Toy Train Ooty : पांच घंटे के सफर में जन्नत के जैसे खूबसूरत नजारे दिखा देती है यह टॉय ट्रेन, इसकी सैर का आनंद उठाने बड़ी तादाद में पहुंचते हैं सैलानी

दिल को सुकून देने वाले प्राकृतिक रूप से खूबसूरत नजारे देखने लोग मोटी रकम खर्च करके विदेश तक जाते हैं। यह बात अलग है कि हमारे ही देश में ऐसे कुदरती स्थानों की कोई कमी नहीं है। भारत में भी ऐसे कई स्थान हैं जहां पर प्रकृति ने भरपूर सौंदर्य बिखेरा है। ऐसे ही कुछ स्थानों की सैर के लिए भारतीय रेलवे ने बेहतरीन व्यवस्था भी कर रखी है। ऐसा ही एक स्थान भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में भी हैं। खासकर यहां चलने वाली टॉय ट्रेन (Ooty toy train) तो बेहद प्रसिद्ध है।
यह टॉय ट्रेन तमिलनाडु के हिल स्टेशन ऊटी (Ooty) से चलती है। इस नीलगिरी रेलवे लाइन (Nilgiri Mountain Railway) की यात्रा न सिर्फ सुंदर नजारों के लिए मशहूर है, बल्कि इसकी परिकल्पना लगभग उतनी ही पुरानी है, जितनी पुरानी भारतीय रेलवे है। इसलिए इस रेलवे ट्रैक की अहमियत आज तक जरा भी कम नहीं हुई है। इस ट्रेन यात्रा की शुरुआत 1899 में शुरू हुई थी और तब से यह लगातार सैलानियों की फेवरेट ट्रेन बनी हुई है। हर साल बड़ी संख्या में इस ट्रेन की यात्रा करने बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचते हैं।
पांच घंटे की यात्रा में दिखते हैं अद्भुत नजारे
नीलगिरी माउंटेन रेलवे 5 घंटे में कुल 46 किमी का सफर पूरा कराती है। इसलिए इसे भारत की सबसे धीमी ट्रेन के रूप में जाना जाता है। भांप से चलने वाली इस ट्रेन के सफर में आप कभी भी न भूल सकने वाली खूबसूरत वादियों, ऊंचे पहाड़ों के मनोरम दृश्यों को देख सकते हैं।
इस टॉय ट्रेन का सफर ऊटी के उदगमंडल रेलवे स्टेशन से शुरू होता है। ये ट्रेन अंधेरी और घुमावदार सुरंगों, हरे-भरे जंगल और पहाड़ी ढलान से गुजरती है। इसके सफर के दौरान आप केलर, कुन्नूर, और वेलिंगटन जैसी आकर्षक जगहों से गुजरेंगे। जैसे ही आप धीरे-धीरे आगे बढेंगे, धुंध और कोहरे के साथ ट्रेन का सफर रोमांचक होता जाएगा।
दिखेंगे धान के खेत और चाय के बागान
नीलगिरि माउंटेन रेलवे के सात मेन स्टॉपओवर की बात करें तो ये कल्लार, एडरली, हिलग्रोव, रननीमेड, लवडेल, कटेरी रोड, और कुन्नूर हैं। आपको मेट्टुपालयम से कल्लर तक एक लाइन में सुंदर धान के खेत दिखेंगे। वहीं आगे कल्लार से कुन्नूर तक 21 किमी की दूरी तक फैले ट्रेल में कई मोड़ हैं। जहां कई सुरंगों से होकर गुजरना पड़ता है। आपको बताते चलें कि कुन्नूर नीलगिरि पर्वत का दूसरा सबसे बड़ा हिल स्टेशन है। कुन्नूर से होकर गुजरने वाले नीलगिरि माउंटेन रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ चाय के बागान भी देखने को मिलेंगे।
लकड़ी से बने हैं इस ट्रेन के डिब्बे
नीले और क्रीम रंग की इस ट्रेन के डिब्बे लकड़ी के बने हैं, जिनमें बड़ी खिड़कियां हैं। ट्रेन में फर्स्ट क्लास और जनरल कैटेगरी दोनों के डिब्बे हैं। नीलगिरि माउंटेन रेलवे एशिया का सबसे कठिन ट्रैक है। यह समुद्र तल से 1,069 फीट से लेकर 7,228 फीट तक है। इसके सबसे शानदार सुंदर नजारे आपको मेट्टुपालयम से कुन्नूर तक देखने को मिलेंगे। मानसून के दौरान यह रूट और खूबसूरत बन जाता है। इसके सफर की पहले से बुकिंग कराना ज्यादा बेहतर रहता है।
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