MP Liquor Corporation: मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के लिए बनेगा नया निगम मंडल, 489 दुकानों से होगी शुरुआत

MP Liquor Corporation: मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के लिए बनेगा नया निगम मंडल, 489 दुकानों से होगी शुरुआत
MP Liquor Corporation: मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के लिए बनेगा नया निगम मंडल, 489 दुकानों से होगी शुरुआत

MP Liquor Corporation: मध्यप्रदेश सरकार ने शराब दुकानों के संचालन को लेकर नई व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य में एक नया निगम मंडल गठित किया जाएगा, जो सीधे तौर पर शराब दुकानों का संचालन करेगा। इस फैसले को मंत्री स्तरीय समिति की बैठक में मंजूरी दी गई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

शराब दुकानों के लिए नया मॉडल

राज्य सरकार अब शराब दुकानों के संचालन के लिए निगम मंडल प्रणाली लागू करने जा रही है। इस निर्णय के अनुसार प्रदेश में बनने वाला नया निगम मंडल शराब दुकानों का संचालन संभालेगा। खास बात यह है कि यह कदम उन दुकानों के लिए उठाया गया है, जो कई बार नीलामी के बावजूद नहीं बिक सकीं।

पहले साल 489 दुकानों का संचालन

सरकार की योजना के अनुसार नए निगम मंडल द्वारा पहले वर्ष में 489 शराब दुकानों का संचालन किया जाएगा। ये वे दुकानें हैं जो 12 चरणों की नीलामी प्रक्रिया के बाद भी खरीदार नहीं मिलने के कारण खाली रह गई थीं। आने वाले समय में इन दुकानों की संख्या परिस्थिति के अनुसार बढ़ाई या घटाई जा सकती है।

उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निर्णय

इस संबंध में अहम फैसला शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में आयोजित मंत्री स्तरीय समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना भी मौजूद रहे।

आबकारी विभाग के अधीन रहेगा निगम

नया बनने वाला निगम मंडल आबकारी विभाग के नियंत्रण में कार्य करेगा। इसके संचालन के लिए अलग से नीति तैयार की जाएगी और पूरी कार्यप्रणाली के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी बनाए जाएंगे। इसके साथ ही निगम का पूरा ढांचा विकसित किया जाएगा, ताकि संचालन सुचारू रूप से हो सके।

कई निगम मंडल पहले से निष्क्रिय

मध्यप्रदेश में वर्तमान में 40 से अधिक निगम मंडल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कई की स्थिति कमजोर बताई जा रही है। अधिकांश निगम मंडलों में अध्यक्ष नियुक्त नहीं हैं और उनका प्रभार संबंधित विभागीय मंत्रियों के पास है। पहले भी कई निगम मंडलों को घाटे के चलते बंद किया जा चुका है।

सड़क विकास निगम का उदाहरण

प्रदेश में सड़क विकास निगम एक प्रमुख उदाहरण रहा है, जिसे भारी आर्थिक नुकसान के चलते बंद करना पड़ा था। यह निगम सरकारी बसों के संचालन से जुड़ा था, लेकिन करोड़ों रुपए के घाटे के कारण वर्ष 2005 में तत्कालीन सरकार ने इसे बंद कर दिया था।

लोक परिवहन को पटरी पर लाने की कोशिश

वर्तमान सरकार एक बार फिर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में प्रयास कर रही है। हालांकि अब तक इस दिशा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है, लेकिन नए फैसलों से सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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