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Gwalior Betul Highway Project: ग्वालियर-बैतूल नेशनल हाईवे पर अब सरपट दौड़ेंगे वाहन, बरेठा घाट सेक्शन को मंजूरी, फोरलेन सड़क से बदलेगा सफर

Gwalior Betul Highway Project: Vehicles will now run at full speed on the Gwalior-Betul National Highway, Baretha Ghat section approved, four-lane road will change the journey.

Gwalior Betul Highway Project: ग्वालियर-बैतूल नेशनल हाईवे पर अब सरपट दौड़ेंगे वाहन, बरेठा घाट सेक्शन को मंजूरी, फोरलेन सड़क से बदलेगा सफर
Gwalior Betul Highway Project: ग्वालियर-बैतूल नेशनल हाईवे पर अब सरपट दौड़ेंगे वाहन, बरेठा घाट सेक्शन को मंजूरी, फोरलेन सड़क से बदलेगा सफर

Gwalior Betul Highway Project: मध्यप्रदेश के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से अटके ग्वालियर से बैतूल कॉरिडोर के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से बरेठा घाट सेक्शन पर अब काम शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। यह वह हिस्सा था जहां वन्यजीव संरक्षण और सड़क सुरक्षा दोनों बड़ी चिंता का विषय थे। अब सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद इस मार्ग पर आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षित और चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, जिससे सफर तेज, आसान और सुरक्षित हो सकेगा।

ग्वालियर से बैतूल कॉरिडोर का महत्व

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा विकसित किया जा रहा राष्ट्रीय राजमार्ग-46 मध्यप्रदेश का एक अहम परिवहन मार्ग है। यह राजमार्ग ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर तक फैला हुआ है और पूरी तरह राज्य के भीतर स्थित सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग माना जाता है। यह उत्तर और दक्षिण मध्यप्रदेश को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह मार्ग भोपाल से नागपुर को जोड़ने वाले कॉरिडोर का भी अहम हिस्सा है, जिससे प्रदेश के भीतर और बाहर यातायात और व्यापार दोनों को मजबूती मिलती है। इस परियोजना के तहत अधिकांश हिस्सों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, लेकिन कुछ संवेदनशील क्षेत्र ऐसे थे जहां काम रुका हुआ था।

बरेठा घाट का क्यों रुका था काम

इस कॉरिडोर का लगभग 21 किलोमीटर का हिस्सा अभी तक अधूरा था। इसमें केसला रेंज, भौंरा रेंज और बरेठा घाट के तीन हिस्से शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 20.91 किलोमीटर है। यह पूरा इलाका वन्यजीवों, खासकर बाघों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से इसे टाइगर कॉरिडोर क्षेत्र के रूप में देखा जाता है।

वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां सड़क निर्माण को लेकर कई नियम और प्रतिबंध लागू थे। 1 अप्रैल 2022 को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इस हिस्से में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से यह काम पूरी तरह ठप हो गया था। इस दौरान परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वन्यजीव बोर्ड और केंद्र सरकार से अनुमति लेना जरूरी हो गया था।

मिली सभी मंजूरियां, स्टे हटने का इंतजार

एनएचएआई ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का ध्यान रखते हुए प्रस्ताव तैयार किया गया। अब इस परियोजना को वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल उच्च न्यायालय से स्टे हटाने के औपचारिक आदेश का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही यह आदेश जारी होगा, निर्माण कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

क्यों चुनौतीपूर्ण है बरेठा घाट

बरेठा घाट का यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम के लिए बदनाम रहा है। यहां की सड़क अभी केवल दो लेन की है, जो घुमावदार और संकरी है। इस इलाके में तेज ढलान, तीखे मोड़ और सीमित दृश्यता के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। भारी वाहनों की आवाजाही और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के चलते यहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से इस हिस्से को बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहां दो बड़े ब्लैक स्पॉट भी चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर दुर्घटनाएं बार-बार होती रहती हैं।

