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Betul Maternal Deaths: छह दिन में दो मातृ-शिशु मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल

Betul Maternal Deaths: Two maternal and infant deaths in six days spark alarm; questions raised about Health Department's arrangements.

Betul Maternal Deaths: छह दिन में दो मातृ-शिशु मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल
Betul Maternal Deaths: छह दिन में दो मातृ-शिशु मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल

Betul Maternal Deaths: बैतूल जिले में सुरक्षित प्रसव और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। महज छह दिन के भीतर दो अलग-अलग मामलों में दो प्रसूताओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं की मौत हो गई। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के नारायणपुर की काजल मंडल ने हीरापुर पीएचसी में मृत बच्ची को जन्म दिया और अत्यधिक रक्तस्त्राव के बाद जिला अस्पताल ले जाते समय उसकी भी मौत हो गई। इससे पहले 22 सितंबर को शाहपुर ब्लॉक के बरजोरपुर की भागरती बाई की तीसरे प्रसव के दौरान मौत हुई थी और उसके गर्भस्थ शिशु की भी जान चली गई थी। दोनों घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, रेफरल व्यवस्था और सुरक्षित मातृत्व शिविरों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

हीरापुर पीएचसी में प्रसव के बाद बिगड़ी काजल की हालत

घोड़ाडोंगरी विकासखंड के चोपना थाना क्षेत्र के ग्राम नारायणपुर निवासी काजल मंडल पति गोपाल मंडल, उम्र 31 वर्ष, को परिजन सोमवार सुबह प्रसव के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हीरापुर लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने के समय काजल की हालत सामान्य थी। दोपहर करीब दो बजे अस्पताल में ही काजल का प्रसव हुआ। इस दौरान उसने मृत बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के बाद काजल को अचानक अत्यधिक रक्तस्त्राव होने लगा। उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और घबराहट भी होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर हीरापुर अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल ले जाने के लिए रेफर कर दिया।

रेफर के बाद भी समय पर नहीं पहुंची 108 एम्बुलेंस

काजल की हालत गंभीर होने पर अस्पताल की ओर से 108 एम्बुलेंस के लिए फोन किया गया था। परिजनों का कहना है कि काफी इंतजार के बाद भी एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची। हालत बिगड़ती देख परिवार के लोगों ने इंतजार करने के बजाय निजी वाहन से काजल को जिला अस्पताल ले जाने का फैसला किया। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में उसकी हालत और खराब हो गई। काजल बेसुध हो गई। इसके बाद परिजन उसे रास्ते में आने वाले पाढर अस्पताल लेकर पहुंचे।

Betul Maternal Deaths: छह दिन में दो मातृ-शिशु मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल
Betul Maternal Deaths: छह दिन में दो मातृ-शिशु मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल

पाढर पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी मौत

परिजनों के पाढर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने काजल की जांच की। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार काजल की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद वे उसका शव लेकर वापस हीरापुर लौट आए और अधिकारियों के सामने मामले की शिकायत की। शिकायत के बाद काजल के शव का पोस्टमार्टम घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कराया गया। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही उसकी मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर उठाए सवाल

काजल के जेठ विप्लव मंडल ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 11 बजे काजल को प्रसव के लिए हीरापुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उसकी स्थिति ठीक थी। डॉक्टरों ने दोपहर तक प्रसव हो जाने की बात कही थी। विप्लव मंडल के मुताबिक करीब दो बजे काजल ने मृत बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उसे रक्तस्त्राव शुरू हो गया और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किए जाने के बाद 108 एम्बुलेंस को बुलाया गया, लेकिन वह समय पर नहीं पहुंची। इसके बाद परिवार निजी वाहन से काजल को लेकर रवाना हुआ। रास्ते में उसकी मौत हो गई। पाढर अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को वापस हीरापुर लाया गया।

छह दिन पहले भागरती बाई की भी हुई थी मौत

काजल मंडल और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत से छह दिन पहले 22 सितंबर को भी जिले में प्रसव के दौरान एक प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हुई थी। यह मामला शाहपुर ब्लॉक के बीजादेही थाना क्षेत्र के बरजोरपुर गांव का है। बरजोरपुर निवासी भागरती पति संदीप उईके को 21 सितंबर को परिजन प्रसव के लिए बीजादेही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर पहुंचे थे। वहां से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शाहपुर रेफर किया गया।

शाहपुर में करीब एक घंटे उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए रात में ही जिला अस्पताल भेज दिया गया। अगली सुबह भागरती बाई को जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान उसके गर्भ में पल रहे शिशु की भी मौत हो चुकी थी।

तीसरे प्रसव में भी नहीं बच सकी मां और बच्चा

भागरती बाई का यह तीसरा प्रसव था। उसके पहले प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत हुई थी, जबकि दूसरे प्रसव में जुड़वा नवजातों की जान चली गई थी। तीसरे प्रसव के दौरान भी वह अपने गर्भस्थ शिशु को जन्म नहीं दे सकी। मां और गर्भस्थ बच्चे की मौत के साथ ही भागरती की संतान पाने की उम्मीद भी अधूरी रह गई।

पीएम नहीं होने से मौत की वजह पर सवाल

इन दोनों मामलों में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। 22 सितंबर को बरजोरपुर की भागरती बाई को जिला अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया। इसके बाद बिना पोस्टमार्टम के शव परिजनों को सौंप दिया गया था। इसी तरह नारायणपुर की काजल मंडल को पाढर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया था। परिजनों के अनुसार उस समय पुलिस को सूचना नहीं दी गई, जिसके कारण वहां पोस्टमार्टम नहीं हो सका। बाद में परिजन शिकायत लेकर हीरापुर पहुंचे।

इसके बाद घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में काजल के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम नहीं होने की स्थिति में मौत के कारणों की जांच प्रभावित हो सकती है। ऐसे में अस्पतालों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं, ताकि प्रसूता की मौत होने पर नियमानुसार पोस्टमार्टम हो और मृत्यु के वास्तविक कारण सामने आ सकें।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व शिविरों पर भी उठे सवाल

स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं की जांच और सुरक्षित प्रसव के लिए जिले में हर महीने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित करता है। यह शिविर प्रत्येक माह 9 और 25 तारीख को लगाए जाते हैं। इनका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं की पहचान करना और हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उनके उपचार तथा सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था करना है।

केंद्र और राज्य सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ी राशि खर्च कर रही हैं। इसके बावजूद छह दिन के अंतराल में दो प्रसूताओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं की मौत के मामले सामने आने से इन व्यवस्थाओं की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

खास तौर पर बरजोरपुर की भागरती बाई के पहले दो प्रसव में नवजातों की मौत और तीसरे प्रसव के दौरान उसकी तथा गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला गर्भवती महिलाओं की हाईरिस्क स्थिति की पहचान और समय पर उपचार की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं काजल मंडल की मौत के मामले में रेफरल के बाद 108 एम्बुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने के परिजनों के आरोप भी स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन परिवहन व्यवस्था की जांच की जरूरत बताते हैं।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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