Betul Drinking Water Crisis: चार महीने से सूखे थे नल, पानी के लिए भटक रहे थे ग्रामीण, कलेक्टर की पहल पर अब हर घर पहुंच रहा साफ पानी
Betul Drinking Water Crisis: Taps had been dry for four months, villagers were wandering for water, and thanks to the collector's initiative, clean water is now reaching every home.

Betul Drinking Water Crisis: भीषण गर्मी के बीच बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल संकट ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी थी। महिलाएं सुबह से पानी की तलाश में निकल जाती थीं और कई परिवारों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा था। कहीं हैंडपंप सूख गए थे तो कहीं पाइपलाइन खराब होने से नलजल योजनाएं बंद पड़ी थीं। लेकिन कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के दौरे और निर्देशों के बाद प्रशासन ने तेजी से काम करते हुए चिरापाटला, गवासेन और वनग्राम झिरियाडोह में पेयजल व्यवस्था बहाल कर दी। अब गांवों में फिर से नलों से पानी पहुंचने लगा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
भीषण गर्मी के चलते बैतूल जिले के चिचोली तहसील के कई गांव गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे थे। दूरस्थ ग्राम चिरापाटला, गवासेन और वनग्राम झिरियाडोह में हालात इतने खराब हो गए थे कि ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा के उपयोग के लिए पानी जुटाना बड़ी चुनौती बन गया था। गांवों के हैंडपंप सूख चुके थे, कई जगह पाइपलाइनें खराब पड़ी थीं और बिजली की समस्या के कारण जल आपूर्ति भी बाधित हो रही थी। ऐसे में ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा था।
महिलाओं पर बढ़ा था सबसे ज्यादा बोझ
गांवों में पेयजल संकट का सबसे अधिक असर महिलाओं और बुजुर्गों पर दिखाई दे रहा था। महिलाएं सुबह होते ही बर्तन और डिब्बे लेकर पानी की तलाश में निकल जाती थीं। कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। ग्रामीण निजी वाहनों और टैंकरों की मदद से पानी लाने को मजबूर थे, जिससे आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ रहा था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार समस्या के समाधान की मांग की थी। इसके बाद कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे स्वयं प्रभावित गांवों में पहुंचे और वहां की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं विस्तार से बताईं। इसके बाद कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और ग्राम पंचायतों को तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने तेजी से काम करते हुए पेयजल व्यवस्था को बहाल कराया।

दिव्यांग परिवार के लिए पानी लाना था सबसे बड़ी चुनौती
ग्राम गवासेन में रहने वाले दिव्यांग ऋषि राज शिवनकर और उनका परिवार लंबे समय से पानी की समस्या से परेशान था। परिवार में पत्नी और बच्चे भी दिव्यांग हैं, जिसके कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई थी। घर में नल कनेक्शन नहीं था और गांव में बिजली की समस्या के चलते नियमित जल आपूर्ति भी नहीं हो पा रही थी।
ऋषि राज ने बताया कि उन्हें हर दिन डेढ़ से दो किलोमीटर दूर जाकर स्कूटी से पानी लाना पड़ता था। तेज गर्मी में पानी भरने जाना उनके लिए बेहद मुश्किल काम था। कई बार पेट्रोल खर्च करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। परिवार की जरूरतें पूरी करना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा था।
इसी दौरान कलेक्टर डॉ. सोनवणे गांव के दौरे पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उनसे पेयजल और बिजली की समस्या बताई। इसके बाद कलेक्टर ने तुरंत ग्राम पंचायत और पीएचई विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन की पहल के बाद ऋषि राज के घर तक पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया गया। गांव की बिजली व्यवस्था में भी सुधार किया गया। अब परिवार को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। ऋषि राज का कहना है कि अब उनका समय, मेहनत और पेट्रोल तीनों बच रहे हैं।
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चार महीने बाद चिरापाटला में फिर बहा नल का पानी
चिरापाटला गांव में पिछले चार महीनों से पेयजल संकट बना हुआ था। सड़क निर्माण के दौरान निर्माण कंपनी द्वारा पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके कारण गांव की नलजल योजना पूरी तरह बंद हो गई थी। गांव के लोग हैंडपंपों पर निर्भर हो गए थे, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ हैंडपंपों पर भी दबाव बढ़ गया था।
गांव की निवासी आशा इवने ने बताया कि हर दिन पानी भरने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती थी। कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। वहीं ग्रामीण नरसिंग राव ने बताया कि परिवार का अधिकांश समय सिर्फ पानी की व्यवस्था में निकल जाता था। पुष्पेंद्र करोचे ने बताया कि टैंकर से पानी लाने में रोज डीजल खर्च हो रहा था, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ रही थी।
ग्रामीणों की समस्या तब दूर हुई जब कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें आवेदन देकर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद कलेक्टर ने मौके पर ही पीएचई विभाग को तुरंत पाइपलाइन सुधारने के निर्देश दिए। विभाग ने तेजी से काम करते हुए महज चार दिनों में नई पाइपलाइन बिछाकर जल आपूर्ति शुरू कर दी। अब गांव के घरों तक फिर से नल का पानी पहुंचने लगा है। ग्रामीणों ने राहत मिलने पर प्रशासन का आभार जताया है।

बन्नु ढाना में भी दूर हुआ जल संकट
चिरापाटला के बन्नु ढाना क्षेत्र में भी जल संकट गहरा गया था। यहां ट्यूबवेल की मोटर जमीन में धंस जाने से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई थी। स्थिति बिगड़ने पर पीएचई विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्यूबवेल की सफाई कराई और नया नलकूप स्थापित कराया। इसके बाद अब लगभग 100 परिवारों को नियमित पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
झिरियाडोह में सूख गया था गांव का एकमात्र हैंडपंप
वनग्राम झिरियाडोह में हालात और भी गंभीर हो गए थे। गांव का एकमात्र हैंडपंप सूख जाने के कारण पूरा गांव पानी के संकट से जूझ रहा था। ग्रामीणों को दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा था। गर्मी के मौसम में यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही थी।
गांव के राक्शे कास्दे ने बताया कि सुबह होते ही पानी की चिंता शुरू हो जाती थी। कई परिवारों का पूरा दिन पानी जुटाने में बीत जाता था। गांव में पेयजल की समस्या के कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया था।
रात्रि चौपाल में ग्रामीणों ने बताई परेशानी
कलेक्टर डॉ. सोनवणे जब गांव के दौरे पर पहुंचे तो रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्या बताई। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। गांव में हर घर तक पाइपलाइन बिछाई गई और 24 घंटे के भीतर नलजल व्यवस्था शुरू कर दी गई।
इसके बाद ग्राम पंचायत द्वारा गांव में सोलर पंप भी स्थापित कराया गया, जिससे अब नियमित रूप से पानी की सप्लाई हो रही है। साथ ही गांव में बिजली की समस्या को भी दूर किया गया। खराब ट्रांसफार्मर को ठीक कर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई है। इससे ग्रामीणों को पानी के साथ बिजली संकट से भी राहत मिली है।
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ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत
तीनों गांवों में पेयजल व्यवस्था बहाल होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। अब लोगों को पानी के लिए दूर-दूर भटकना नहीं पड़ रहा। महिलाएं और बुजुर्ग भी राहत महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद गांवों में नियमित रूप से साफ पानी मिलना शुरू हुआ है, जिससे दैनिक जीवन फिर सामान्य होने लगा है।
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