यहाँ आये दिन होती है दुर्घटनाएं, मौतें

स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस इलाके में 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 18 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 62 लोग घायल हुए। इन आंकड़ों से साफ है कि यह मार्ग कितना जोखिम भरा है। संभावना यह भी जताई जाती है कि कई छोटी घटनाएं दर्ज ही नहीं हो पातीं, जिससे वास्तविक स्थिति और गंभीर हो सकती है।

वन्यजीवों के कारण भी बढ़ता खतरा

यह इलाका जंगल से घिरा हुआ है और यहां वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। कई बार जानवर अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए खतरनाक है, बल्कि वन्यजीवों के जीवन के लिए भी जोखिम पैदा करती है। इसी वजह से यहां सड़क निर्माण में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत थी।

अब यहाँ बनेगी 4 लेन सड़क

नई योजना के तहत इस पूरे हिस्से को आधुनिक तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्तमान दो लेन सड़क को चौड़ा कर चार लेन बनाया जाएगा, जिससे यातायात सुगम हो सके। सड़क को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि घुमावदार हिस्सों को सुरक्षित बनाया जा सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो। इससे वाहनों की आवाजाही तेज और आरामदायक होगी।

ब्लैक स्पॉट्स का स्थायी समाधान

इस परियोजना में दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्रों को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए एक विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें सड़क के खतरनाक हिस्सों को पूरी तरह ठीक किया जाएगा। इस काम के तहत तीन छोटे पुल बनाए जाएंगे और 38 बॉक्स कलवर्ट्स का निर्माण या सुधार किया जाएगा। इसके अलावा एक रेलवे अंडर ब्रिज, दो रोड ओवर ब्रिज और एक व्हीकल अंडरपास भी बनाया जाएगा। इन सभी निर्माण कार्यों से सड़क की क्षमता बढ़ेगी और ट्रैफिक बिना रुकावट के चल सकेगा।

वन्यजीव संरक्षण के लिए खास इंतजाम

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। योजना के तहत 10 एनिमल अंडरपास और एक एनिमल ओवरपास बनाया जाएगा, ताकि जानवर सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें। इन संरचनाओं को ऐसे स्थानों पर बनाया जाएगा जहां वन्यजीवों की आवाजाही ज्यादा होती है। इसके अलावा पूरे मार्ग पर शोर को कम करने के लिए नॉइज बैरियर लगाए जाएंगे। सड़क के किनारे फेंसिंग और बांस के पौधों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जानवर सीधे सड़क पर न आ सकें।

सड़क सुरक्षा के लिए आधुनिक सुविधाएं

यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस मार्ग पर कई आधुनिक उपाय किए जाएंगे। सड़क पर स्पष्ट संकेतक लगाए जाएंगे और रोड मार्किंग की जाएगी। घाट वाले हिस्से में विशेष क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे, ताकि वाहन दुर्घटनाओं के दौरान सुरक्षा मिल सके। इसके अलावा रंबल स्ट्रिप और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

परियोजना से मिलने वाले बड़े फायदे

यह कॉरिडोर बनने के बाद मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। उत्तर से दक्षिण तक सफर आसान और तेज हो जाएगा। यह मार्ग कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ता है, जिससे देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच आसान होगी। व्यापार और उद्योग को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे माल ढुलाई तेज होगी और लागत में भी कमी आएगी।

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

इस सड़क के विकसित होने से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और भोजपुर जैसे स्थानों तक यात्रियों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। इसके अलावा धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक भी यात्रा सुविधाजनक होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी।

स्थानीय लोगों को मिलेगा फायदा

इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण कार्य के दौरान और बाद में भी लोगों को काम मिलेगा। बेहतर सड़क सुविधा से गांव और शहरों के बीच दूरी कम होगी, जिससे व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी। कुल मिलाकर यह परियोजना न केवल यातायात सुधारने का काम करेगी, बल्कि मध्यप्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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