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LPG Cylinder Price Hike: घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा: अंतरराष्ट्रीय संकट का असर, जानें अब कहां कितने में मिलेगा

LPG Cylinder Price Hike: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़े LPG के दाम, कॉमर्शियल सिलेंडर भी 115 रुपये महंगा

LPG Cylinder Price Hike
LPG Cylinder Price Hike

LPG Cylinder Price Hike: देशभर में रसोई गैस की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो गई है। केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए हैं। इसके साथ ही 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत भी बढ़ाई गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और गैस आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की लगातार आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी

सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में 60 रुपये की वृद्धि की है। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर अब 913 रुपये में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी। इसी तरह कोलकाता में इसकी कीमत 939 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये हो गई है।

अन्य शहरों में भी कीमतों में समान बढ़ोतरी देखी गई है। भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडर अब 918.50 रुपये में मिलेगा, जबकि जयपुर में इसकी कीमत 916.50 रुपये हो गई है। पटना में उपभोक्ताओं को अब एक सिलेंडर के लिए 1011 रुपये देने होंगे। वहीं रायपुर में इसकी कीमत 984 रुपये तय की गई है। सभी शहरों में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

कॉमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा

घरेलू गैस के साथ-साथ कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की वृद्धि की गई है। नई दरों के अनुसार अब यह सिलेंडर 1883 रुपये में मिलेगा। इस तरह होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत पर भी असर पड़ने की संभावना है।

7 मार्च से लागू हुई नई कीमतें

गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं। इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 50 रुपये बढ़ाए थे। इस तरह करीब एक साल बाद घरेलू गैस की कीमतों में फिर वृद्धि की गई है। दूसरी ओर 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग 31 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।

पश्चिम एशिया के तनाव का असर

गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच टकराव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार पहले से तैयारी कर रही है।

एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश

संभावित गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 5 मार्च को एक अहम फैसला लिया था। सरकार ने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी तेल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया है कि रिफाइनरियां अब प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी।

साथ ही सभी कंपनियों को इन दोनों गैसों की आपूर्ति सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। इनमें इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देशभर में घरेलू गैस की सप्लाई बाधित न हो।

गैस सप्लाई संकट की दो बड़ी वजहें

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान स्थिति में गैस आपूर्ति को लेकर दो प्रमुख कारण चिंता का विषय बने हुए हैं।

पहली वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी है। यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल निर्यातक देश भी इस रास्ते पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी मार्ग से आयात करता है।

दूसरी वजह कतर में एलएनजी उत्पादन प्रभावित होना है। हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद ईरान ने क्षेत्र के कई अमेरिकी ठिकानों और बंदरगाहों को निशाना बनाया। इस दौरान कतर के रास लफान स्थित एलएनजी प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ। सुरक्षा कारणों से वहां एलएनजी उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। कतर भारत को गैस आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है और भारत अपनी लगभग 40 प्रतिशत एलएनजी जरूरत इसी देश से पूरी करता है।

सीएनजी कंपनियों की यह चिंता

गैस आपूर्ति में संभावित कमी को देखते हुए सीएनजी कंपनियों ने भी सरकार को अपनी चिंता से अवगत कराया है। एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज ने सरकारी कंपनी गेल को पत्र लिखकर स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मांगी है। कंपनियों का कहना है कि यदि कतर से मिलने वाली सस्ती गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो उन्हें स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ेगी।

फिलहाल स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत करीब 25 डॉलर प्रति यूनिट पहुंच चुकी है, जो अनुबंध के तहत मिलने वाली गैस की कीमत से दोगुने से भी अधिक है। कंपनियों को आशंका है कि यदि गैस की कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं तो उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर सकते हैं।

निजी कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

सरकार के फैसले का प्रभाव निजी क्षेत्र की कंपनियों पर भी पड़ सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादों की जगह एलपीजी बनाने में लगाने से कुछ कंपनियों के उत्पादन और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन गैसों का इस्तेमाल अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे उत्पाद बनाने में भी किया जाता है, जिनकी बाजार कीमत एलपीजी की तुलना में अधिक होती है।

घबराने की जरूरत नहीं: सरकार

हालांकि सरकार ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में घबराने की जरूरत नहीं है। भारत अब कच्चे तेल के आयात के लिए केवल एक ही मार्ग पर निर्भर नहीं है। देश अपनी जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से भी आयात कर रहा है। इसके अलावा देश में पेट्रोलियम और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि आम लोगों को गैस की आपूर्ति में किसी तरह की दिक्कत न हो और बाजार में स्थिरता बनी रहे।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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