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Dimethyl Ether DME Gas: LPG का देसी विकल्प तैयार! पुणे के वैज्ञानिकों ने बनाई नई गैस, बिना बदलाव चूल्हे में होगी इस्तेमाल

Dimethyl Ether (DME) Gas: A local alternative to LPG! Pune scientists have developed a new gas that can be used in stoves without modifications.

Dimethyl Ether DME Gas: LPG का देसी विकल्प तैयार! पुणे के वैज्ञानिकों ने बनाई नई गैस, बिना बदलाव चूल्हे में होगी इस्तेमाल
Dimethyl Ether DME Gas: LPG का देसी विकल्प तैयार! पुणे के वैज्ञानिकों ने बनाई नई गैस, बिना बदलाव चूल्हे में होगी इस्तेमाल

Dimethyl Ether DME Gas: दुनिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत में रसोई गैस का एक नया स्वदेशी विकल्प सामने आया है। पुणे के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि डाइमिथाइल ईथर नाम की गैस भविष्य में एलपीजी का विकल्प बन सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गैस एलपीजी की तरह ही जलती है, कम प्रदूषण फैलाती है और मौजूदा रसोई गैस व्यवस्था में बिना किसी बदलाव के इस्तेमाल की जा सकती है।

तनाव के बीच बढ़ी ईंधन की चिंता

वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में कई देशों की तरह भारत भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए विकल्प तलाश रहा है।

इसी बीच पुणे के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी गैस विकसित करने का दावा किया है, जो रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का सस्ता और स्वदेशी विकल्प बन सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस गैस का नाम डाइमिथाइल ईथर है, जिसे संक्षेप में डीएमई कहा जाता है। इस पर लंबे समय से शोध किया जा रहा था और अब इसके परिणाम सामने आने लगे हैं।

पुणे की प्रयोगशाला में हुआ शोध

पुणे स्थित सीएसआईआर की नेशनल केमिकल लेबोरेटरी में वैज्ञानिकों की टीम पिछले करीब दो दशकों से इस ईंधन पर काम कर रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि करीब 20 वर्षों की मेहनत के बाद अब यह तकनीक व्यवहारिक रूप में सामने आई है। हालांकि इसके बड़े पैमाने पर उपयोग से पहले अभी कई तकनीकी और व्यावसायिक चुनौतियां भी मौजूद हैं। संस्थान ने हाल ही में डीएमई गैस के उत्पादन के लिए एक पायलट प्लांट भी स्थापित किया है। इस संयंत्र के माध्यम से उत्पादन की प्रक्रिया को समझा जा रहा है और भविष्य में इसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

क्या है डाइमिथाइल ईथर गैस

डाइमिथाइल ईथर एक विशेष प्रकार की गैस है जिसे सामान्य रूप से डीएमई कहा जाता है। यह गैस मेथनॉल से कृत्रिम रूप से तैयार की जाती है। मेथनॉल कई तरह के स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। इसमें बायोमास, कोयला और यहां तक कि कैप्चर की गई कार्बन डाइऑक्साइड भी शामिल है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि डीएमई के कई गुण एलपीजी से मिलते हैं। यह गैस भी उसी तरह सुरक्षित तरीके से जलती है और खाना पकाने के लिए उपयुक्त ऊर्जा प्रदान करती है। इसी वजह से इसे एलपीजी का संभावित विकल्प माना जा रहा है।

बिना किसी बदलाव इस्तेमाल संभव

शोध से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार इस गैस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए घरों में मौजूद गैस चूल्हे या सिलेंडर में किसी तरह का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह गैस वर्तमान रसोई गैस प्रणाली के साथ आसानी से उपयोग की जा सकती है। डीएमई गैस ऊर्जा देने के मामले में भी एलपीजी के काफी करीब है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे घरेलू उपयोग के लिए उपयुक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

इसलिए जरूरी है यह विकल्प

भारत अपनी रसोई गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई संकट या युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो गैस की कीमतों और उपलब्धता पर सीधा असर पड़ता है। इसी कारण देश के लिए स्वदेशी ईंधन विकल्प विकसित करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश में डीएमई का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू हो जाता है, तो आयातित एलपीजी पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

विदेशी मुद्रा की बचत की संभावना

भारत हर साल एलपीजी आयात करने के लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करता है। शोध से जुड़े आंकड़ों के अनुसार यदि रसोई गैस में केवल आठ प्रतिशत डीएमई गैस मिलाई जाए तो देश को हर वर्ष लगभग 9500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच यह बचत देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प

डीएमई गैस को केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह गैस जलने पर एलपीजी की तुलना में कम प्रदूषण पैदा करती है। इसमें हानिकारक कणों का उत्सर्जन भी कम होता है। दुनिया भर में स्वच्छ और कम प्रदूषण वाले ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डीएमई को एक क्लीन फ्यूल के रूप में देखा जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

भविष्य में बनेगा मजबूत विकल्प

नीति निर्माताओं और वैज्ञानिकों का लक्ष्य ऐसा स्वदेशी ईंधन तैयार करना है जो सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो। यदि पुणे की प्रयोगशाला का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है और इसका उत्पादन बड़े स्तर पर शुरू किया जाता है, तो आने वाले समय में यह गैस एलपीजी के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के सफल होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर कम पड़ेगा। इस तरह डीएमई गैस भविष्य में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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