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indira ekadashi vrat: पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी पर बरसेगी श्रीहरि की कृपा, पूर्वजों को मिलेगी मोक्ष प्राप्ति और घर में आएगी सुख-समृद्धि

Indira Ekadashi Vrat: On Indira Ekadashi during Pitru Paksha, the blessings of Shri Hari will be showered; ancestors will attain salvation, and happiness and prosperity will come to the home.

indira ekadashi vrat: पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी पर बरसेगी श्रीहरि की कृपा, पूर्वजों को मिलेगी मोक्ष प्राप्ति और घर में आएगी सुख-समृद्धि
indira ekadashi vrat: पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी पर बरसेगी श्रीहरि की कृपा, पूर्वजों को मिलेगी मोक्ष प्राप्ति और घर में आएगी सुख-समृद्धि

indira ekadashi vrat: सनातन संस्कृति में पितृपक्ष के पवित्र पखवाड़े के दौरान पड़ने वाली एकादशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक स्थान है, और इस वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी मंगलवार, छह अक्टूबर के दिन श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। ऐसी लोक मान्यता है कि इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना करने, उपवास रखने और अपने पूर्वजों का ध्यान करने से दिवंगत आत्माओं को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है तथा व्रत रखने वाले मनुष्य को भी अमूल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। यही मुख्य वजह है कि पितृपक्ष के कालखंड में आने वाली इस विशेष एकादशी का धार्मिक और आध्यात्यमिक महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

पितरों की मुक्ति का पावन अवसर

ज्योतिषाचार्यों का इस विषय में कहना है कि पूरे साल भर के दौरान कुल चौबीस एकादशियां आती हैं और हर एक एकादशी का अपना अलग और विशिष्ट धार्मिक महत्व होता है। इनमें से इंदिरा एकादशी को विशेष तौर पर भूले-बिसरे और मृत परिजनों की आत्मा की शांति और उनकी पूर्ण सद्गति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस खास दिन पर आस्थावान लोग भगवान विष्णु की आराधना करने के साथ-साथ अपने पुरखों को याद करते हैं और उनके निमित्त विशेष रूप से प्रार्थना, तर्पण तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करते हैं। नगर के तमाम विष्णु मंदिरों में इस दौरान पवित्र विष्णु सहस्रनाम का पाठ आयोजित किया जाएगा और इसके साथ ही खाटू श्याम के धामों पर भी खास धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना तय है।

श्राद्ध और एकादशी का अनोखा संगम

इस एकादशी की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह है कि यह पितृपक्ष की समयावधि के भीतर आती है। सनातन मान्यता के अनुसार इस दिन श्रीहरि की वंदना के साथ-साथ पुरखों का भावपूर्ण स्मरण करने से उन्हें परलोक में मुक्ति मिलती है। इसलिए जिन घरों में पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म चल रहे होते हैं, वहां इस तिथि को बेहद गहरी आस्था और पूर्ण विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। डॉक्टर जैन का यह भी मार्गदर्शन है कि यदि इस विशेष दिन पर किसी परिजन की तिथि या श्राद्ध पड़ रहा हो, तो ऐसी स्थिति में श्राद्ध की संपूर्ण विधि और एकादशी व्रत के तमाम नियमों के बीच संतुलन बनाते हुए प्राचीन धार्मिक मान्यताओं का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।

व्रत के नियम और अनुष्ठान की विधि

इंदिरा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु को इसकी शुरुआत एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही सात्विक भोजन ग्रहण करके करनी चाहिए और रात के वक्त हल्का आहार लेना ही सबसे उत्तम माना जाता है। एकादशी के सूर्योदय के समय स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-सुथरे वस्त्र पहनने के पश्चात जगतपिता श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत का पक्का संकल्प लिया जाता है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार इस दिन निर्जल उपवास रखा जा सकता है, किंतु यदि ऐसा करना मुमकिन न हो तो पानी, फल या दूध का सेवन करके भी इस व्रत को निभाया जा सकता है। इस पूरे दिन चावल, गेहूं, विभिन्न प्रकार की दालों, अन्य अनाजों और साधारण नमक के सेवन से पूरी तरह दूर रहने की प्राचीन धार्मिक परंपरा चली आ रही है। भगवान विष्णु के चमत्कारी मंत्रों, विशेषकर प्रसिद्ध विष्णु सहस्रनाम या फिर महामंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर जाप करना इस दिन अत्यधिक पुण्य फल प्रदान करने वाला माना गया है।

व्रत तोड़ने का शुभ मुहूर्त

इस विशेष इंदिरा एकादशी के उपवास का समापन अगले दिन यानी सात अक्टूबर को द्वादशी तिथि के आगमन पर सूर्योदय के ठीक बाद किया जाएगा। व्रत खोलने का निर्धारित समय सुबह छह बजकर अठारह मिनट से लेकर आठ बजकर अठारह मिनट तक का रहेगा, जिसके दौरान पारण किया जा सकेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का समापन करने से पहले भगवान को प्रसाद का भोग लगाया जाना चाहिए और उसके बाद जल तथा फल ग्रहण करना अत्यंत कल्याणकारी होता है। इंदिरा एकादशी का मूल संदेश यही है कि भगवान विष्णु की सच्ची भक्ति के साथ-साथ अपने पुरखों का श्रद्धा भाव से किया जाने वाला स्मरण एक ऐसा पावन संकल्प है, जिसमें परिवार की गहरी आस्था, पूर्वजों के प्रति सच्ची कृतज्ञता और उनकी मोक्ष की कामना एक साथ सहज रूप से जुड़ी होती है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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