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सत्ता से चिपके नहीं, आम जनता के बीच जाकर संवाद करते हैं ‘शिवराज’

  • राजीव खण्डेलवाल
    भारत का हृदय प्रदेश ‘‘मध्यप्रदेश’’ की जनता के हृदय में बसकर ‘राज’ करने वाले शिवराज सिंह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं। अर्थात ‘‘शिव का राज’’ है। आज उनका जन्म दिवस है। इस सुखद अवसर पर शिवराज सिंह को हार्दिक बधाइयां एवं भविष्य की अनन्य मधुर हार्दिक शुभकामनाएं।

    वर्तमान लोकतंत्र की गला काट राजनीति के चलते 15 वर्षों से मुख्यमंत्री के ‘‘कांटों भरे ताज‘‘ पर लगातार ‘‘अंगद के पांव की तरह‘‘ जमे रह कर (भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में) शासन करना कोई अचंभे से कम नहीं है। वैसे भी राजनीति में ‘‘कागज की नावें नहीं चला करतीं‘‘। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर आज तक के लोकतांत्रिक इतिहास में शिवराज सिंह सर्वाधिक समय लिये मुख्यमंत्री पद पर आरूढ़ है, ‘‘सत्तारूढ़’’ नहीं। वह इसलिये कि वे कबीर की उक्ति ‘‘सत्ता महाठगिनी हम जानी‘‘ का मर्म जानते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे सत्ता से चिपके नहीं रहे, बल्कि कुर्सी के आकर्षण से विकर्षित होते हुए आम जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित कर समय गुजारते रहे हैं।

    इस सृष्टि का एक बहुत ही अल्प कण, ‘‘मध्य प्रदेश’’ की धरती पर शिव कई थपेड़े सहते हुये डंपर कांड, व्यापमं कांड, ई टेंडर घोटाला, खनिज माफिया को संरक्षण देने का आरोप आदि का सामना करते हुए, ‘‘अंगारों पर पैर रख कर‘‘ सफलतापूर्वक बेदाग निकलते हुये मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अभी भी विराजमान हैं। प्रदेश के वे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने चौथी बार सबसे ज्यादा समय मुख्यमंत्री रहकर वर्तमान में भी है। आखिर ‘‘शिव’’ का व्यक्तित्व कहीं न कहीं ‘‘शिव तांडव’’ मचाते हुये दूसरे व्यक्तियों से भिन्न होकर उक्त सफलता को सिद्ध करता है। ‘‘मत चूके चौहान’’ भारतीय इतिहास की एक प्रसिद्ध गीत की कृति को शिवराज सिंह चौहान ने चरितार्थ किया है। शिवराज के इस राज के आखिर लगातार चलने का राज क्या है? आइये, जन्म दिवस के अवसर पर इसकी जड़ तक पहुंचने का प्रयास करते हैं।

    नि:संदेह शिवराज ग्राम जैत के एक प्रगतिशील किसान स्व. श्री प्रेम सिंह के सुपुत्र होते हुए मात्र 12 वर्ष की उम्र में ‘‘स्वयं-सेवक’’ होकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़कर, एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के एक साधारण कार्यकर्ता से छात्र राजनीति प्रारंभ की। पांव-पांव चलकर ‘‘पांव-पांव वाले भैया’’ का तमगा प्राप्त कर विभिन्न उच्च पदों पर आसीन रहकर प्रदेश के सबसे उच्चतम पद मुख्यमंत्री पर विराजमान हैं। निस्संदेह ‘‘लाल गुदड़ी में नहीं छुपते‘‘। मृदुभाषी, गंभीर, गोल्ड मैडल के साथ दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि की उच्च शिक्षा, संगीत-कला व फिल्म प्रेमी, वर्तमान राजनीति की गहराई की तह तक परख व पकड़ रखने वाले, भविष्य को पढ़ने व सूंघने की क्षमता मौसम वैज्ञानिक समान रखने वाले, बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, लच्छेदार शैली, स्वतंत्र भारत के दूसरे स्वाधीनता आंदोलन कहे जाने वाले आपातकाल के स्वतंत्रता संगाम सेनानी मीसाबंदी, शिवराज सिंह चौहान हैं। आम जनता के बीच उनका व्यक्तित्व पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मूल मंत्र ‘‘अंत्योदय’’ के अनुरूप पालनार्थ जमीनी स्तर पर नीचे तक अंतिम छोर में खड़े व्यक्ति तक उतर चुका है। वे कुछ उन बिरले राजनितिज्ञों में से एक हैं जिनकी ‘‘आंखों में अपनी प्रशंसा सुनकर सरसों नहीं फूलने लगती‘‘, बल्कि उन्होंने तो ‘‘निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय’’ को अपने सार्वजनिक जीवन का अपरिहार्य अंग बना लिया हैं।

