Betul stubble burning ban: नरवाई जलाने को लेकर बैतूल में बड़ा फैसला, कलेक्टर ने लगाई पूरी तरह रोक, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना
Betul stubble burning ban: Major decision taken in Betul regarding stubble burning, collector imposes complete ban, fines will be imposed for breaking rules

Betul stubble burning ban: फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की परंपरा अब बैतूल जिले में सख्ती से बंद कर दी गई है। प्रशासन ने इसे लेकर कड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी।
खेतों में आग लगाने पर प्रतिबंध लागू
बैतूल जिले में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने नरवाई जलाने पर पूरी तरह रोक (Betul stubble burning ban) लगा दी है। यह आदेश 19 अप्रैल 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खेतों में पराली या डंठलों को आग लगाने की अनुमति नहीं होगी।
उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
जारी निर्देश के अनुसार यदि कोई व्यक्ति इस आदेश (Betul stubble burning ban) का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में पर्यावरण विभाग के नियमों के साथ-साथ एयर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट 1981 के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।
नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान
प्रशासन ने बताया कि फसल कटाई के बाद कई किसान खेत साफ करने के लिए आग का सहारा लेते हैं, लेकिन इससे कई तरह के नुकसान होते हैं। आग कई बार फैलकर आसपास के क्षेत्रों में नुकसान पहुंचा देती है, जिससे जन-धन की हानि की संभावना रहती है। इसके अलावा इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और हवा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है।
नरवाई जलाने (Betul stubble burning ban) से जमीन में मौजूद उपयोगी सूक्ष्म जीव खत्म हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है और आगे की फसल पर असर पड़ता है। जबकि खेत में बचे अवशेष प्राकृतिक रूप से सड़कर भूमि को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं।

आधुनिक विकल्प अपनाने की सलाह
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करें। रोटावेटर और सुपरसीडर जैसे साधनों की मदद से बिना आग लगाए खेत तैयार किया जा सकता है।
कानूनी प्रावधान के तहत आदेश
कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 63 के तहत जारी किया है। यह नियम पूरे बैतूल जिले की सीमा में लागू रहेगा और इसका उद्देश्य जनहित, पर्यावरण सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है।
स्ट्रॉ रीपर से नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा, लाखों की कमाई का रास्ता
नरवाई जलाने पर रोक के बीच बैतूल जिले में अब खेतों के अवशेष को संभालने के लिए आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव-गांव में हो रहे प्रदर्शन और कार्यशालाओं के जरिए किसानों को नए तरीके सिखाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी मिल रहा है और पर्यावरण भी सुरक्षित रह रहा है।
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ग्राम स्तर पर शुरू हुए प्रदर्शन और कार्यशालाएं
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के मार्गदर्शन में कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जिले में नरवाई प्रबंधन को लेकर पहल तेज की गई है। इसी क्रम में गुरुवार को ग्राम स्तर पर स्ट्रॉ रीपर मशीन के जीवंत प्रदर्शन और कार्यशालाएं आयोजित की गईं। मुलताई विकासखंड के ग्राम सर्रा में हुए कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी गई।

किसान ने पेश किया उदाहरण
ग्राम सर्रा के किसान चंद्रशेखर बारपेटे ने आधुनिक कृषि यंत्रीकरण अपनाकर लागत कम करने के साथ बेहतर प्रबंधन का उदाहरण रखा। उनके खेत में गेहूं की कटाई के बाद स्ट्रॉ रीपर के जरिए नरवाई को हटाया गया। इस प्रक्रिया में केवल 4 से 5 इंच अवशेष बचा और खेत अगली फसल के लिए तुरंत तैयार हो गया।
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तकनीक से पर्यावरण और आय दोनों में लाभ
कार्यक्रम के दौरान सहायक कृषि यंत्री डॉ. प्रमोद कुमार मीना ने मशीन की कार्यप्रणाली और शासन की अनुदान योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के उपयोग से नरवाई जलाने की जरूरत खत्म हो जाती है, जिससे प्रदूषण कम होता है। ग्राम हेटी में भी इसी तरह की कार्यशाला आयोजित कर किसानों को इसके फायदे समझाए गए। कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद स्ट्रॉ रीपर से नरवाई को भूसे में बदला जा सकता है, जो आय का एक अतिरिक्त साधन बनता है।
किसानों ने साझा किया अनुभव
किसान जगदीश धोड़के ने बताया कि उन्होंने स्ट्रॉ रीपर के उपयोग से करीब 200 ट्रॉली भूसा तैयार किया। इसे 2200 रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बेचकर लगभग 4 लाख 40 हजार रुपये की आय हुई, जिसमें से करीब 2 लाख 50 हजार रुपये शुद्ध लाभ रहा। इसके अलावा प्रति एकड़ 15 से 35 किलो तक गेहूं भी बच जाता है, जिससे अतिरिक्त कमाई होती है।
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आधुनिक यंत्रों के उपयोग पर जोर
कार्यक्रम में किसानों से अपील की गई कि वे नरवाई न जलाएं और स्ट्रॉ रीपर, रीपर कम बाइंडर, हैप्पी सीडर या सुपर सीडर, रोटावेटर और मल्चर जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग करें। इस अवसर पर तकनीकी शाखा प्रभारी इंद्रभान सिंह, तकनीकी सहायक तुषार राठौर, प्रवीण विश्वकर्मा सहित किसान जगदीश धोड़के, ओम सूर्यवंशी, रमेश महाजन, उमेश गड़ेकर, रमेश नरवरे और विकास वानखेडे मौजूद रहे।
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