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Betul Cage Culture Fish Farming: बैतूल में पहली बार होगी केज कल्चर से मछली पालन की शुरुआत, महिलाओं को मिलेगा नया रोजगार

Betul Cage Culture Fish Farming: Cage culture fish farming to be introduced in Betul for the first time; women to gain new employment opportunities.

Betul Cage Culture Fish Farming: बैतूल में पहली बार होगी केज कल्चर से मछली पालन की शुरुआत, महिलाओं को मिलेगा नया रोजगार
Betul Cage Culture Fish Farming: बैतूल में पहली बार होगी केज कल्चर से मछली पालन की शुरुआत, महिलाओं को मिलेगा नया रोजगार

Betul Cage Culture Fish Farming: बैतूल जिले में महिलाओं की आजीविका बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से पहली बार केज कल्चर तकनीक से मछली पालन कराया जाएगा। इस परियोजना के जरिए महिला स्व-सहायता समूहों को आधुनिक मत्स्य पालन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने की तैयारी है। योजना के लिए दो जलाशयों का चयन किया गया है और करीब 58 लाख रुपये की लागत से इसे शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है।

बैतूल जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए आधुनिक मत्स्य पालन परियोजना शुरू की जा रही है। जिले में पहली बार केज कल्चर तकनीक के माध्यम से मछली पालन किया जाएगा। इस योजना को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत तैयार किया गया है और इसके लिए आवश्यक वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है।

अब तक जिले में पारंपरिक तरीके से ही मत्स्य पालन किया जाता रहा है। इसमें तालाबों और बांधों में मछली के बीज छोड़े जाते हैं और निर्धारित समय बाद जाल के जरिए मछलियां पकड़ी जाती हैं। लेकिन नई परियोजना के तहत वैज्ञानिक तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

क्या है केज कल्चर तकनीक

केज कल्चर मछली पालन की एक आधुनिक पद्धति है, जिसमें पानी के भीतर तैरते हुए पिंजरों का उपयोग किया जाता है। इन पिंजरों का आकार लगभग 6 बाय 4 फीट रखा जाएगा। इन्हीं के अंदर मछली के बीज डाले जाएंगे और उनके भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। मछलियों का पूरा विकास इसी सुरक्षित घेरे में होगा, जिससे वे अन्य प्रजातियों के संपर्क में नहीं आएंगी। इसका फायदा यह होगा कि जिस प्रजाति के बीज डाले जाएंगे, उसी नस्ल की शुद्ध मछलियों का उत्पादन मिलेगा और उत्पादन क्षमता भी पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक रहेगी।

दो जलाशयों का हुआ चयन

इस परियोजना के लिए सारणी स्थित सतपुड़ा डैम और बैतूल के सांपना डैम का चयन किया गया है। दोनों जलाशयों में 18-18 केज लगाए जाएंगे। इन पिंजरों, मछली के बीज, चारे और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर प्रत्येक जलाशय के लिए 29 लाख रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार पूरी परियोजना की कुल लागत 58 लाख रुपये आंकी गई है।

वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी

परियोजना के लिए धनराशि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) दिल्ली तथा डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड) बैतूल को प्रस्ताव भेजे गए हैं। जैसे ही राशि स्वीकृत होगी, दोनों जलाशयों में केज स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

उत्पादन और आय में होगा इजाफा

योजना के अनुसार पहले वर्ष में एक केज से करीब दो टन मछली उत्पादन होने का अनुमान है। आने वाले वर्षों में यही उत्पादन बढ़कर लगभग ढाई टन तक पहुंच सकता है। 18 केजों से पहले साल लगभग 9 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि दूसरे वर्ष से यह लाभ बढ़कर 15 से 16 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इस परियोजना के तहत मुख्य रूप से पंगेशियस प्रजाति की मछली का उत्पादन किया जाएगा। इस मछली की बाजार में अच्छी मांग रहती है और इसके बीज तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

महिला समूहों को मिलेगी जिम्मेदारी

सतपुड़ा डैम और सांपना डैम पर अलग-अलग महिला स्व-सहायता समूहों को इस परियोजना का संचालन सौंपा जाएगा। परियोजना के प्रति उनकी भागीदारी और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए कुल लागत का 20 प्रतिशत योगदान संबंधित समूहों से भी लिया जाएगा। इससे महिलाएं केवल लाभार्थी ही नहीं बल्कि परियोजना की सहभागी भी बनेंगी।

जिले में जलीय कृषि को मिलेगा बढ़ावा

केज कल्चर तकनीक के जरिए बैतूल में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन की नई शुरुआत होगी। इस पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होती और मौजूदा जलाशयों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ जिले में मत्स्य पालन आधारित आजीविका को भी नई दिशा मिलेगी। वर्तमान में इस तकनीक के सफल उपयोग के लिए झारखंड राज्य की काफी चर्चा होती है और अब बैतूल भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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