Railway Loco Pilots Protest: रेलवे लोको पायलटों का 27 मार्च को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन, लंबी ड्यूटी और स्टाफ की कमी पर उठेगा सवाल
जंतर-मंतर पर देशभर के लोको पायलटों का प्रदर्शन, काम के बढ़ते दबाव और खाली पदों को लेकर रेलवे से समाधान की मांग

Railway Loco Pilots Protest: भारतीय रेलवे में ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट अपनी कई लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन के रास्ते पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के आह्वान पर देशभर के लोको पायलट 27 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
27 मार्च को जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन
लोको पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने दिल्ली में प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से रेल चालकों की कार्य परिस्थितियों, भत्तों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं, लेकिन इन पर अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। इसी कारण देशभर के लोको पायलटों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने का फैसला किया है।
काम के घंटे और तनाव सबसे बड़ा मुद्दा
संगठन के केंद्रीय उपाध्यक्ष राम शरण के मुताबिक लोको पायलटों की ड्यूटी पहले से ज्यादा कठिन होती जा रही है। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार ड्यूटी की एक तय समय सीमा है, लेकिन व्यवहार में कई बार इससे अधिक समय तक काम करना पड़ता है। ट्रेनें देर से चलने की स्थिति में ड्राइवरों की ड्यूटी भी लंबी हो जाती है। ऐसे में लगातार कई घंटों तक काम करना पड़ता है, जिससे मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक तनाव में काम करना स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित हो रहा है।
लगातार नाइट ड्यूटी से बढ़ रही परेशानी
एक लोको पायलट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार कर्मचारियों को लगातार छह से सात रात तक ड्यूटी करनी पड़ती है। जबकि नियमों में लगातार चार रात तक ही नाइट ड्यूटी की अनुमति है और चौथी रात की ड्यूटी भी मुख्यालय में तय मानी जाती है। लगातार कई रातों तक काम करने से थकान बढ़ जाती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आने लगती हैं। इसके बावजूद इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
इंजन में बुनियादी सुविधाओं की कमी
लोको पायलटों का कहना है कि कई रेल इंजनों में अब भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कई लोकोमोटिव में शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण लंबी दूरी की यात्रा के दौरान ड्राइवरों को काफी परेशानी होती है। यह समस्या महिला लोको पायलटों के लिए और भी कठिन हो जाती है। ऐसे हालात में उन्हें अगले स्टेशन तक इंतजार करना पड़ता है या फिर असुविधाजनक विकल्प अपनाने पड़ते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इंजन में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
स्टाफ की कमी से बढ़ रहा काम का बोझ
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राम राज भगत के अनुसार रेलवे में लोको रनिंग स्टाफ के लगभग 31 हजार पद खाली हैं। इस वजह से मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। स्टाफ की कमी के कारण कई बार ड्राइवरों को पर्याप्त आराम भी नहीं मिल पाता। नियमों के अनुसार ड्यूटी के बाद 16 घंटे का विश्राम मिलना चाहिए और ड्यूटी से पहले तैयारी के लिए दो घंटे का समय दिया जाना चाहिए, लेकिन कई मामलों में सिर्फ करीब 14 घंटे के बाद ही कर्मचारियों को फिर से ड्यूटी पर बुला लिया जाता है।
किलोमीटर भत्ते में बढ़ोतरी की मांग
संगठन के महासचिव केसी जेम्स ने बताया कि लोको पायलट किलोमीटर अलाउंस में 25 प्रतिशत वृद्धि की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह भत्ता मूल वेतन के एक हिस्से और यात्रा भत्ते से मिलकर बनता है। जब इन घटकों में बदलाव होता है तो किलोमीटर भत्ते की दरों में भी संशोधन होना चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से इस मामले में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगने लगे कर्मचारी
रेलवे में कार्य परिस्थितियों से असंतोष का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हाल ही में 70 से अधिक लोको पायलटों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। उन्होंने एक संयुक्त पत्र में लिखा कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और सिस्टम से जुड़े मुद्दों के कारण वे इस कदम के लिए मजबूर हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार शिकायतें और सुझाव देने के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
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लोको पायलटों की मुख्य शिकायतें
लोको पायलटों ने जिन प्रमुख समस्याओं का जिक्र किया है उनमें रनिंग रूम में खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें, सुविधाओं के रखरखाव में कमी, असुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर, आने-जाने की दिक्कतें और अत्यधिक प्रशासनिक दबाव शामिल हैं। उनका कहना है कि अनियमित ड्यूटी और लगातार तनाव का असर उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन दोनों पर पड़ रहा है।
क्या कहते हैं रेलवे के नियम
रेलवे एक्ट 1989 की धारा 132(2) के तहत लोको पायलटों की ड्यूटी और कार्य समय से जुड़े प्रावधान तय किए गए हैं। रोजगार के घंटों के नियम के अनुसार लोको रनिंग स्टाफ को दो सप्ताह की अवधि में कुल 104 घंटे काम करना होता है। कार्य के घंटे और विश्राम अवधि से संबंधित नियम 2005 के मुताबिक औसतन प्रति सप्ताह 52 घंटे की ड्यूटी निर्धारित की गई है।
रनिंग स्टाफ के लिए उपलब्ध सुविधाएं
रेलवे प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों की सुविधा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रनिंग रूम में एयर कंडीशनर लगाए गए हैं ताकि कर्मचारी आराम कर सकें। इसके साथ ही योग और मेडिटेशन कक्ष, पढ़ने के लिए अखबार और पत्रिकाओं वाले रीडिंग रूम जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। कर्मचारियों को सब्सिडी वाला भोजन और पीने के लिए फिल्टर पानी की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है।
इन सभी मुद्दों के बीच लोको पायलटों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनकी परेशानियां कम नहीं होंगी। इसी कारण अब वे दिल्ली में प्रदर्शन के जरिए अपनी बात सरकार और रेलवे प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं।
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