देश/विदेश

lic policy loan: एलआईसी पॉलिसी सरेंडर करना बेहतर है या लोन लेना, जानिए क्या है सही फैसला

LIC Policy Loan: Is it better to surrender your LIC policy or take a loan? Find out the right decision.

lic policy loan: एलआईसी पॉलिसी सरेंडर करना बेहतर है या लोन लेना, जानिए क्या है सही फैसला
lic policy loan: एलआईसी पॉलिसी सरेंडर करना बेहतर है या लोन लेना, जानिए क्या है सही फैसला

lic policy loan: जब कभी अचानक धन की आवश्यकता आन पड़ती है, तो भारतीय जीवन बीमा निगम के ग्राहकों के समक्ष आमतौर पर दो रास्ते बचते हैं। पहला मार्ग बीमा पत्र पर ऋण हासिल करने का होता है और दूसरा मार्ग बीमा को समर्पित कर यानी सरेंडर करके पूरी राशि निकलवाने का होता है। इन दोनों ही रास्तों का प्रभाव वित्तीय स्थिति पर अलग-अलग ढंग से पड़ता है। इसलिए केवल फौरन मिलने वाले धन को देखकर निर्णय करना समझदारी नहीं मानी जाती है। बीमा की कुल अवधि, प्रीमियम की अदायगी, समर्पित मूल्य यानी सरेंडर वैल्यू, ऋण पर लगने वाला ब्याज और भविष्य में मिलने वाले फायदों का आकलन करना बहुत आवश्यक हो जाता है।

किस प्रकार कार्य करता है अनुबंध पर ऋण

यदि आपका बीमा पत्र ऋण की सुविधा के दायरे में आता है और उसमें पर्याप्त सरेंडर वैल्यू जमा हो चुकी है, तब इसके एवज में कर्ज उठाया जा सकता है। इस स्थिति में बीमा आमतौर पर चालू अवस्था में रहता है और इसके प्रावधानों के अनुसार भविष्य के लाभ मिलते रहते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि आपके बीमा का समर्पित मूल्य पांच लाख रुपए है। बीमा के नियमों के तहत यदि आपको इसका एक निश्चित हिस्सा कर्ज के रूप में मिलता है, तो आपको उसी सीमा के भीतर रहना होगा। इस कर्ज पर ब्याज का भुगतान भी करना पड़ता है। यदि समय पर ब्याज नहीं चुकाया गया, तो बकाया धनराशि में इजाफा हो सकता है।

इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह होता है कि बीमा पत्र को बीच में ही समाप्त करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि, कर्ज लेने से पहले ब्याज की दरों और भुगतान की तमाम शर्तों को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बीमा पत्र समर्पित करने पर क्या प्रक्रिया होती है?

समर्पण करने का सीधा अर्थ यह होता है कि आप अपने बीमा अनुबंध को उसकी निर्धारित समय-सीमा पूरी होने से पहले ही बंद करवा रहे हैं। इसके एवज में बीमा कंपनी पात्रता के नियमों के आधार पर आपको सरेंडर वैल्यू प्रदान करती है। बीमा को समर्पित करने के बाद भविष्य का बीमा सुरक्षा कवच और उससे जुड़े सभी लाभ हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।

यहां एक अहम बिंदु को समझना बहुत जरूरी है। आपने अब तक कुल जितना भी प्रीमियम भरा है, यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि बीमा समर्पित करने पर आपको उतनी ही पूरी राशि वापस मिल जाए। खासकर शुरुआती सालों में बीमा बंद करने पर मिलने वाली रकम बहुत कम हो सकती है। इसलिए सरेंडर वैल्यू की सही गणना और बीमा के नियमों की पूरी जानकारी पहले ही प्राप्त कर लेनी चाहिए।

दोनों विकल्पों के बीच का मुख्य अंतर

ऋण लेने की स्थिति में बीमा पत्र चालू बना रहता है, परंतु लिए गए कर्ज पर ब्याज चुकाना अनिवार्य होता है। यदि समय पर पैसे नहीं लौटाए गए तो बकाया राशि बढ़ सकती है और बीमा के लाभों पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ, बीमा समर्पित करने पर अनुबंध हमेशा के लिए बंद हो जाता है और केवल निर्धारित सरेंडर वैल्यू ही हाथ लगती है। इसके पश्चात भविष्य का रिस्क कवर और अन्य अधिकार खत्म हो जाते हैं।

यदि आपकी वित्तीय आवश्यकता थोड़े समय के लिए है और ऋण की लागत को आसानी से वहन किया जा सकता है, तो बीमा को जारी रखने का विकल्प चुनना बेहतर रहता है। इसके विपरीत, यदि बीमा को आगे चलाना जरूरी नहीं लगता और भविष्य के प्रीमियम या अन्य शर्तें आपके अनुकूल नहीं हैं, तो समर्पित मूल्य की जांच की जा सकती है।

सही निर्णय लेने के लिए किन बातों का रखें ध्यान

भारतीय जीवन बीमा निगम की पॉलिसी पर कर्ज लेना या उसे सरेंडर करना, दोनों के ही अपने अलग वित्तीय परिणाम होते हैं। कोई भी निर्णय केवल इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि आज की तारीख में आपके हाथ में कितने रुपए आ रहे हैं। ऋण की ब्याज लागत, सरेंडर वैल्यू, बचा हुआ प्रीमियम, बीमा के आने वाले समय के लाभ और सुरक्षा कवच को एक साथ परखना चाहिए। कोई भी अंतिम कदम उठाने से पहले अपने बीमा के दस्तावेजों में दी गई शर्तों और वर्तमान वैल्यू की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

(अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। किसी भी तरह का वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने विषय विशेषज्ञ या सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)

सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-

देश–दुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending खबरों के लिए जुड़े रहे betulupdate.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

Related Articles

Back to top button