खेती किसानी

Bhindi Ki Kheti : सिंचाई के बाद भी सूख रहे हैं भिंडी के पौधे तो तुरंत उठाएं यह कदम

Bhindi Ki Kheti : फसलें चाहे कोई भी हो, उनके प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों के चलते भी नुकसान होता रहता है। यही कारण है कि किसान यही कामना करते हैं कि उनकी फसल सभी तरह की परेशानियों से सुरक्षित रहे ताकि उनके परिश्रम की कीमत मिल सके।

Bhindi Ki Kheti : फसलें चाहे कोई भी हो, उनके प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों के चलते भी नुकसान होता रहता है। यही कारण है कि किसान यही कामना करते हैं कि उनकी फसल सभी तरह की परेशानियों से सुरक्षित रहे ताकि उनके परिश्रम की कीमत मिल सके।

कृषि उपजों के अलावा सब्जियों की फसल पर बीमारियों का प्रकोप कुछ ज्यादा ही होता रहता है। ऐसे में सब्जियों की फसल उपजाने वाले किसानों को और अधिक सतर्क रहना होता है। एक ऐसे ही किसान द्वारा अपनी करीब 30 दिन पुरानी भिंडी की फसल को लेकर कृषि वैज्ञानिक से सवाल किया गया है।

किसान द्वारा अपनी समस्या बताई गई है कि उनके भिंडी के पौधे सूख रहे हैं। उन्होंने इसका कारण और पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उपाय बताए जाने का अनुरोध किया है। इस पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. केवल सिंह बघेल द्वारा विस्तृत उत्तर दिया गया है।

Bhindi Ki Kheti : सिंचाई के बाद भी सूख रहे हैं भिंडी के पौधे तो तुरंत उठाएं यह कदम
Bhindi Ki Kheti : सिंचाई के बाद भी सूख रहे हैं भिंडी के पौधे तो तुरंत उठाएं यह कदम

बेल वाली सब्जी की करें बोवनी (Bhindi Ki Kheti)

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बघेल ने बताया है कि गर्मी के दिनों में खेत में अथवा क्यारियों में मेड़ नाली बनायें जो एक तरफ से बंद हों। इसके साथ ही बेल वाली सब्जियों की बोनी थालों में करें।

इन थालों की मेड़ हमेशा ऊँची बनायें ताकि थालों के भीतर नमी बनी रहे। भिंडी जैसी फसलों के बीज की बुआई हमेशा नालियों में करें क्योंकि नालियों में देर तक नमी रहती है।

नमी बनाए रखने करें सिंचाई (Bhindi Ki Kheti)

भिंडी के खेत में दरारें पड़ी हुई हैं क्योंकि नमी की कमी है। खेत में पर्याप्त नमी बनाये रखने के लिये यदि रोज सिंचाई भी करनी पड़े तो करें। यदि भिंडी के पौधों के ऊपर हरी कपड़े की नैट बाँध सकें तो पौधों को गर्मी से बचाने के लिये, बाँधें।

इस दवा का करें इस्तेमाल (Bhindi Ki Kheti)

भिंडी के पौधों की पत्तियाँ भी कट रही हैं और छेद भी हो रहे हैं। अत: पौधों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये डायफैंथ्यूरॉन दवा की 25 ग्राम दवा पार्ट 15 लीटर पानी की टंकी में घोलें। इस प्रकार से तैयार घोल की 13 से 14 टंकी दवा को प्रति एकड़ के दर से उपयोग करें।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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