    वर्ष 2014 के प्रारंभिक दौर के मोदी के विरोधी माने जाने वाले (अथवा ठहराये जाने वाले?) शिवराज सिंह, आज मोदी की ‘‘अंगूठी का नगीना‘‘ हैं और मोदी भी उनके ‘‘मुरीद‘‘ हो चुके हैं। यह बात इस तथ्य से समझी जा सकती है कि प्रधानमंत्री ने उनके ससुर का स्वर्गवास होने पर व्यक्तिगत रूप से शोक संदेश भेजा था। शिवराज सिंह ही वे व्यक्ति हैं, जिन्होंने मोदी के व्यक्तित्व के बाबत एक सटीक टिप्पणी की थी, ‘‘नरेन्द्र मोदी मैंन ऑफ आईडियाज’’ है।

    शिवराज सिंह को यह पड़ाव ऐसे ही नहीं मिला। कड़ी धूप, कड़क, ठंड और तेज गरजती बरसात मे कड़ी लगन, ‘‘कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना‘‘, ऐसी तमाम परिस्थितियों में मेहनत व जज्बा लगातार दिखाते हुये पहुंचे हैं। एक खासियत उनके व्यक्तित्व की यह रही है कि वे ‘‘दीन हीन’’ ‘‘भाव भंगिमाएं’’ रखते हुये ‘बदले’ की भावना नहीं रखते, तथापि वे बदले में (कुछ प्रतिफल) देने में (फल देने में नहीं) संकोच भी करते हैं। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत आज की राजनीति में ठीक उसी प्रकार है, जहां आप वर्तमान मीडिया चैनलों में आज तक मीडिया की उस हेडलाइन को देख लीजिये, जहां वह यह दावा करता है ‘‘सबसे तेज, सबसे पहले, 20 साल बेमिसाल’’। शिवराज सिंह ने इसी शीर्षक को रूबरू अपने राजनैतिक कार्यों व मुख्यमंत्री के रूप में शासकीय दायित्वों का पालन निष्पादित कर परिणित (फलीभूत) किया है। उन्होंने इस देश की राजनीति में ऐसे अनेक आयाम व रेकॉर्ड्स बनाये हैं, यदि गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में राजनैतिक क्षेत्र को शामिल किया जाता तो, शिवराज सिंह के नाम भी कई रिकॉर्ड दर्ज हो जाते। शिवराज सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों में सबसे पहले, सबसे तेज, सबसे ज्यादा सफलताएँ जो अर्जित की है, उनकी कुछ बानगी (उदाहरण) आगे उल्लेखित है।

