बदहाल गांव : कहीं नदी रोक लेती है रास्ता तो कहीं बाइक तक ले जाने सड़क नहीं, मुसीबतें उठाने मजबूर ग्रामीण
▪️ उत्तम मालवीय, बैतूल
Betul News : यूं तो विकास के इतने दावें सुन चुके हैं कि ऐसा लगता है कि अब बैतूल जिले में करने को कुछ बचा ही नहीं। वहीं दूसरी ओर समय-समय पर जिले के ग्रामीण अंचलों से ऐसी खबरें भी आती हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। आश्चर्य इस बात का होता है कि इन ग्रामीणों को आज तलक भी अपने गांव या घर तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित रास्ता तक नसीब नहीं हो सका है।
आज हम बैतूल के ऐसे ही 2 बदहाल गांवों के बारे आपको जानकारी दे रहे हैं। इनमें एक गांव की स्थिति यह है कि वहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। चार पहिया वाहन तो दूर बाइक तक वहां नहीं ले जा सकते। पैदल चल पाना भी मुश्किल है। वहीं दूसरे गांव का रास्ता नदी रोक लेती है। बाढ़ आने पर ग्रामीण कई-कई दिनों तक घर से नहीं निकल पाते। यदि खेत में है तो भूखे-प्यासे वहीं कई दिन गुजारना पड़ता है। ग्रामीण सबके पास गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

यह है बैतूल के भीमपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चूनालोहमा का ग्राम भुरूढाना। इस गांव में आज तक पक्की सड़क नसीब होना तो दूर ग्रेवल रोड भी नहीं बन पाई। ऐसे में यहां के लोग बारिश में कैसे आवाजाही करते होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। रास्ता ऐसा है कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढे हैं, यह समझ ही नहीं आता। ग्रामीण जिस रास्ते से आवाजाही करते हैं उसमें बड़े-बड़े पत्थर हैं। ऐसे में रास्ते को चलने लायक बनाए रखने ग्रामीण् खुद ही कभी-कभी श्रमदान कर उन पत्थरों को हटाते हैं।
बैलगाड़ी से पहुंचाते गर्भवती महिलाओं को
गांव में चारपहिया वाहन तो दूर बाइक तक आसानी से नहीं जा सकती। ऐसे में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना हो तो एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में ग्रामीण गाड़ी बैल से उन्हें किसी तरह घाट के ऊपर तक ले जाते हैं। उसके बाद एंबुलेंस लेकर जाती है। कई बार इसी मशक्कत में इतनी देर हो जाती है कि गर्भवती महिला या गंभीर बीमार की जान तक चली जाती है। ग्रामीण दीपक बड़ोदे बताते हैं कि पहले कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

सबके सामने लगा चुके गुहार, सुनवाई नहीं
ग्रामवासियों का कहना है कि सड़क बनवाने के लिए हम सारे जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं। अधिकारियों को भी अपना दुखड़ा सुना चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वोट लेने के लिए नेता बड़े-बड़े आश्वासन जरुर देते हैं, लेकिन चुनाव में जीतते ही दोबारा गांव की ओर झांक कर भी नहीं देखते हैं। वहीं अधिकारियों ने भी कभी उनकी समस्या को संजीदगी से नहीं ली। यही कारण है कि आजादी के अमृत महोत्सव में भी यहां के लोग इतनी तकलीफें झेलते हुए जैसे-तैसे जीवन जीने को मजबूर हैं। लगातार अनदेखी से ग्रामीणों में खासा आक्रोश है।
जान जोखिम में डाल कर नदी पार करना मजबूरी

▪️ निखिल सोनी, आठनेर
Betul Update : इधर आठनेर ब्लॉक की धनोरी ग्राम पंचायत के 3 गांव नदी पर पुल नहीं होने से मुसीबत झेलने को मजबूर हैं। इस पंचायत में स्थित स्थानीय नदी ग्राम धनोरी, टिपनापुर और खड़गड़ के ग्रामीणों को हर साल बारिश में परेशान करती है। बारिश होते ही नदी में पानी आ जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर मवेशियों सहित खुद नदी पार करना होता है। ग्रामीण संजय और राकेश बताते हैं कि बारिश शुरू होते ही बाढ़ आ जाती है। जिससे घर में मौजूद व्यक्ति खेत नहीं जा सकता। देखें वीडियो…
यदि कोई खेत में है तो वह घर नहीं लौट सकता। ऐसे में बाढ़ के उतरते तक उसे भूखे-प्यासे खेत में ही रहने को मजबूर होना पड़ता है। इसका हल केवल नदी पर पुलिया निर्माण है, लेकिन लगातार मांग के बावजूद आज तक पुलिया नहीं बनी। पंचायत के माध्यम से और कई बार जनप्रतिनिधियों से पुलिया निर्माण की मांग की, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इधर जिला पंचायत सदस्य अर्चना कृष्णा गायकी ने शीघ्र पुलिया निर्माण कराने का आश्वासन दिया है।



