खेती किसानी

MP Wheat Procurement: एमपी में आधा-अधूरा पड़ा है गिरदावरी का काम, गेहूं के लिए पंजीयन नहीं होने से किसान परेशान

MP Wheat Procurement: बैतूल में 50% गिरदावरी अधूरी, 7 फरवरी से शुरू पंजीयन में अब तक सिर्फ 148 किसान दर्ज

MP Wheat Procurement: एमपी में आधा-अधूरा पड़ा है गिरदावरी का काम, गेहूं के लिए पंजीयन नहीं होने से किसान परेशान
MP Wheat Procurement: एमपी में आधा-अधूरा पड़ा है गिरदावरी का काम, गेहूं के लिए पंजीयन नहीं होने से किसान परेशान

MP Wheat Procurement: बैतूल जिले में इस समय किसान दोहरी परेशानी से गुजर रहे हैं। एक ओर समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो दूसरी ओर गिरदावरी का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से बड़ी संख्या में किसान पंजीयन नहीं करा पा रहे हैं। यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो कई किसान इस बार खरीदी प्रक्रिया से बाहर रह सकते हैं।

गिरदावरी अधूरी, पंजीयन प्रभावित

जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन 7 फरवरी से प्रारंभ हो चुका है। हालांकि अब तक केवल 148 किसानों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि गिरदावरी का कार्य लगभग आधा ही पूरा हो सका है। गिरदावरी की अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित है, लेकिन मौजूदा रफ्तार को देखते हुए समय पर काम पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है।

पंजीयन में क्यों जरूरी है गिरदावरी

गिरदावरी के माध्यम से यह दर्ज किया जाता है कि किसान ने किस भूमि पर कौन सी फसल बोई है और उसका रकबा कितना है। यही आंकड़े आगे चलकर समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए आधार बनते हैं। यदि किसी खेत की जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं है तो संबंधित किसान का पंजीयन नहीं हो पाता। यही कारण है कि कई किसान पंजीयन केंद्रों से निराश लौट रहे हैं।

तारा एप बना परेशानी की वजह

गिरदावरी का पूरा काम तारा एप के जरिए किया जा रहा है। पटवारियों के अनुसार, इस एप में हाल के बदलावों के बाद कार्य पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। अब खेत में केवल पहुंच जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेत के बीचोंबीच तय बिंदु यानी जीरो नंबर पर जाकर ही एंट्री दर्ज हो पा रही है। इतना ही नहीं, आसपास के खेतों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। इससे एक-एक खेत की गिरदावरी में काफी समय लग रहा है।

खाली खेतों में भी बढ़ी जटिलता

पहले जिन खेतों में फसल नहीं बोई जाती थी, वहां केवल क्षेत्र में पहुंचने पर ही जानकारी दर्ज हो जाती थी। अब इन पड़ती जमीनों के लिए भी जीरो नंबर तक पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है। गन्ना बाड़ी जैसे क्षेत्रों में तो यह प्रक्रिया और भी कठिन साबित हो रही है। इन कारणों से काम की गति धीमी हो गई है।

बार-बार बदलता एप वर्जन

पटवारियों को तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2018 से तारा एप में साल में दो बार नया संस्करण जारी किया जा रहा है। जैसे ही कर्मचारी एक व्यवस्था को समझ पाते हैं, वैसे ही नया अपडेट आ जाता है। कई पटवारी तकनीकी रूप से अधिक दक्ष नहीं हैं, जिससे काम में अतिरिक्त समय लग रहा है। प्रशिक्षण और समुचित तकनीकी सहायता की कमी भी रफ्तार को प्रभावित कर रही है।

सर्वेयरों की कमी से बढ़ी दिक्कत

सरकार की ओर से हर गांव में गिरदावरी में सहयोग के लिए लोकल यूथ सर्वेयर नियुक्त किए गए हैं। लेकिन एप से जुड़ी दिक्कतों और काम के बढ़ते दबाव के कारण कई सर्वेयर यह कार्य छोड़ चुके हैं। नए लोगों को काम सिखाने में भी समय लगता है, जिससे प्रक्रिया और धीमी हो रही है।

खरीदी पर पड़ सकता है असर

गेहूं पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च तय है। यदि 28 फरवरी तक गिरदावरी पूरी नहीं होती है तो पंजीयन की अवधि बढ़ानी पड़ सकती है। पिछले वर्ष जिले में 12,819 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 3,958 किसानों ने कुल 25,730 मीट्रिक टन गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचा था। इस वर्ष यदि रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं हुए तो खरीदी की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

किसानों ने यह उठाई मांग

किसानों का कहना है कि गिरदावरी का काम जल्द पूरा कराया जाए और तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाए। उनका मानना है कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तय समय में गिरदावरी पूरी कर पंजीयन प्रक्रिया को सुचारु बनाना है।

सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-

देश-दुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending खबरों के लिए जुड़े रहे betulupdate.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button