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MPPSC Medical Officer Recruitment: मेडिकल ऑफिसर भर्ती में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, MPPSC को 15 दिन में दोबारा करनी होगी पूरी प्रक्रिया

MPPSC Medical Officer Recruitment: मध्य प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर चल रहे विवाद पर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह भर्ती की पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से आयोजित करे। इस आदेश से उन कई डॉक्टरों को राहत मिली है, जिन्हें बीच में बदले गए नियमों के कारण भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।

मेडिकल ऑफिसर भर्ती का क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2024-25 के लिए मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इस भर्ती के तहत बड़ी संख्या में एमबीबीएस डॉक्टरों ने आवेदन किया था। आयोग द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण के बाद अभ्यर्थियों के इंटरव्यू भी लिए गए। सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था और अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि चयन प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।

अचानक लागू हुआ नया नियम

इंटरव्यू की प्रक्रिया के दौरान ही आयोग ने रजिस्ट्रेशन से जुड़ा एक नया नियम जोड़ दिया। इस नियम के तहत एडिशनल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया। यह बदलाव अचानक किया गया, जिसकी जानकारी पहले से विज्ञापन या नियमों में नहीं थी। इस नए नियम के कारण कई ऐसे डॉक्टर, जिन्होंने पहले ही सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे, भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए। कुछ अभ्यर्थियों को तो इंटरव्यू वाले दिन ही फोन कर यह बता दिया गया कि वे अब प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

भर्ती प्रक्रिया से बाहर किए गए डॉक्टरों ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने एमपीपीएससी के सामने प्रतिनिधित्व भी दिया, लेकिन आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने एडवोकेट तुषार सोडानी के माध्यम से इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि भर्ती के नियम बीच में बदलकर अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया है।

चयन प्रक्रिया के बीच नियमों में बदलाव नहीं

सुनवाई के दौरान इंदौर हाईकोर्ट ने माना कि एडिशनल रजिस्ट्रेशन की शर्त मूल नियमों का हिस्सा नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती के लिए पीजी मार्कशीट और पीजी रिजल्ट ही आवश्यक थे, जो अभ्यर्थी पहले ही जमा कर चुके थे। सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया के बीच नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता।

15 दिनों में नई प्रक्रिया करने के निर्देश

इंदौर पीठ ने एमपीपीएससी को आदेश दिए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर सभी अभ्यर्थियों की आपत्तियों और प्रतिनिधित्व पर निर्णय ले। साथ ही भर्ती की प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू कर सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर दिया जाए। आयोग को पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट भी कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी। इस फैसले के बाद प्रभावित मेडिकल ऑफिसर्स को बड़ी राहत मिली है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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