का फैसला लिया, ताकि कोई भी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हट सके।
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रिटायरमेंट की तारीख से पहले ही तैयार होंगी सभी फाइलें
सरकार का मुख्य ध्यान उन कर्मचारियों पर भी है जो आने वाले महीनों में अपनी सेवाएं पूरी करके सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे मामलों में निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारी के सेवामुक्त होने की तिथि का इंतजार किए बिना उसकी पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया काफी समय पहले ही आरंभ कर दी जाए। इस अग्रिम व्यवस्था का सीधा लाभ यह होगा कि सेवानिवृत्ति के अगले ही माह से पूर्व कर्मचारी के खाते में नियमित पेंशन राशि बिना किसी रुकावट के आनी शुरू हो जाएगी।
डिजिटल प्रणाली के गठन से व्यवस्था में आया बड़ा सुधार
कर्मचारियों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के लिए वित्त विभाग ने जून 2025 में इस विशेष केंद्रीकृत पेंशन सेल की आधारशिला रखी थी। तत्पश्चात अप्रैल 2026 से पुरानी कागजी प्रणाली को पूरी तरह समाप्त करते हुए सभी पेंशन आवेदनों का निष्पादन केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किया जा रहा है। इस इकाई को नए मामलों के निपटारे के साथ-साथ पुरानी पेंशन में संशोधन तथा दो साल पूर्व तक के वेतन निर्धारण को सत्यापित करने का पूरा दायित्व सौंपा गया है।
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प्रशासनिक पारदर्शिता और समयबद्धता पर विशेष बल
शासन की इस नई पहल का मुख्य ध्येय केवल फाइलों को कंप्यूटर पर लाना नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था को बेहद पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। नई गाइडलाइन से यह बिल्कुल साफ हो गया है कि अब पेंशन की फाइलें किसी भी टेबल पर अनिश्चितकाल तक नहीं रुकी रह सकतीं। डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से अब वरिष्ठ अधिकारी तुरंत यह पता लगा सकेंगे कि कौन सा कर्मचारी फाइल को अटका कर बैठा है और उस पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।
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