MP Employee Health Scheme: कर्मचारियों के लिए हेल्थ स्कीम कब होगी लागू? 60 रुपए में 5 लाख के पुलिस बीमा मॉडल का सुझाव
MP Employee Health Scheme: When will the health scheme for employees be implemented? Proposal for a police insurance model offering ₹5 lakh coverage for ₹60.

MP Employee Health Scheme: मध्यप्रदेश में करीब साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारियों और लगभग साढ़े चार लाख पेंशनर्स के लिए प्रस्तावित कर्मचारी हेल्थ स्कीम का मामला लंबे समय से अधर में है। योजना पर करीब सात साल से चर्चा चल रही है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इस व्यवस्था से सरकार पर सीधे तौर पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। बीमा का प्रीमियम कर्मचारियों के वेतन और पेंशनर्स की पेंशन से निर्धारित राशि के रूप में लिया जा सकता है।
सात साल से फाइलों में अटकी योजना
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज के लिए बीमा सुविधा देने की पहल वर्ष 2019 में शुरू हुई थी। उस समय शासन स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच चर्चा हुई थी। योजना को लेकर कर्मचारियों से सुझाव भी मांगे गए थे। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर इसकी जरूरत और अधिक महसूस हुई, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
कर्मचारी संगठनों ने दिए थे सुझाव
वर्ष 2019 में मंत्रालय में कर्मचारी संगठनों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें प्रस्तावित चिकित्सा बीमा व्यवस्था के बारे में जानकारी साझा की गई और संगठनों से राय ली गई। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि योजना के लिए प्रीमियम कर्मचारियों और पेंशनर्स से लिया जा सकता है। इलाज से जुड़े स्वीकृत दावों का भुगतान बीमा व्यवस्था के तहत किया जाएगा। उनका सवाल है कि जब इस मॉडल पर कई साल पहले चर्चा हो चुकी है तो इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
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पुलिस की योजना को बनाया जा सकता है आधार
कर्मचारी संगठनों ने मध्यप्रदेश पुलिस में चल रही चिकित्सा बीमा व्यवस्था का उदाहरण भी दिया है। उनके अनुसार पुलिस कर्मचारियों के लिए वर्ष 2013 से स्वास्थ्य बीमा योजना संचालित है। इसमें करीब 60 रुपए प्रतिमाह के प्रीमियम पर पांच लाख रुपए तक का चिकित्सा कवर उपलब्ध कराया जाता है।
कर्मचारी नेताओं का सुझाव है कि इसी तरह की व्यवस्था दूसरे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए भी तैयार की जा सकती है। यदि विभागीय स्तर पर योजना चलाना संभव नहीं हो तो किसी बीमा कंपनी को जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा सरकारी कंपनी या निगम के माध्यम से भी संचालन का विकल्प तलाशा जा सकता है।
बड़े समूह से जुट सकता है प्रीमियम
कर्मचारी संगठनों के अनुसार प्रदेश में नियमित और अन्य श्रेणियों को मिलाकर बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं। इनके साथ लाखों पेंशनर्स भी योजना के संभावित दायरे में आएंगे। इतने बड़े समूह से नियमित प्रीमियम मिलने पर योजना को आर्थिक रूप से चलाना संभव हो सकता है।
हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि योजना में पारदर्शिता और निगरानी की मजबूत व्यवस्था जरूरी होगी। अस्पतालों की ओर से गलत या जरूरत से अधिक राशि के दावे किए जाने की आशंका को रोकने के लिए जांच और नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए।
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संगठनों ने आंदोलन की तैयारी की
कर्मचारी हेल्थ स्कीम को जल्द शुरू करने की मांग प्रदेश के कई कर्मचारी संगठन उठा चुके हैं। इनमें मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी सेवा संघ, लिपिक वर्ग कर्मचारी संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ और राज्य कर्मचारी संघ सहित अन्य संगठन शामिल हैं।
कुछ संगठनों ने अगस्त में प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा है। कर्मचारी नेताओं ने मांग पूरी नहीं होने पर अक्टूबर से आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है। संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू होने से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज के खर्च में बड़ी राहत मिल सकती है।
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