Madhya Pradesh Road Network: एक्सप्रेस-वे और बायपास से बदलेगी तस्वीर, भोपाल-उज्जैन-इंदौर को जोड़कर विकास को मिलेगी नई उड़ान
Madhya Pradesh Road Network: Expressways and bypasses set to transform the landscape; connecting Bhopal, Ujjain, and Indore will give a new boost to development.

Madhya Pradesh Road Network: भोपाल। मध्यप्रदेश में शहरी और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के लिए बड़े स्तर पर सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश अब मेट्रोपोलिटन विकास, बेहतर सड़क व्यवस्था और तेज आवागमन के नए चरण में आगे बढ़ रहा है। भोपाल तथा उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों को अधिसूचित किए जाने के बाद सरकार इन क्षेत्रों को आसपास के शहरों, कस्बों, औद्योगिक इलाकों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और व्यापारिक क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार आने वाले समय में सड़क संपर्क केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए मौजूदा सड़कों को चौड़ा करने के साथ नए एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड, बायपास, ग्रीनफील्ड सड़कें और हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों की यात्रा आसान होने के साथ व्यापार, उद्योग, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों से मजबूत होगा विकास का नेटवर्क
भोपाल, इंदौर और उज्जैन को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की योजना को प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उज्जैन धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है, जबकि इंदौर उद्योग एवं कारोबार के लिए प्रमुख शहर है। वहीं भोपाल प्रशासन, शिक्षा और संस्थागत गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। इन तीनों क्षेत्रों के बीच तेज संपर्क बनने से निवेश और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की संभावना है।
सरकार का लक्ष्य है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की सुविधाएं उनके आसपास ही मिल सकें। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों तक पहुंच को आसान बनाने के लिए क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
भोपाल-विदिशा फोरलेन परियोजना पर आगे बढ़ी तैयारी
भोपाल से विदिशा के बीच मौजूदा दो लेन सड़क को चार लेन में बदलने की योजना तैयार की गई है। करीब 44.83 किलोमीटर लंबे मार्ग के उन्नयन पर 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के माध्यम से पूरा करने की तैयारी है।
यह सड़क भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर से गुजरते हुए एनएच-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन तक पहुंचेगी। यह मार्ग भोपाल के साथ रायसेन और विदिशा जिले को जोड़ता है, इसलिए क्षेत्रीय आवागमन के लिहाज से इसका महत्व काफी अधिक है।
इस मार्ग पर वर्तमान में वाहनों का दबाव करीब 10,975 पैसेंजर कार यूनिट प्रतिदिन के स्तर पर बताया गया है। चार लेन सड़क के लिए निर्धारित मानक से अधिक यातायात होने के कारण सड़क का विस्तार जरूरी माना गया है। भविष्य में मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के बढ़ने के साथ वाहनों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
तीन स्थानों पर बनेंगे बायपास
भोपाल-विदिशा सड़क परियोजना में तीन अलग-अलग बायपास बनाए जाने की योजना है। सूखी सेवनिया में 1.80 किलोमीटर, बेरखेड़ी में 1.35 किलोमीटर और सलामतपुर में 5.10 किलोमीटर लंबा बायपास प्रस्तावित है। तीनों की कुल लंबाई 8.25 किलोमीटर होगी।
बायपास बनने से कस्बों और आबादी वाले हिस्सों में भारी वाहनों की आवाजाही कम होगी। इससे स्थानीय लोगों को यातायात जाम से राहत मिलने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी कम हो सकता है। यह मार्ग भोपाल-कानपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में भी उपयोगी साबित होगा।
पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है भोपाल-विदिशा मार्ग
भोपाल-विदिशा सड़क केवल दैनिक यातायात के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके आसपास कई ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल भी हैं। सांची का विश्व प्रसिद्ध स्तूप, संग्रहालय, अशोक स्तंभ और उदयगिरि की गुफाएं इस क्षेत्र को विशेष पर्यटन महत्व प्रदान करते हैं।
इस मार्ग का एक हिस्सा कर्क रेखा के आसपास से भी गुजरता है, जिससे इसका भौगोलिक महत्व बढ़ जाता है। सड़क बेहतर होने पर भोपाल से सांची और विदिशा पहुंचने में यात्रियों को सुविधा मिलेगी। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, गाइड और हस्तशिल्प कारोबार को भी लाभ मिल सकता है।

