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MP Employee Promotion: मप्र में 4 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, फिर शुरू होगी प्रमोशन प्रक्रिया, सरकार ने जारी किए निर्देश

MP Employee Promotion: Major relief for 4 lakh government employees in MP; promotion process to resume; government issues directives.

MP Employee Promotion: मप्र में 4 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, फिर शुरू होगी प्रमोशन प्रक्रिया, सरकार ने जारी किए निर्देश
MP Employee Promotion: मप्र में 4 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, फिर शुरू होगी प्रमोशन प्रक्रिया, सरकार ने जारी किए निर्देश

MP Employee Promotion: मध्य प्रदेश के चार लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने साफ किया है कि पदोन्नति नियम-2025 पर हाई कोर्ट की ओर से किसी तरह की रोक नहीं है। इसी आधार पर सभी विभागों को प्रमोशन की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी पदोन्नतियां अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।

पदोन्नति प्रक्रिया फिर शुरू करने के निर्देश

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने मंगलवार को सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों की पदोन्नति लंबित है, उनकी सूची तैयार की जाए। साथ ही रिक्त पदों का विवरण बनाकर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि नियमानुसार प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

कानूनी राय के बाद लिया गया फैसला

सरकार ने यह निर्णय प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय के आधार पर लिया है। जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान स्थिति में विभागों के सामने पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

सरकार का कहना है कि पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं, लेकिन हाई कोर्ट ने इन नियमों पर किसी प्रकार का अंतरिम स्थगन आदेश जारी नहीं किया है। इसलिए नियम प्रभावी हैं और उनके आधार पर पदोन्नति की कार्रवाई की जा सकती है।

हर प्रमोशन रहेगा अदालत के अंतिम फैसले के अधीन

सरकार ने कानूनी सलाह के आधार पर यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पदोन्नति आदेश में यह उल्लेख किया जाएगा कि वह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। यदि भविष्य में अदालत का फैसला पदोन्नति नियमों के विपरीत आता है, तो सरकार को उन पदोन्नतियों में आवश्यक संशोधन करना पड़ सकता है। विधिक विशेषज्ञों ने सरकार को यह भी आगाह किया है कि यदि अंतिम फैसला नियमों के खिलाफ आता है तो प्रशासनिक स्तर पर कई व्यावहारिक कठिनाइयां और बदलाव की स्थिति पैदा हो सकती है।

फिर से होगी नई बेंच में सुनवाई

कानूनी राय में यह भी बताया गया है कि हाई कोर्ट ने फरवरी 2026 में इस मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि निर्णय आने से पहले एक न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट चले गए और दूसरे न्यायाधीश का तबादला हो गया। इसके कारण अब इस मामले की सुनवाई नई बेंच के समक्ष नए सिरे से होगी।

तीन संभावित स्थितियां बन सकती हैं

इस मामले में आगे अदालत के फैसले के आधार पर तीन अलग-अलग परिस्थितियां बन सकती हैं-

यदि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार के पदोन्नति नियमों को वैध ठहराते हैं, तो जिन कर्मचारियों को प्रमोशन मिलेगा, उनकी पदोन्नति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
यदि अदालत सरकार के पदोन्नति नियमों को ही अवैध घोषित कर देती है, तो पूरी पदोन्नति प्रक्रिया निरस्त मानी जाएगी और जिन कर्मचारियों को प्रमोशन मिला होगा, उन्हें पूर्व पद पर वापस भेजना पड़ सकता है।
तीसरी स्थिति यह हो सकती है कि अदालत केवल आरक्षण से जुड़े कुछ प्रावधानों को निरस्त करे। ऐसी स्थिति में सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित होगी, जिन्हें उन विशेष प्रावधानों के आधार पर लाभ मिला होगा।

सरकार ने प्रशासनिक जरूरत भी बताई

राज्य सरकार ने कानूनी परामर्श के दौरान यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश का प्रशासन स्वीकृत पदों के केवल 40 प्रतिशत कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। कई वर्षों से पदोन्नति नहीं होने के कारण वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं। इसका असर न केवल प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है, बल्कि निचले स्तर पर नई भर्तियों की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। सरकार का मानना है कि जनहित को देखते हुए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करना जरूरी है।

नई भर्तियों का भी खुलेगा रास्ता

सरकार के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से करीब चार लाख पात्र अधिकारी और कर्मचारियों को लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही जब वरिष्ठ कर्मचारियों का प्रमोशन होगा तो निचले स्तर के लगभग डेढ़ लाख पद अगले एक वर्ष के भीतर रिक्त हो जाएंगे। इन पदों पर नई भर्ती का रास्ता खुलेगा, जिससे युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी गति मिलेगी।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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