Baal Aadhaar Card: नीले और सफेद आधार कार्ड में क्या है अंतर? जानिए बाल आधार बनवाने और अपडेट कराने का सही तरीका
Baal Aadhaar Card: What is the difference between the blue and white Aadhaar cards? Learn the correct way to get a Baal Aadhaar made and updated.

Baal Aadhaar Card: भारत में नागरिकों के लिए पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले आम आधार कार्ड के भीतर बारह अंकों का एक अनोखा नंबर शामिल रहता है। इस दस्तावेज में व्यक्ति का नाम, निवास स्थान का पता, फोटो के साथ-साथ उंगलियों के निशान और आंखों की पुतलियों का डेटा दर्ज किया जाता है। छोटे बच्चों के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण विशेष रूप से नीले रंग का कार्ड जारी करता है, जिसे बाल आधार के नाम से जाना जाता है। इसका नीला रंग इसे सामान्य पहचान पत्र से अलग दिखाता है, परंतु इन दोनों के बीच कुछ अन्य जरूरी विभिन्नताएं भी मौजूद हैं जिनके बारे में अभिभावकों को सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
बायोमेट्रिक डेटा और पहचान से जुड़ी प्रमुख विभिन्नताएं
सफेद रंग के सामान्य आधार और नीले रंग वाले बाल आधार के बीच सबसे मुख्य अंतर बायोमेट्रिक विवरण का होता है। पांच वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों के आधार कार्ड में दोनों हाथों की दसों उंगलियों के बायोमेट्रिक प्रिंट और आंखों के स्कैन सुरक्षित रखे जाते हैं। इसके विपरीत पांच साल से छोटे मासूम बच्चों का आधार बनवाने के दौरान उनके उंगलियों के निशान नहीं लिए जाते।
ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इस अवस्था में बच्चों के शारीरिक अंग और उनके बायोमेट्रिक पैटर्न पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं। इसीलिए बाल आधार को केवल शिशु की तस्वीर और उनके घर के पते के आधार पर बनाया जाता है, जिसे माता या पिता में से किसी एक के मुख्य आधार नंबर के साथ जोड़ दिया जाता है।
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बाल आधार को समय पर नवीनीकृत कराना क्यों आवश्यक है
नीले रंग का बाल आधार प्रारंभिक वर्षों में एक स्वतंत्र पहचान पत्र के रूप में काम नहीं कर पाता, क्योंकि यह माता-पिता के दस्तावेज पर आश्रित होता है। दूसरी ओर, वयस्क या सामान्य आधार पत्र पूरी तरह से एक स्वतंत्र नागरिक दस्तावेज माना जाता है। जब बच्चा पांच साल की उम्र सीमा पूरी कर लेता है, तो उसके बायोमेट्रिक विवरण जैसे उंगलियों के निशान और आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग को तुरंत सिस्टम में अपडेट करवाना अनिवार्य हो जाता है।
यदि माता-पिता समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कराते हैं, तो वह कार्ड अमान्य या बंद हो सकता है। पांच वर्ष की आयु में बायोमेट्रिक डेटा दर्ज होते ही यह नीले रंग से साधारण आधार में तब्दील हो जाता है। इसके पश्चात जब बच्चा पंद्रह वर्ष का होता है, तब एक बार फिर से उसके बायोमेट्रिक रिकॉर्ड को नवीनीकृत कराना जरूरी होता है।
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अपने बच्चे का बाल आधार बनवाने की आसान प्रक्रिया
यदि आप अपने छोटे बच्चे का नया आधार बनवाना चाहते हैं, तो इसके लिए एक बेहद सरल तरीका अपनाया जा सकता है। सबसे पहले आपको अपने घर के निकट स्थित आधार नामांकन केंद्र पर जाना होगा या फिर आप प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पहले से अपना समय तय कर सकते हैं। नामांकन केंद्र जाते समय बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र अथवा अस्पताल से प्राप्त पर्ची के साथ माता या पिता में से किसी एक का असली आधार पत्र जरूर साथ रखें।
वहां मौजूद कर्मचारी बच्चे की फोटो खींचेगा और उसकी जानकारी को अभिभावक के आधार से जोड़ देगा। सभी कागजात की जांच पूरी होने के बाद नया कार्ड आपके डाक पते पर पहुंचा दिया जाएगा। खास बात यह है कि नया बाल आधार बनवाने और पांच तथा पंद्रह साल की उम्र में बायोमेट्रिक अपडेट कराने के लिए कोई भी फीस नहीं देनी पड़ती है।
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