MP Electricity Tariff Hike: मध्यप्रदेश में बढ़ीं बिजली दरें, 1 अप्रैल से जेब पर पड़ेगा असर, जानिए किसे कितना देना होगा ज्यादा
MP Electricity Tariff Hike: Electricity rates have increased in Madhya Pradesh, which will affect the pocket from April 1. Find out who will have to pay more.

MP Electricity Tariff Hike: मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया वित्तीय वर्ष महंगा साबित होने वाला है। राज्य में बिजली दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है, जिससे लाखों उपभोक्ताओं के मासिक खर्च पर असर पड़ेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रस्तावित वृद्धि की तुलना में कम बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है और कुछ श्रेणियों में छूट भी दी गई है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी का फैसला
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने गुरुवार को वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी दे दी है। आयोग ने कुल 4.80 प्रतिशत की वृद्धि को स्वीकृति दी है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। इसके बाद राज्य के सभी उपभोक्ताओं को बढ़े हुए टैरिफ के अनुसार बिल चुकाना होगा।
बिजली बिल में कितना बढ़ेगा खर्च
नई दरों के अनुसार यदि कोई घरेलू उपभोक्ता हर महीने 200 यूनिट बिजली खर्च करता है, तो उसे करीब 80 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा। ऊर्जा प्रभार में सभी वर्गों के लिए 26 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही फिक्स चार्ज भी अलग-अलग श्रेणियों में बढ़ाया गया है।
विभिन्न श्रेणियों पर कितना असर
नई दरों के तहत घरेलू उपभोक्ताओं पर औसतन 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी लागू होगी। वहीं निम्न दाब उद्योग पर 4 प्रतिशत, उच्च दाब उपभोक्ताओं पर 4.18 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र में करीब 5.2 प्रतिशत वृद्धि की गई है।
राहत योजनाएं जारी रहेंगी
सरकार की ओर से 150 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 584 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी। स्मार्ट मीटर उपयोग करने वालों को दिन के समय बिजली खपत पर 20 प्रतिशत तक छूट भी मिलती रहेगी।
कम खपत वालों को राहत
निम्न आय वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए पहले से लागू रियायतें जारी रखी गई हैं। 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को भी पहले की तरह लाभ मिलता रहेगा।
अन्य राज्यों में क्या है स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार देश के कुछ राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में फिलहाल बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। आंध्र प्रदेश, बिहार और तेलंगाना में तो दरों में कमी भी दर्ज की गई है।
प्रस्ताव से कम की गई बढ़ोतरी
बिजली वितरण कंपनियों ने दरों में 10.19 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव कंपनियों को हो रहे 6043 करोड़ रुपये से अधिक के घाटे को पूरा करने के लिए रखा गया था। हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और इसे घटाकर 4.80 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। माना जा रहा है कि इस फैसले में उपभोक्ताओं और कंपनियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
कितने उपभोक्ताओं पर असर
राज्य में करीब एक करोड़ 29 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं, जिन पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ेगा। अप्रैल से आने वाले बिजली बिलों में बढ़ी हुई दरों का प्रभाव दिखाई देगा, जिससे आम लोगों के मासिक बजट पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
कुछ मामलों में मिली राहत
आयोग ने दर बढ़ाने के साथ ही कुछ राहत भी दी है। उपभोक्ताओं को मीटरिंग प्रभार नहीं देना होगा, जिससे अतिरिक्त शुल्क से बचाव रहेगा। इसके अलावा आयोग ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे उपभोक्ताओं को नई दरों की जानकारी दें और बिलिंग प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखें, ताकि किसी तरह की अतिरिक्त वसूली न हो।
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कई श्रेणियों में नहीं बढ़ी दरें
कुछ उपभोक्ता वर्गों के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सीजनल श्रेणी और मेट्रो रेल से जुड़े उपभोक्ताओं को बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लो वोल्टेज और हाई वोल्टेज की कई श्रेणियों में न्यूनतम शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इनमें सिंचाई, सार्वजनिक जलप्रदाय और बल्क रेसिडेंशियल जैसी श्रेणियां शामिल हैं। इस फैसले से इन वर्गों को सीधे तौर पर राहत मिलेगी।
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नई व्यवस्था में खास प्रावधान
नई दरों के साथ कुछ विशेष प्रावधान भी लागू रहेंगे। हाई टेंशन और एक्स्ट्रा हाई टेंशन उपभोक्ताओं के लिए यूनिट आधारित बिलिंग जारी रहेगी। रात के समय बिजली उपयोग पर मिलने वाली छूट पहले की तरह मिलती रहेगी।
इसके अलावा प्रीपेड मीटर और ऑनलाइन भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली रियायत भी जारी रखी गई है। स्मार्ट मीटर उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को सोलर ऊर्जा के समय ऊर्जा शुल्क में 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।
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ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा
आयोग ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए हैं। ग्रीन टैरिफ में कमी की गई है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त सरचार्ज भी घटाया गया है, जिससे बड़े उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
आम उपभोक्ताओं पर असर
बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं के मासिक खर्च पर पड़ेगा। हालांकि वृद्धि सीमित रखी गई है और कई रियायतें भी दी गई हैं, फिर भी घरों का बजट प्रभावित होना तय माना जा रहा है। कुल मिलाकर यह फैसला बिजली कंपनियों के घाटे और उपभोक्ताओं की क्षमता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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