    गौग्रास टैक्स (गौमाता के लिए) गौ अभ्यारण (एशिया का सबसे बड़ा) तीर्थ दर्शन योजना (वरिष्ठ नागरिकों के लिए), मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, मुख्यमंत्री अन्न पूर्णा योजना, मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना, मातृत्व वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना, बेटी बचाओं अभियान, मेधावी छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना, मुख्यमंत्री युवा इंजीनियर्स कान्ट्रेक्टर योजना, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, असंगठित कामगार मजदूर योजना, संभल योजना (निर्धन एसी एवं एसटी वर्ग के लिये) मुख्यमंत्री न्याय दान योजना, मुख्यमंत्री बकाया बिल माफी योजना, नि:शुल्क चिकित्सा सहायता योजना, पंडित दीनदयाल अन्त्योदय रसोई योजना, अन्यपूर्णा योजना, भावांतर भुगतान योजना, लोकसेवा अधिकार गांरटी अधिनियम, 2010, नये उद्यमी के लिये उद्योग का पंजीयन समस्त विभागों को केन्द्रीकृत करते हुये एक दिन में आदि सहित लगभग 39 विभागों की 200 से अधिक अनेकानेक योजनाएं उन्होंने जन हित में लागू की हैं। मतलब शिशु के पैदा होने से लेकर मृत्यु तक की चारों अवस्थाओं की समस्त व्यवस्थाओं व जरूरतों की पूर्ति के लिये आम नागरिक के लिये ऐसी अनेक योजनाएं शिवराज सिंह चौहान ने लागू की हैं।

    शिवराज सिंह के व्यक्तित्व की एक बड़ी विशेषता यह है कि वे ‘‘लकीर के फकीर‘‘ नहीं हैं। वे किसी भी व्यक्ति की नकल कर अनुसरण नहीं करते हैं, बल्कि हटकर अपनी अलग विशिष्ट पहचान बनाकर लोगों को उन्हें अनुसरण करने पर मजबूर कर देते हैं। लेकिन इस के बावजूद भी उन्हें ‘‘अपनी खिचड़ी अलग पकाने वाला‘‘ राजनेता नहीं कहा जा सकता है। यही उनकी राजनीतिज्ञ सफलता का प्रमुख कारण भी है। देश के वे शायद पहले एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के एक महीने बाद मात्र पांच सहयोगी मंत्री बनाएं व उन्हें विभागों का प्रभार देने के पहले भौगोलिक स्थिति के अनुसार संभागीय प्रभार दिये गये। पहली बार चौदह गैर-विधायकों को मंत्री बनाकर नया इतिहास रच दिया।

    केन्द्र की प्रधानमंत्री स्व निधि योजना (शहरी पथ विक्रेताओं के लिए) भी शिवराज सिंह के नेतृत्व में मध्य प्रदेश देश में सर्वप्रथम रहकर बाजी मार ली है। स्काँच ग्रुप ने गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश को सुशासन के लिये सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से नवाजा है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई के साधन में कई गुना वृद्धि होने के परिणाम स्वरूप ही प्रदेश को पिछले पाँच वर्षों से लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। राज्य में न केवल मांग-आपूर्ति के अनुरूप बिजली का उत्पादन हो रहा है, बल्कि अब वह दूसरे प्रदेश को अतिरिक्त बिजली बेच भी रहा है। देश की प्रथम गौ केबिनेट बनी। समरस गांव सम्मान योजना (अपराध कम करने के लिये तीन साल में एक भी रिपोर्ट थाने में न पहुंचने पर), समस्त गांवों का जन्म दिवस योजना साल में एक दिन तय कर गांव का जन्म दिवस मनाकर विकास की योजना बनाना देश में एक बिल्कुल नया प्रयोग है। अब वे पांव-पांव के साथ गांव-गांव वाले भैया भी कहलाने लगे हैं।

    स्वच्छता के मामले में इंदौर पिछले लगातार पांच सालों से देश में सर्वप्रथम रहकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। इंदौर देश का प्रथम ‘‘वाटर प्लस’’ सिटी (2021 में) बना। कोविड-19 संक्रमण काल में ओमिक्रॉन के बढ़ते फैलाव को देखते हुये देश में सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एक दिन में सबसे ज्यादा कोविड वैक्सीन 16.91 लाख (1691967) लगाने का रिकॉर्ड भी मध्यप्रदेश ने ही बनाया, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हुआ। ऑक्सीजन की कमी होने के कारण ऑक्सीजन के उपयोग के ऑडिट की नई धारणा देकर स्थिति पर नियत्रंण किया। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा 2022 स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना व सुकन्या योजना में मध्यप्रदेश प्रथम है। युवाओं (15 से18 वर्ष) को वैक्सीन लगाने के मामले में भी प्रथम दिवस देश में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर रहा (लगभग 7.5 लाख)। ‘‘मेरी सुरक्षा मेरा मास्क’’ जन-जागरूकता अभियान भी चलाया। मध्यप्रदेश को विकास के माध्यम से देश का नम्बर वन राज्य बनाने का उनका संकल्प व रोडमैप है। मध्यप्रदेश की विकास यात्रा के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन महत्वपूर्ण है कि मध्यप्रदेश गजब तो है ही, देश का गौरव भी है। कालान्तर में ‘‘मध्यप्रदेश’’ भारत की विकास गाथा के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति बन जाएगा’’।