एनएचएआई की नई सड़क परियोजनाओं से भी मिलेगा फायदा
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा रायसेन, सांची और विदिशा के आसपास बायपास सहित नया चार लेन मार्ग विकसित किया जा रहा है। भोपाल-विदिशा परियोजना के इस नेटवर्क से जुड़ने के बाद भोपाल के साथ सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना सहित प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों तक सड़क संपर्क और मजबूत हो सकता है।
उज्जैन-इंदौर क्षेत्र में कई बड़ी सड़क परियोजनाएं
उज्जैन और इंदौर के बीच बढ़ती आवाजाही को देखते हुए इस पूरे क्षेत्र में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने का काम जारी है। इंदौर-उज्जैन छह लेन मार्ग, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड चार लेन सड़क, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड मार्ग और उज्जैन-मक्सी चार लेन चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा उज्जैन सिंहस्थ बायपास और हरिफाटक ब्रिज के विस्तार की योजनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। इंदौर-उज्जैन छह लेन सड़क परियोजना में लगभग 80 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई है।
इंदौर आउटर रिंग रोड को भी विकसित किया जा रहा है। उज्जैन-नागदा चार लेन मार्ग का काम पूरा हो चुका है। उज्जैन-झालावाड़ चार लेन सड़क की मंजूरी केंद्र सरकार के स्तर पर प्रक्रिया में है। उज्जैन-जावरा मार्ग के जरिए शहर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
रिंग रोड से शहरों के अंदर घटेगा ट्रैफिक
इंदौर की ईस्टर्न और वेस्टर्न रिंग रोड तथा उज्जैन के आसपास प्रस्तावित बायपास सड़कों का उद्देश्य शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करना है। लंबी दूरी के ट्रक और दूसरे भारी वाहन शहर के मुख्य हिस्सों में प्रवेश किए बिना आगे निकल सकेंगे। इससे जाम कम होने, यात्रा का समय घटने और ईंधन की बचत होने की संभावना है।
भोपाल के लिए भी तैयार हो रही बड़ी सड़क योजना
भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए राजधानी के आसपास सड़क नेटवर्क को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। भोपाल वेस्टर्न बायपास, भोपाल ईस्टर्न बायपास, भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और भोपाल-विदिशा चार लेन मार्ग इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं।
भोपाल वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि ईस्टर्न बायपास की स्वीकृति प्रक्रिया चल रही है। दोनों मार्ग बनने के बाद बाहर से आने वाले तथा शहर को पार करने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ते मिलेंगे। इससे मुख्य शहर की सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने में मदद मिलेगी।
भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस-वे से तेज होगा संपर्क
भोपाल और इंदौर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे दोनों बड़े मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के बीच तेज और सुगम संपर्क तैयार करेगा। इस मार्ग से उद्योगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, पर्यटकों और आम यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
बेहतर सड़क संपर्क से दोनों शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। साथ ही नए औद्योगिक क्षेत्र, व्यापारिक केंद्र और सेवा क्षेत्र विकसित होने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
ढाई साल में करीब 29,693 किलोमीटर सड़क का काम
प्रदेश में केवल महानगरों के आसपास ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी सड़क निर्माण और उन्नयन किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार पिछले ढाई साल के दौरान करीब 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण या सुधार कार्य पूरा किया गया है। इससे गांवों और छोटे कस्बों का बड़े बाजारों तथा शहरों से संपर्क बेहतर हुआ है।
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल से भी कई बड़ी सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम करीब 18,166 करोड़ रुपये की लागत वाली सात परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनकी कुल लंबाई लगभग 444 किलोमीटर है।
इन परियोजनाओं में इंदौर-उज्जैन छह लेन, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड चार लेन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड मार्ग और नर्मदापुरम-टिमरनी सड़क प्रमुख हैं।
626 किलोमीटर की नौ परियोजनाएं प्रक्रिया में
