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8th Pay Commission Delay Loss: 8वें वेतन आयोग में देरी से 5 लाख तक का नुकसान? डीए मर्ज की मांग क्यों हुई तेज

8th Pay Commission Delay Loss: 18 महीने की देरी से HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस का एरियर अटकने का खतरा, कर्मचारियों ने DA को बेसिक में जोड़ने की उठाई मांग

8th Pay Commission Delay Loss: 8वें वेतन आयोग में देरी से 5 लाख तक का नुकसान? डीए मर्ज की मांग क्यों हुई तेज
8th Pay Commission Delay Loss: 8वें वेतन आयोग में देरी से 5 लाख तक का नुकसान? डीए मर्ज की मांग क्यों हुई तेज

8th Pay Commission Delay Loss: देशभर में 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है, लेकिन आयोग की रिपोर्ट आने और उसे लागू करने में करीब 18 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है। यही संभावित देरी अब कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है।

क्यों बढ़ रही है कर्मचारियों की चिंता

जानकारों का मानना है कि अगर वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में लंबा समय लगता है, तो कर्मचारियों को सीमित एरियर ही मिलेगा। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, यदि रिपोर्ट 18 महीने बाद लागू होती है, तो एरियर केवल बेसिक सैलरी और डीए के अंतर का दिया जाएगा। हाउस रेंट अलाउंस और ट्रांसपोर्ट अलाउंस का एरियर नहीं मिलेगा। इसी बात को लेकर कर्मचारी संगठनों में असंतोष बढ़ रहा है।

लाखों का हो सकता है नुकसान

मामले को आंकड़ों से समझें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। मान लें कि 1 जनवरी 2026 को किसी कर्मचारी की मूल सैलरी 80,800 रुपये है और महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत है। 60 प्रतिशत डीए का मतलब 48,480 रुपये हुआ। इस तरह कुल वेतन 1,29,280 रुपये बनता है।

फिलहाल यदि कर्मचारी एक्स कैटेगरी शहर में है और उसे 30 प्रतिशत की दर से एचआरए मिल रहा है, तो 80,800 रुपये का 30 प्रतिशत 24,240 रुपये प्रति माह होगा।

अब यदि फिटमेंट फैक्टर 2.5 लागू किया जाता है, तो नई बेसिक सैलरी 80,800 गुणा 2.5 यानी 2,02,000 रुपये हो जाएगी। लेकिन डीए 25 प्रतिशत से कम होने पर एचआरए की दर 30 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत हो जाती है। ऐसे में 2,02,000 रुपये का 24 प्रतिशत 48,480 रुपये होगा।

पुराना एचआरए 24,240 रुपये था, जबकि नई स्थिति में यह 48,480 रुपये होना चाहिए। दोनों के बीच लगभग 24,230 रुपये प्रति माह का अंतर बनता है। यदि 18 महीने तक एचआरए का एरियर नहीं दिया जाता, तो 24,230 रुपये को 18 से गुणा करने पर करीब 4,36,140 रुपये का नुकसान होता है।

अब यदि ट्रांसपोर्ट अलाउंस में भी प्रति माह लगभग 3,000 रुपये का अंतर मान लिया जाए, तो 18 महीने में 54,000 रुपये और जुड़ जाते हैं। इस तरह कुल संभावित नुकसान लगभग 4.90 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यानी देरी की स्थिति में कर्मचारी को साढ़े चार से पांच लाख रुपये तक का झटका लग सकता है।

डीए मर्ज की इसलिए हो रही मांग

इसी वजह से कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन महंगाई भत्ते को मूल वेतन में जोड़ने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि 60 प्रतिशत डीए को 1 जनवरी 2026 से ही बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए, तो स्थिति कुछ हद तक संभल सकती है।

उदाहरण के तौर पर, 80,800 रुपये में 60 प्रतिशत डीए जोड़ने पर नई बेसिक सैलरी 1,29,280 रुपये बन जाएगी। यदि इस पर 24 प्रतिशत की दर से एचआरए लगाया जाए, तो 31,027 रुपये प्रति माह मिलेंगे। इस स्थिति में एचआरए के अंतर में कमी आएगी और कुल नुकसान घटकर लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये के बीच रह सकता है।

डॉ. मंजीत सिंह पटेल का तर्क है कि वेतन आयोग की रिपोर्ट जब भी लागू हो, लेकिन देरी का भार कर्मचारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उनका कहना है कि डीए को समय रहते बेसिक में शामिल करना ही व्यावहारिक समाधान हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि देरी की स्थिति में उनकी आर्थिक सुरक्षा का ध्यान जरूर रखा जाएगा।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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