MP Heavy Rain: मध्य प्रदेश में मानसून की तूफानी वापसी, 3 से 5 सितंबर तक पश्चिमी जिलों में भारी बारिश के आसार
MP Heavy Rain: Stormy return of the monsoon in Madhya Pradesh; heavy rain expected in western districts from September 3 to 5.

MP Heavy Rain: मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी हवाओं की मजबूती के कारण मौसम ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के पूर्वी संभागों में बादलों की जोरदार आवाजाही के साथ कई इलाकों में मूसलाधार पानी बरस रहा है। इस तेज वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ गया है, जिससे तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर परिस्थितियां बन आई हैं। सतना और आसपास के क्षेत्रों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं।
प्रदेश के पूर्वी भूभाग में बने शक्तिशाली मानसूनी चक्र के कारण जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में वर्षा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही बारिश से कई जगहों पर नदियां अपने पूरे उफान पर हैं। सतना जिले में बाढ़ की वजह से स्थिति काफी बिगड़ गई है। चित्रकूट क्षेत्र में बहने वाली प्रसिद्ध मंदाकिनी नदी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है, जिसके चलते आसपास के तमाम हिस्से पानी में डूब गए हैं।
प्रसिद्ध रामघाट पर स्थित लगभग 400 दुकानें और करीब 20 से 25 होटल पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। इस बिगड़ते माहौल को देखते हुए प्रशासन ने सतना जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों और कॉलेजों में 2 और 3 सितंबर को अवकाश घोषित कर दिया है। इसी बीच मौसम वैज्ञानिकों ने सतना और रीवा जिलों में अगले दो दिनों तक अति भारी वर्षा होने की चेतावनी भी जारी कर दी है।
विभिन्न जिलों में रिकॉर्ड दर्ज की गई बारिश
राजधानी भोपाल स्थित मौसम केंद्र द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते मंगलवार को राज्य के सीधी, पन्ना, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला और सिवनी जिलों में जमकर पानी बरसा। इनमें से कुछ स्थानों पर 4 इंच तक वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
मध्य प्रदेश के 22 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट
मौसम विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, 2 सितंबर यानी आज राज्य के पूर्वी क्षेत्रों में तेज बारिश की अधिक संभावना है। विभाग ने विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सतना, रीवा, छतरपुर, मऊगंज, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और बालाघाट जिलों के लिए भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है।
अन्य जिलों में हल्की से तेज बौछारों का अनुमान
इसके साथ ही भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के कई हिस्सों में हल्की से लेकर तेज बारिश दर्ज होने के संकेत हैं। इन क्षेत्रों में भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, पांदुर्णा, मैहर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले शामिल हैं।
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प्रदेश में मानसूनी सिस्टम की वर्तमान स्थिति
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया पूरी तरह से सक्रिय बना हुआ है। इसके साथ ही राज्य के दक्षिणी हिस्से से होकर एक मानसूनी ट्रफ रेखा गुजर रही है, जबकि ऊपरी वायुमंडल में भी मानसून की ट्रफ लाइन एक्टिव है। इन संयुक्त मौसमी कारकों के कारण पूरे राज्य में बारिश की गतिविधियां जारी हैं। आने वाले तीन दिनों तक यह मौसमी बदलाव पूर्वी भागों से बढ़ते हुए पश्चिमी भागों में वर्षा का दौर बनाए रखेगा।
पश्चिमी हिस्से में मानसूनी सक्रियता का अगला चरण
मौसम केंद्र की रिपोर्ट बताती है कि 2 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में तेज बारिश का दौर प्रमुखता से रहेगा। इसके बाद 3 सितंबर से यह मौसमी हवाएं पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर आगे बढ़ना शुरू होंगी। इस बदलाव से भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग के जिलों में तेज बारिश देखने को मिलेगी। वहीं 4 सितंबर तक यह सिस्टम पश्चिमी संभागों में पूरी तरह अपनी पकड़ बना लेगा, जिससे भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल और सागर संभागों में तेज बारिश का असर रहेगा। अनुमान है कि 5 सितंबर तक यह मौसमी सिस्टम इन्हीं क्षेत्रों में पूरी तरह प्रभावी रहेगा।
राज्य में वर्षा का कुल औसत और कमी का आंकड़ा
आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में इस सीजन में अब तक कुल 707.1 मिलीमीटर यानी 27.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह आंकड़ा सामान्य वर्षा के तय मानक 31.2 इंच यानी 791.7 मिलीमीटर की तुलना में 3.1 इंच कम है। इसका तात्पर्य यह है कि पूरे मध्य प्रदेश में औसत बारिश के मुकाबले अब तक 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी जिलों में लगातार अच्छी बारिश होने के बावजूद औसत से 5 फीसदी कम पानी बरसा है, जबकि पश्चिमी जिलों में पर्याप्त बारिश न होने से वहां सामान्य से 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
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