MP Barrier Less Tolling: एमपी का पहला बैरियर-रहित टोल प्लाजा: 100 किमी/घंटे की रफ्तार में भी कटेगा टैक्स, जानिए नया नियम
MP Barrier-Free Tolling: MP's first barrier-free toll plaza—toll will be deducted even at speeds of 100 km/h; learn about the new rule.

MP Barrier Less Tolling: मध्य प्रदेश में राजमार्गों पर वाहनों का आवागमन अधिक सुगम और बिना रुकावट बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एक नई और अत्याधुनिक तकनीक का परीक्षण प्रारंभ किया गया है। राजधानी भोपाल से देवास जाने वाले मार्ग पर स्थित फंदा टोल प्लाजा पर राज्य की पहली बैरियर-रहित टोलिंग प्रणाली का प्रायोगिक परीक्षण शुरू कर दिया गया है। इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होने से चालकों को टोल प्लाजा पर गाड़ियां रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे बूम बैरियर के कारण होने वाले समय के नुकसान और अचानक ब्रेक लगाने की परेशानी से राहगीरों को पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
लोक निर्माण मंत्री ने दी समय सीमा में काम पूरा करने की हिदायत
इस नई तकनीकी व्यवस्था के संबंध में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के सामने निगम के अधिकारियों ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। प्रस्तुति देखने के पश्चात मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इस योजना को तय समय-सीमा के भीतर प्राथमिकता से पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षण के दौरान जो भी आंकड़े और परिणाम सामने आते हैं, उनका गहराई से विश्लेषण किया जाए और उसी के आधार पर पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था को बड़े पैमाने पर लागू करने की रूपरेखा तैयार की जाए।

यात्रियों के समय और ईंधन की होगी भारी बचत
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल सड़कों का निर्माण करना ही नहीं है, बल्कि नागरिकों की यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और तेज बनाना भी है। वर्तमान समय में टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे अनावश्यक ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है। नई प्रणाली से वाहन बिना अपनी रफ्तार धीमी किए सीधे निकल सकेंगे। इससे चालकों के समय की बचत होगी और गाड़ियों में ईंधन की खपत भी कम होगी, जो आम लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक रहेगा।
सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी कटेगा टोल टैक्स
इस स्वचालित प्रणाली के तहत करीब सौ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ते वाहन की भी तुरंत पहचान कर ली जाएगी। इस विशेष लेन में स्वचालित फास्टैग रीडर, उच्च क्षमता वाले कैमरे और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। जैसे ही कोई वाहन इस लेन में प्रवेश करेगा, सिस्टम उसके नंबर प्लेट और फास्टैग की जांच करके स्वतः ही निर्धारित शुल्क खाते से काट लेगा।
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खाते में बैलेंस न होने पर जारी होगा ऑनलाइन ई-चालान
यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं होगी या किसी तकनीकी खराबी के कारण तुरंत पैसे नहीं कट पाते हैं, तो वाहन स्वामी को ई-चालान के जरिए टोल राशि की सूचना भेजी जाएगी। यदि संबंधित वाहन मालिक तीन दिनों के भीतर राशि जमा नहीं करता है, तो नियमानुसार अतिरिक्त जुर्माने के साथ वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सफलता के बाद वर्ष 2027 से पूरी तरह लागू होगी योजना
फिलहाल फंदा टोल प्लाजा की केवल एक ही लेन में यह प्रयोग किया जा रहा है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है तो 1 जनवरी 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के सभी टोल प्लाजा की सभी लेनों में इस व्यवस्था को पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा। इसके उपरांत राज्य के अन्य सभी उपयुक्त राजमार्गों पर भी इस बैरियर-लेस तकनीक का विस्तार करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी।
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