MSP For Rabi Crops: समर्थन मूल्य पर होगी इतने चना, मसूर और सरसो की खरीदी; खाद की नहीं होगी कमी, 150 लाख एमटी उपलब्ध
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MSP For Rabi Crops: (नई दिल्ली/भोपाल)। मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद द्वारा मंगलवार को हुई बैठक में रबी वर्ष 2022-23 (विपणन वर्ष 2023-24 ) एवं आगामी दो वर्षों में भारत सरकार के प्राईस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत चना, मसूर एवं सरसों तथा ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द का पंजीकृत कृषकों से उपार्जन राज्य उपार्जन एजेंसी म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित द्वारा किए जाने का निर्णय लिया गया। उधर केंद्रीय रसायन और उर्वरक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को देश में उर्वरकों के इस्तेमाल व उनकी उपलब्धता पर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बातचीत की। बैठक के दौरान, उन्होंने नैनो-यूरिया, नैनो-डीएपी और वैकल्पिक उर्वरकों को मैदानी स्तर पर प्रोत्साहन देने की प्रगति तथा इस सिलसिले में राज्यों द्वारा की गई पहलों का जायजा लिया
मंत्रिमंडल की बैठक में रबी वर्ष 2021-22 (रबी विपणन वर्ष 2022-23) में प्राईस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत भारत सरकार द्वारा चना के लिये 8 लाख 71 हजार 100 मेट्रिक टन एवं मसूर के लिये 1 लाख 67 हजार 130 मेट्रिक टन तथा सरसों के लिये 3 लाख 48 हजार 935 मेट्रिक टन के नियत उपार्जन लक्ष्य के भीतर चने के 8 लाख 01 हजार 662.86 मेट्रिक टन का उपार्जन राज्य उपार्जन एजेंसी म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ द्वारा किये जाने का कार्योत्तर अनुमोदन किया गया है। सरकार द्वारा खरीदी किए जाने से बाजार में दाम कम होने पर भी किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। उन्हें उनकी उपज के वाजिब दाम मिल सकेंगे।
नैनो यूरिया-डीएपी को बढ़ावा देने पर जोर (MSP For Rabi Crops)
इधर केंद्रीय रसायन और उर्वरक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बैठक के दौरान नैनो-यूरिया, नैनो-डीएपी और वैकल्पिक उर्वरकों को मैदानी स्तर पर प्रोत्साहन देने की प्रगति तथा इस सिलसिले में राज्यों द्वारा की गई पहलों का जायजा लिया। डॉ. मांडविया ने सभी राज्यों को सूचित किया कि देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। इस समय 150 लाख मीट्रिक टन उर्वरक मौजूद है। यह भंडारण न सिर्फ मौजूदा खरीफ मौसम में काम आयेगा, बल्कि आने वाले रबी के मौसम में भी उसकी उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी।
उर्वरकता कम कर रहे रसायनिक खाद (MSP For Rabi Crops)
डॉ. मांडविया ने मिट्टी की उर्वरकता बचाने के लिये रासायनिक उर्वरकों के ज्यादा इस्तेमाल को कम करने की जरूरत को उजागर किया। उन्होंने एक बार कहा कि केंद्र सरकार ने पीएम प्रणाम योजना के रूप में इस दिशा में पहले ही कदम उठा लिये हैं। इन प्रयासों में धीरे-धीरे घुलने वाली सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड), नैनो-यूरिया, नैनो-डीएपी आदि के इस्तेमाल को भी शुरू किया जाना शामिल है। राज्य सरकारों ने भी इस संकल्प में सक्रिय भागीदारी करने की इच्छा व्यक्त की।
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वन स्टॉप शॉप बनेंगे पीएमकेएसके
देशभर में पीएमकेएसके पहल पर चर्चा की गई, जो किसानों की सभी जरूरतों को एक ही स्थान पर पूरा करने के लिये ‘वन-स्टॉप-शॉप’ के रूप में काम करेगी। उन्होंने राज्यों के कृषि मंत्रियों और राज्य सरकारों के अफसरों का आह्वान किया कि वे नियमित रूप से इन पीएमकेएसके का दौरा करें तथा किसानों को जागरूक करें।
कालाबाजारी पर करें सख्त कार्रवाई (MSP For Rabi Crops)
डॉ. मनसुख मांडविया ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों का आग्रहपूर्वक आह्वान किया कि खेती के लिये उपयोगी यूरिया गैर-कृषि कामों में इस्तेमाल न होने दें। उन्होंने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से कहा कि इस सिलसिले में जागरूकता अभियान चलायें, ताकि कृषि यूरिया को अन्यत्र स्थानांतरित करने की संभावनायें कम की जा सकें तथा ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये।
45 पर एफआईआर, 32 के लाइसेंस रद्द
इस मामले में केंद्र सरकार के उर्वरक उड़न दस्ते और विभिन्न कृषि विभागों, राज्य सरकारों ने संयुक्त निरीक्षण किया था, तथा गड़बड़ी करने वाली यूरिया संयंत्रों के खिलाफ 45 एफआईआर की गई थीं। इसके अलावा, 32 मिक्सचर संयंत्रों के लाइसेंस रद्द किये गये और 79 मिक्सचर संयंत्रों से उर्वरक के सारे अधिकार छीन लिये गये। इन सबके खिलाफ चोर बाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की गई। राज्य सरकारों ने भी ऐसी अपराधियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाने की वकालत की।