    शिवराज सरकार की उपरोक्त उपलब्धियों का यह मतलब कदापि नहीं है कि, प्रदेश ने विकास में सम्पूर्णता प्राप्त कर ली है। न केवल अभी भी काफी कुछ किया जाना शेष है, बल्कि इस बात की समीक्षा की भी अत्यन्त आवश्यकता है कि उपरोक्त उल्लेखित 200 से अधिक योजनाओं के लिये कितना बजट प्रावधान किया गया है, जो जरूरत का कितना प्रतिशत है? साथ ही इन सरकारी योजनाओं का फायदा प्रदेश की कितनी प्रतिशत जनसंख्या (हितग्राहियों) तक पहुंचा है? तभी सार्थक विकास की बात हो सकेगी। अन्यथा उच्चतम विकास के बावजूद बलात्कार के मामलों में उच्चतम न्यायालय तक को मध्यप्रदेश के बाबत् टिप्पणी करनी पड़ी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार महिलाओं के विरूद्ध जघन्य अपराधों के मामले में मध्यप्रदेश देश में अव्वल राज्य है। 2016 की रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक 2 घंटों में एक महिला का बलात्कार हो रहा है। आदिवासियों के विरूद्ध उत्पीड़न, अत्याचार की अधिकतम दर (2020 में) मध्यप्रदेश की ही है, बल्कि बीते तीन सालों से प्रदेश पहले पायदान पर है। अपराध की दर 298 प्रति लाख जो राष्ट्रीय औसत 241.2 से अधिक है। बाल अपराध में भी मध्यप्रदेश नम्बर वन है। शिशु मृत्यु दर लगातार 16 वर्षो से उच्चतम है। महिला साक्षरता में भी मध्यप्रदेश निचले पायदान (28वें) पर है। इन सभी क्षेत्रों में शिवराज सिंह को अधिक कार्य कर उक्त कमियों को दूर करने की चुनौती है, जिसे वे हमेशा अपने स्वभाव के अनुरूप स्वीकार करते आये हैं। नौकरशाही पर निर्भर रहना या यह कहें कि उन पर नियंत्रण न कर पाना, अभी तक उनकी एक बड़ी कमजोरी रही है। यद्यपि इस नई पारी में इस कमजोरी को दूर करने का निश्चित सफल प्रयास किया है। तथापि आज सिर्फ शिवराज सिंह के विकास कार्यो की चर्चा। शेष बातें फिर कभी।

    वैसे जंयती के अवसर पर कमियों को उजागर करना शायद वर्तमान युग के सभ्य समाज में उचित नहीं माना जाता है। परन्तु शेष लम्बी जिंदगी में शिवराज जी यदि अपने गुणों को और निखारते हैं, तो इससे प्रदेश की जनता के साथ स्वयं उनका भी फायदा ही फायदा होगा। इसलिये मैंने उक्त कुछ कमियों की ओर इंगित करने की धृष्टता अवश्य की है। तथापि क्षमा चाहते हुये, इस अवसर पर ईश्वर उन्हें दीर्घायु दे, उनके स्वस्थ जीवन होने की कामना करता हूं। यह उम्मीद भी करता हूं कि इस देश का दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से जाने वाली परम्परा को तोड़कर वह रास्ता मध्यप्रदेश सेें शिवराज सिंह के नेतृत्व से होकर जायेगा, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ..!

    (लेखक वरिष्ठ कर सलाहकार एवं बैतूल के पूर्व सुधार न्यास अध्यक्ष हैं)

    Email: rajeevak2@gmail.com

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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