मंडी भाव

Vegetable Inflation: टमाटर, प्याज़ और आलू की बेतहाशा महंगाई से रसोई से मंडी तक हड़कंप

Vegetable Inflation: भारत में रोज़मर्रा की ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा रसोई है। सुबह से रात तक हमारे खाने की थाली में टमाटर, प्याज़ और आलू जैसे सब्ज़ियों की मौजूदगी तय मानी जाती है। लेकिन, जब इनकी कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं, तो आम आदमी की रसोई से लेकर मंडियों तक हड़कंप मच जाता है। 2023 और 2024 ने यह साबित कर दिया कि सब्ज़ियों के दाम अब सिर्फ खेती की लागत या मंडी की मांग से तय नहीं होते, बल्कि मौसम और Climate Change इसका सबसे बड़ा कारण बन गया है।

टमाटर पर Vegetable Inflation का कितना असर

भारत में टमाटर की सबसे ज़्यादा आपूर्ति हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक से होती है। सामान्यत: ये राज्य गर्मियों और बरसात के दौरान दिल्ली और अन्य शहरों में टमाटर भेजते हैं। लेकिन बीते दो वर्षों में बेमौसम बारिश, तेज धूप और अचानक आई बाढ़ ने फसल की हालत बिगाड़ दी।

  • हिमाचल में टमाटर उत्पादन में लगभग 11% की गिरावट दर्ज की गई।
  • कर्नाटक में भी करीब 13% उत्पादन घटा।

जून 2023 में दिल्ली की मंडियों में टमाटर 18 रुपये किलो बिक रहा था। लेकिन जुलाई आते-आते Tomato Price 67 रुपये किलो तक पहुँच गया। आज़ादपुर मंडी, जो एशिया की सबसे बड़ी थोक मंडी है, वहाँ रोज़ाना आने वाला माल 400-500 टन से घटकर केवल 318 टन रह गया।

एक व्यापारी ने बताया कि बारिश ने खेतों में ही टमाटर सड़ा दिए। जो माल मंडी तक पहुँचा भी, वह खराब क्वालिटी का था। इसके बावजूद Tomato Price गिरने के बजाय और बढ़ गया, क्योंकि सप्लाई बेहद कम थी।

प्याज भी नहीं बचा Vegetable Inflation से

प्याज़ की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत में नई बात नहीं है। कई बार इसकी वजह से राजनीतिक संकट तक पैदा हो चुके हैं। नवंबर 2023 में महाराष्ट्र में ओलावृष्टि और भारी बारिश ने प्याज़ की खड़ी फसल तबाह कर दी।

  • उत्पादन में 28.5% की गिरावट आई।
  • Onion Price 30 रुपये किलो से बढ़कर 39 रुपये किलो तक पहुँच गया।

ग़रीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की थाली में प्याज़ का इस्तेमाल तुरंत कम हो गया। चटनी, रायता और सब्ज़ियों का स्वाद फीका पड़ गया। यही वजह है कि Onion Price भारत के हर उपभोक्ता के लिए संवेदनशील मुद्दा बना रहता है।

Vegetable Inflation से आलू नहीं रहा गरीब का सहारा

आलू को हमेशा “गरीब का सहारा” कहा जाता है। यह ऐसी सब्ज़ी है जो लगभग हर घर में रोज़ाना इस्तेमाल होती है। लेकिन 2023-24 में Potato Price भी काफ़ी बढ़ा।

  • पश्चिम बंगाल में भारी बारिश ने फसल पर असर डाला।
  • उत्तर प्रदेश में पाला और ठंड के कारण पैदावार 7% कम हो गई।

अगस्त 2024 में आज़ादपुर मंडी में आलू 21 रुपये किलो बिका। यह दाम पिछले तीन वर्षों के औसत 10-14 रुपये प्रति किलो से लगभग दोगुना था। इससे साफ है कि Potato Price भी अब मौसम पर पूरी तरह निर्भर हो चुका है।

Vegetable Inflation की दृष्टि से 2024 बना सबसे मुश्किल साल

2024 भारत के लिए जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आया।

  • गर्मी का रिकॉर्ड टूटा।
  • बरसात बेमौसम हुई।
  • कहीं ओले पड़े, तो कहीं बाढ़ ने खेत तबाह कर दिए।

जुलाई 2023 में Vegetable Inflation 37% थी, लेकिन अक्टूबर 2024 में यह बढ़कर 42% तक पहुँच गई। उपभोक्ता खाद्य महंगाई भी 11% दर्ज की गई। यानी Climate Change ने सीधे हमारी रसोई और थाली पर हमला बोला।

Vegetable Inflation से सबसे बड़ी मार छोटे किसानों पर

भारत में टमाटर, प्याज़ और आलू जैसी फ़सलें ज़्यादातर छोटे और सीमांत किसान ही उगाते हैं। इनके पास न तो कोल्ड स्टोरेज होता है, न रेफ़्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट और न ही बीमा का भरोसा।

एक किसान ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा: “अगर बारिश ज़्यादा हो जाए तो फसल गल जाती है, और अगर तेज़ धूप पड़ जाए तो फूल ही झड़ जाते हैं। हम बीज और खाद के लिए कर्ज़ लेते हैं, और जब फसल चौपट होती है तो कर्ज़ का बोझ और बढ़ जाता है।”

इस तरह Climate Change और Vegetable Inflation का सबसे बड़ा खामियाजा वही किसान भुगतते हैं, जो हमारी थाली तक सब्ज़ियाँ पहुँचाते हैं।

भविष्य के लिए Vegetable Inflation के समाधान की ज़रूरत

अब सवाल यह है कि इस संकट से कैसे निपटा जाए।

  1. Greenhouse Farming – टमाटर जैसी संवेदनशील फ़सलों को ग्रीनहाउस में उगाया जा सकता है ताकि बारिश और धूप का असर कम हो।
  2. Storage और Transport – किसानों को कोल्ड स्टोरेज और रेफ़्रिजरेटेड ट्रकों की सुविधा मिले।
  3. Supply Chain – मंडियों तक तेज़ और सुरक्षित सप्लाई चेन बनाई जाए।
  4. Weather Information – किसानों तक समय पर मौसम की जानकारी पहुँचे ताकि वे पहले से तैयारी कर सकें।
  5. Crop Insurance – छोटे किसानों को सस्ती और भरोसेमंद बीमा योजनाओं से जोड़ा जाए।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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