प्रदेश में 26,890 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 626 किलोमीटर लंबी नौ अन्य सड़क परियोजनाएं भी अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाई जा रही हैं। इनमें भोपाल-विदिशा, कटनी-दमोह, पूर्वी भोपाल बायपास, सिवनी-बालाघाट, देवास-चापड़ा, मेलघाट चौराहा-मालथौन, तिलवारी-हरदी-जनकपुर और मंदसौर-सीतामऊ मार्ग शामिल हैं।
इसके अलावा आने वाले समय में सड़क विकास के लिए 1,734 किलोमीटर लंबाई वाली 41 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।
तीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की डीपीआर पर काम
मध्यप्रदेश में एक्सप्रेस-वे का बड़ा नेटवर्क विकसित करने की तैयारी है। पहले चरण में सागर-सतना, भोपाल-मंदसौर और जबलपुर-आशापुर एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार की जा रही है। इन तीनों की कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 794 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 38,456 करोड़ रुपये बताई गई है।
इन सड़कों के तैयार होने के बाद कई शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। सागर से सतना की दूरी तय करने में लगने वाला समय करीब 6-7 घंटे से घटकर लगभग 3 से साढ़े 3 घंटे होने का अनुमान है। भोपाल-मंदसौर और जबलपुर-आशापुर मार्ग पर भी यात्रा अवधि कम होने की संभावना है।
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दूसरे चरण में चार नए एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित
एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के अगले चरण में करीब 926 किलोमीटर लंबाई के चार नए ग्रीनफील्ड मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें लगभग 135 किलोमीटर का सागर-जबलपुर एक्सप्रेस-वे, 232 किलोमीटर का कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेस-वे, 239 किलोमीटर का भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे और करीब 320 किलोमीटर का भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस-वे शामिल है।
इन मार्गों के बनने पर अलग-अलग क्षेत्रों के बीच यात्रा में समय की बचत होगी। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों से बाजारों तक सामान पहुंचाने में भी आसानी हो सकती है।
रोड मास्टर प्लान में 29,682 किलोमीटर सड़क का लक्ष्य
प्रदेश ने अगले पांच वर्षों के लिए सड़क विकास की दीर्घकालिक योजना भी तैयार की है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के रोड नेटवर्क मास्टर प्लान में 1,226 मार्गों को विकसित और उन्नत करने का लक्ष्य रखा गया है। इन मार्गों की कुल लंबाई 29,682 किलोमीटर है।
इस पूरी योजना पर करीब 88,634 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना तैयार करते समय जरूरत वाले क्षेत्रों, कमजोर कनेक्टिविटी वाले हिस्सों और आर्थिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है।
पीएम गतिशक्ति से तय होगी सड़क परियोजनाओं की प्राथमिकता
सड़क विकास की योजना में पीएम गतिशक्ति पोर्टल और जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके माध्यम से मौजूदा सड़कों, प्रस्तावित मार्गों, कनेक्टिविटी की कमी और संभावित विकास क्षेत्रों का एक साथ अध्ययन किया जा रहा है।
इस तकनीक की मदद से यह तय करने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में नई सड़क की जरूरत है और कहां मौजूदा मार्ग को चौड़ा या बेहतर करना जरूरी है। इससे भविष्य की परियोजनाओं को केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और वास्तविक जरूरत के अनुसार तैयार करने में मदद मिलेगी।
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सड़कें बनेंगी रोजगार और निवेश की नई आधारशिला
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार प्रदेश में सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ वाहनों की आवाजाही को आसान बनाना नहीं है। बेहतर सड़क संपर्क के साथ कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, उद्योगों को कच्चा माल और तैयार माल ले जाने, पर्यटन को बढ़ाने तथा नए रोजगार पैदा करने के अवसर भी बढ़ेंगे।
मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों में सड़क, परिवहन और अन्य अधोसंरचना के विस्तार से छोटे शहरों को भी बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्रीय विकास का संतुलन बेहतर हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अधोसंरचना विकसित की जा रही है। आने वाले वर्षों में तैयार होने वाला सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क प्रदेश के शहरों, गांवों, उद्योगों, पर्यटन स्थलों और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे मध्यप्रदेश को निवेश, पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में और मजबूत बनाने का रास्ता तैयार होगा।
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