MP Agriculture Machinery Rental: एमपी के हर विधानसभा क्षेत्र में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान, छोटे किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
MP Agricultural Machinery Rental: Agricultural machinery rental outlets to open in every assembly constituency of MP; small farmers to benefit significantly.

MP Agriculture Machinery Rental: मध्यप्रदेश में किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक कृषि यंत्र किराये की दुकान खोली जाएगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को कम खर्च में आधुनिक मशीनें उपलब्ध हो सकेंगी। दूसरी ओर, विदिशा जिला कृषि उपकरण निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है, जहां बने उपकरण अब देश के साथ विदेशों में भी पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश सरकार किसानों की सुविधा और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए नई पहल कर रही है। इसके तहत राज्य की प्रत्येक विधानसभा में कम से कम एक कृषि यंत्र किराये की दुकान स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्रों की आसान पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें महंगे उपकरण खरीदने की जरूरत न पड़े और कम लागत में बेहतर खेती की जा सके।
कृषक कल्याण वर्ष के दौरान इस योजना के परिणाम दिखाई देने लगेंगे। वर्तमान में प्रदेश में 5,260 कृषि यंत्र किराये के केंद्र संचालित हैं। सरकार ने अब हर वर्ष 1,060 नए कृषि यंत्र किराये की दुकानें शुरू करने का लक्ष्य तय किया है। इससे आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ कृषि उत्पादन में भी सुधार की उम्मीद है।
छोटे किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रदेश के अधिकांश छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्र खरीदना आसान नहीं होता। ऐसे में किराये पर मशीनें उपलब्ध होने से खेती की लागत कम होगी और समय की भी बचत होगी। किसान न्यूनतम सेवा शुल्क देकर जरूरत के अनुसार आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर सकेंगे। इससे खेती के विभिन्न कार्य तेजी और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जा सकेंगे।

विदिशा बना कृषि उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र
कृषि यंत्र निर्माण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। इस दिशा में विदिशा जिले ने एक मिसाल पेश की है। यहां लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयां संचालित हो रही हैं, जहां ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रालिक ट्रॉली, कल्टीवेटर, प्लाऊ सहित कई आधुनिक कृषि उपकरण तैयार किए जा रहे हैं।
विदिशा में निर्मित उपकरणों की मांग केवल मध्यप्रदेश या देश के अन्य राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका निर्यात भी किया जा रहा है। यहां से मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, यूगांडा, घाना, अल्जीरिया, ग्वाटेमाला, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में कृषि उपकरण भेजे जा रहे हैं।
युवा उद्यमियों को भी मिल रहा प्रोत्साहन
सरकार कृषि उपकरण निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को भी इस क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार भी हो रहा है।
उषा एग्रो के उपकरण विदेशों तक पहुंचे
विदिशा की उषा एग्रो के संचालक मानस गुप्ता बताते हैं कि उनकी कंपनी खेती में उपयोग होने वाले लोडर, डिलोडर, कल्टीवेटर सहित कई कृषि उपकरण तैयार करती है। उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय की शुरुआत उनके पिता ने वर्ष 1993 में छोटे स्तर पर की थी। समय के साथ कारोबार का विस्तार होता गया और आज उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने बताया कि उनके सबसे बड़े ग्राहक स्थानीय किसान हैं। हालांकि उत्पादों की आपूर्ति देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों में भी की जाती है। वर्तमान में नाइजीरिया, सूडान, केन्या, यूगांडा, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, घाना, अल्जीरिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित 10 से अधिक देशों में उनके कृषि उपकरण भेजे जा रहे हैं। उनके कारोबार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा देश में और एक-तिहाई हिस्सा विदेशों में होता है। कंपनी का वार्षिक कारोबार करीब चार करोड़ रुपये है।
सरकारी सहयोग से मिला विस्तार
मानस गुप्ता का कहना है कि डॉ. मोहन यादव सरकार की नीतियों से उन्हें उत्पादन बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने में काफी मदद मिली है। विदेशों तक उत्पाद पहुंचाने में भी शासन का सहयोग मिला। उन्होंने बताया कि सरकार की पहल पर उन्हें जी-20 सम्मेलन में शामिल होने का अवसर मिला, जिसमें कुल खर्च का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा सरकार ने वहन किया।
कोरोना काल में शुरू किया उद्योग
संजय उद्योग के संचालक विष्णु शर्मा ट्रैक्टर से जुड़े कृषि उपकरण जैसे कल्टीवेटर और प्लाऊ का निर्माण करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने इस उद्योग की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में ही किसानों ने उनके उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद दिया, जिससे उनका उत्साह बढ़ा और कारोबार लगातार आगे बढ़ता गया।
उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद मुख्य रूप से विदिशा और आसपास के जिलों में बिकते हैं, जबकि कुछ उपकरण दूसरे राज्यों में भी भेजे जाते हैं। उनका वार्षिक कारोबार लगभग 50 लाख रुपये है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार नए उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करे, जिससे अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें।
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किसान इंडस्ट्रीज और एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी भी कर रहे बेहतर काम
मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज के विपिन रघुवंशी ने बताया कि उनकी इकाई में कल्टीवेटर, प्लाऊ, लोडर और डिलोडर जैसे उपकरण बनाए जाते हैं। अधिकांश उत्पाद विदिशा और आसपास के क्षेत्रों में ही उपयोग किए जाते हैं, जबकि आसपास के जिलों के किसान भी उनके उपकरण खरीदते हैं।
वहीं मेसर्स एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी के दीपक नरवरिया ने बताया कि उनकी कंपनी खेती के हर चरण के लिए आवश्यक उपकरण तैयार करती है। खेत तैयार करने, रोपाई, बुवाई और कटाई तक उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों का निर्माण किया जाता है। उनका बाजार मध्यप्रदेश के साथ अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। हालांकि अधिकतर उत्पाद विदिशा और आसपास के किसानों की मांग पूरी करने में ही उपयोग हो जाते हैं। उनकी कंपनी का वार्षिक कारोबार करीब तीन करोड़ रुपये है और उनके प्रमुख ग्राहक किसान तथा कृषि क्षेत्र से जुड़ी संस्थाएं हैं।
आधुनिक खेती को मिलेगी नई गति
सरकार की नई योजना और प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहा कृषि उपकरण निर्माण उद्योग किसानों के लिए राहत लेकर आ रहा है। एक ओर जहां हर विधानसभा में कृषि यंत्र किराये की दुकान खुलने से छोटे किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में तैयार हो रहे कृषि उपकरण देश और विदेश में पहचान बना रहे हैं। इससे खेती अधिक आधुनिक, किफायती और लाभकारी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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