Fortified Rice: अब राशन दुकानों से नहीं मिलेगा फोर्टिफाइड चावल, सरकार ने लगाई अस्थायी रोक, समीक्षा के बाद अहम फैसला
Fortified Rice: आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय, लाभार्थियों को मिलने वाले राशन की मात्रा में नहीं होगा कोई बदलाव

Fortified Rice: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिलने वाले चावल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सरकार ने समीक्षा के बाद तय किया है कि फिलहाल फोर्टिफाइड चावल का वितरण रोका जाएगा। हालांकि इस कदम से राशन की मात्रा या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अस्थायी रूप से बंद रहेगा फोर्टिफिकेशन
सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और अन्य केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वितरित किए जा रहे चावल में पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया की समीक्षा की। मूल्यांकन के बाद यह निष्कर्ष निकला कि जब तक लाभार्थियों को पोषण उपलब्ध कराने का अधिक प्रभावी तरीका नहीं मिल जाता, तब तक चावल के फोर्टिफिकेशन को अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा।
आईआईटी खड़गपुर को सौंपा गया था अध्ययन
इस विषय में विस्तृत अध्ययन के लिए आईआईटी खड़गपुर को जिम्मेदारी दी गई थी। संस्थान ने देश के अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में वास्तविक भंडारण परिस्थितियों के आधार पर फोर्टिफाइड राइस कर्नेल और फोर्टिफाइड राइस की शेल्फ लाइफ का आकलन किया। रिपोर्ट में बताया गया कि नमी, तापमान, सापेक्ष आर्द्रता, भंडारण की स्थिति और पैकेजिंग सामग्री जैसे कारक इन उत्पादों की गुणवत्ता और स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लंबे समय तक भंडारण और बार-बार हैंडलिंग के कारण सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा घट सकती है। इससे निर्धारित अवधि के भीतर अपेक्षित पोषण लाभ पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पाता। चावल सामान्य रूप से दो से तीन वर्षों तक भंडारित रहता है, ऐसे में शेल्फ लाइफ कम होने की आशंका अधिक रहती है।
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लंबे समय तक गोदामों में रहता है चावल
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और अन्य योजनाओं के लिए सालाना 372 लाख मीट्रिक टन चावल का आवंटन होता है, जबकि केंद्रीय पूल में कुल उपलब्धता 674 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इसमें केएमएस 2025–26 से मिलने वाली मात्रा भी शामिल है। उपलब्ध भंडार और उठान की गति को देखते हुए चावल लंबे समय तक गोदामों में रहता है।
मिलने वाली मात्रा पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फोर्टिफिकेशन रोकने के फैसले से लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज की मात्रा या पात्रता में कोई बदलाव नहीं होगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास सेवाएं और मिड-डे मील योजना के संचालन पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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राज्यों को निर्णय लेने की रहेगी आजादी
केएमएस 2025–26 की खरीफ फसल और केएमएस 2024–25 से लंबित आपूर्ति के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अंतरिम व्यवस्था के तहत विकल्प दिया गया है। वे अपनी संचालन और लॉजिस्टिक जरूरतों के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल की आपूर्ति का निर्णय स्वयं ले सकेंगे।
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