खेती किसानी

MP Flower Farming: नौकरी छोड़ बना सफल किसान: 3 बीघा में गुलाब और गेंदा उगाकर एमपी का युवा कर रहा बंपर कमाई

MP Flower Farming: Quitting his job to become a successful farmer, a young man from MP is earning bumper profits by cultivating roses and marigolds on 3 bighas of land.

MP Flower Farming: नौकरी छोड़ बना सफल किसान: 3 बीघा में गुलाब और गेंदा उगाकर एमपी का युवा कर रहा बंपर कमाई
MP Flower Farming: नौकरी छोड़ बना सफल किसान: 3 बीघा में गुलाब और गेंदा उगाकर एमपी का युवा कर रहा बंपर कमाई

MP Flower Farming: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले बिलहरी गांव के रहने वाले युवा चेतराम कुशवाहा ने बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के उपरांत कुछ समय तक शहर में नौकरी की। हालांकि, उनका मन दफ्तर के काम में नहीं लगा और वे वापस अपने गांव लौट आए। उनके परिवार में पहले से ही पारंपरिक तरीके से खेती-किसानी की जाती थी, लेकिन चेतराम को पुरानी तकनीक और गेहूं-चने जैसी फसलें पसंद नहीं आ रही थीं। इसलिए उन्होंने कुछ नया करने का मन बनाया और मात्र तीन बीघा जमीन में विभिन्न प्रकार के सुंदर फूलों की बागवानी शुरू कर दी। आज वही फूलों की खेती उनके जीवन में खुशहाली ला चुकी है और वे इससे हर साल लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

पारंपरिक फसलों और नौकरी की तुलना में फूलों से ज्यादा लाभ

अपनी सफलता का अनुभव साझा करते हुए चेतराम बताते हैं कि वर्ष 2015 से पूर्व वे अपने खेतों में केवल गेहूं, चना, उड़द और मूंग जैसी पुरानी फसलें ही बोया करते थे। इन फसलों में लगातार कड़ी मेहनत करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता था। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक सब्जियों की खेती में भी हाथ आजमाया, परंतु सब्जियों में बार-बार कीड़े लगने की समस्या बनी रहती थी। कीटों से बचाव के लिए महंगी दवाओं का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे लागत काफी बढ़ जाती थी और मुनाफा बहुत कम बचता था। नौकरी और सब्जी उत्पादन में मनमुताबिक सफलता न मिलने पर उन्होंने फूल उत्पादन को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

150 गेंदे के पौधों से हुई थी इस नए सफर की शुरुआत

फूलों की व्यावसायिक खेती शुरू करने के लिए चेतराम ने सबसे पहले नौगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से विधिवत तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने प्रयोग के तौर पर अपने छोटे से हिस्से में सिर्फ 150 गेंदे के पौधे लगाए। जब इन पौधों से पहली बार फूल तैयार हुए, तो उन्हें हर हफ्ते करीब 200 रुपये की कमाई होने लगी। इस छोटे से प्रयोग ने उनका हौसला और आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। उन्हें महसूस हुआ कि यदि बड़े स्तर पर फूलों की बागवानी की जाए, तो यह बेहद फायदेमंद सौदा साबित हो सकती है। इसके बाद उन्होंने तीन बीघा खेत में बड़े पैमाने पर फूल उगाने का काम प्रारंभ कर दिया।

चार अलग-अलग प्रजातियों के फूलों का करते हैं उत्पादन

वर्तमान समय में चेतराम अपने तीन बीघा खेत में मुख्य रूप से गुलाब, गेंदा, बिजली और गैलार्डिया प्रजाति के फूलों की पैदावार ले रहे हैं। इनमें से गुलाब की खेती पूरे बारह महीने लगातार चलती रहती है, जबकि गेंदा, गैलार्डिया और बिजली जैसे फूलों का उत्पादन वे मौसम के अनुसार करते हैं। चेतराम एक ही खेत में बार-बार एक ही किस्म का फूल नहीं उगाते, बल्कि समय-समय पर जमीन बदलते रहते हैं। उनका मानना है कि फसल चक्र बदलने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है और पैदावार में कभी कमी नहीं आती।

कम खर्च में हर दिन हो रही नगद और बंपर कमाई

इस तीन बीघा जमीन में चारों प्रकार के फूलों को उगाने में सालभर का कुल खर्च लगभग 70 से 80 हजार रुपये आता है। जब वे खुद ही फूलों की नर्सरी तैयार करते हैं, तो लागत और भी घट जाती है। चेतराम इन ताजे फूलों को पास के ही नौगांव शहर के स्थानीय बाजार में ले जाकर 80 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से आसानी से बेच देते हैं। जहां पहले पूरे साल पारंपरिक खेती करके वे एक लाख रुपये भी नहीं बचा पाते थे, वहीं अब फूलों की खेती से उन्हें हर साल तीन लाख रुपये की कुल आय हो रही है। सारे खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना करीब दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है और रोज नगद पैसा हाथ में आ रहा है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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