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Indian Railways Electrification: भारतीय रेलवे बड़ी उपलब्धि के करीब, ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग पूरा हिस्सा हुआ इलेक्ट्रिफाइड

Indian Railways Electrification: ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.4% हिस्सा बिजली से संचालित, डीज़ल पर निर्भरता तेजी से घटी

Indian Railways Electrification: भारतीय रेलवे बड़ी उपलब्धि के करीब, ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग पूरा हिस्सा हुआ इलेक्ट्रिफाइड
Indian Railways Electrification: भारतीय रेलवे बड़ी उपलब्धि के करीब, ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग पूरा हिस्सा हुआ इलेक्ट्रिफाइड

Indian Railways Electrification: दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। जब वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है, तब भारतीय रेलवे लगभग पूरी तरह बिजली से संचालित होने की स्थिति में पहुंच गया है। देश का विशाल रेल नेटवर्क अब डीज़ल पर निर्भरता तेजी से घटाते हुए इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में ऐतिहासिक मुकाम के करीब है। यह बदलाव केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु नीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया तनाव और ऊर्जा बाजार की चिंता

पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। विशेष रूप से ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत के आयातित तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता माना जाता है। यदि किसी कारण से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के साथ आपूर्ति में भी बाधा आ सकती है। ऐसे हालात में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बड़ा कदम

इसी पृष्ठभूमि में भारतीय रेलवे का तेजी से हो रहा इलेक्ट्रिफिकेशन एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है। मार्च 2026 तक रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग पूरा हिस्सा बिजली से संचालित हो चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 70,001 किलोमीटर लंबा ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क है, जिसमें से लगभग 69,427 किलोमीटर ट्रैक पर अब इलेक्ट्रिक इंजन चल रहे हैं। इसका मतलब है कि कुल नेटवर्क का करीब 99.4 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिफाइड हो चुका है।

अब केवल कुछ छोटे हिस्से ही बचे हैं, जो पांच अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। रेलवे इन हिस्सों को भी जल्द ही बिजली से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब भारतीय रेलवे दुनिया के उन चुनिंदा बड़े रेल नेटवर्क में शामिल हो जाएगा जो लगभग पूरी तरह इलेक्ट्रिक ऊर्जा पर आधारित हैं।

डीज़ल पर निर्भरता में तेजी से कमी

रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन का सबसे स्पष्ट असर डीज़ल की खपत में कमी के रूप में दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय रेलवे ने लगभग 178 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत की है। यदि इसे 2016-17 के आंकड़ों से तुलना करें तो डीज़ल खपत में करीब 62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

रेलवे जैसे विशाल परिवहन तंत्र के लिए यह केवल खर्च कम होने का मामला नहीं है। डीज़ल की खपत घटने का मतलब यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर रेलवे की लागत पर कम पड़ेगा। इससे रेलवे की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी और यात्रियों के लिए यात्रा लागत को नियंत्रित रखना आसान होगा।

रेलवे की भूमिका भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहद अहम है। हर दिन लगभग 2.6 करोड़ लोग देश में ट्रेन से यात्रा करते हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में माल परिवहन भी रेल नेटवर्क के माध्यम से होता है। ऐसे में रेलवे का अधिक किफायती और स्थिर ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

बिजली से चलने वाली ट्रेनों के फायदे

विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक इंजन डीज़ल इंजनों की तुलना में अधिक कुशल होते हैं। सामान्य तौर पर बिजली से चलने वाली ट्रेनें डीज़ल इंजनों के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत अधिक किफायती मानी जाती हैं। इससे संचालन लागत कम होती है और रेल सेवाओं की दक्षता भी बढ़ती है।

इलेक्ट्रिक इंजन न केवल ऊर्जा की बचत करते हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर होते हैं। इनसे कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिलती है। यही कारण है कि कई देश अपने रेल नेटवर्क को धीरे-धीरे बिजली आधारित प्रणाली में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।

सौर ऊर्जा की ओर भी बढ़ रहा रेलवे

भारतीय रेलवे केवल ग्रिड बिजली पर निर्भर नहीं रहना चाहता। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के उपयोग को भी तेजी से बढ़ाया है।

वर्ष 2014 में रेलवे के पास केवल 3.68 मेगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता थी। लेकिन नवंबर 2025 तक यह क्षमता बढ़कर लगभग 898 मेगावॉट तक पहुंच चुकी है। इस सौर ऊर्जा का बड़ा हिस्सा सीधे रेलवे संचालन में उपयोग किया जा रहा है।

देश भर में करीब 2600 से अधिक रेलवे स्टेशन और रेलवे की इमारतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे रेलवे को स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत भी मिल रहा है और बिजली खर्च में भी कमी आ रही है।

रेलवे ने वर्ष 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में रेलवे की कुल बिजली आवश्यकता 10 गीगावॉट से अधिक हो सकती है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त किया जाएगा।

दुनिया के लिए बन रहा उदाहरण

रेल नेटवर्क में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग पर काम करने वाली ब्रिटेन की संस्था राइडिंग सनबीम्स भी भारत के इस बदलाव पर नजर रखे हुए है। संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लियो मरे के अनुसार भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

उनका मानना है कि इतने बड़े रेल नेटवर्क को तेजी से इलेक्ट्रिफाई करना और साथ ही नेट जीरो का लक्ष्य तय करना यह दर्शाता है कि बुनियादी ढांचे की योजना को ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु नीति के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है। बहुत कम देश इतने बड़े पैमाने पर इस तरह का बदलाव कर पाए हैं।

भारत में संस्था की प्रतिनिधि महक अग्रवाल का कहना है कि रेल इलेक्ट्रिफिकेशन केवल तकनीकी परियोजना नहीं है। यह ऊर्जा बाजार, आर्थिक आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन के बीच एक व्यापक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।

नीति और समन्वय की भी है चुनौती

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं के लिए केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। इसके साथ नीति निर्माण, तकनीकी विकास और वित्तीय प्रबंधन के बीच संतुलन भी जरूरी है।

दिल्ली क्लाइमेट इनोवेशन वीक के दौरान आयोजित एक चर्चा में रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (वित्त) राहुल कपूर ने कहा कि तकनीक, नीति ढांचा, मानव संसाधन, आर्थिक रणनीति और केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय को एक साथ लेकर चलना आवश्यक है। उनके अनुसार इसी समन्वित दृष्टिकोण से नवाचार संभव होगा और वह किफायती भी रहेगा।

भारतीय रेलवे में हो रहा यह परिवर्तन बाहर से देखने पर सिर्फ बिजली के तारों और खंभों का विस्तार लगता है, लेकिन इसके पीछे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक बड़ी रणनीति काम कर रही है। दुनिया जब तेल बाजार के उतार-चढ़ाव से जूझ रही है, तब भारत की पटरियों पर धीरे-धीरे एक नया दौर आकार ले रहा है। डीज़ल इंजनों की आवाज कम हो रही है और उनकी जगह बिजली से चलने वाली एक नई, अधिक स्वच्छ और टिकाऊ रेल प्रणाली ले रही है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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