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उपेक्षित गांव के बदनसीब लोग : यहां एक ही घाट का पानी पीते हैं इंसान और मवेशी, शुद्ध जल तक मुहैया नहीं


◼️ उत्तम मालवीय, बैतूल
एक ओर देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। चहुंमुखी विकास की खूब बातें हो रही हैं। लोगों को प्रचुरता से उपलब्ध होने वाली सुविधाओं के भी जमकर दावें हो रहे हैं। लेकिन इसके विपरीत जिले के कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां पर लोगों को शुद्ध पानी जैसी सबसे बुनियादी सुविधा तक मयस्सर नहीं हैं। आज हम आपको दिखाते हैं ऐसे ही 2 उपेक्षित गांवों के बदनसीब लोगों की तस्वीर।

आजादी के 75 साल बाद भी उपेक्षा और अनदेखी का दंश झेल रहे यह 2 गांव हैं मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में स्थित भंडारपानी और दानवाखेड़ा। ग्राम पंचायत नूतनडंगा के अंतर्गत आने वाले इन दोनों ही गांवों के लोगों की एक जैसी ही कहानी है। जिसे सुन कर साधन संपन्न लोग शायद ही विश्वास करें।

श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल बताते हैं कि ऊंची पहाड़ी पर स्थित ग्राम भंडारपानी और दानवाखेड़ा में पीने के पानी की समस्या आज भी हल नहीं हो पाई है। यहां के ग्रामीण आज भी नदी का पानी ही पीने को विवश हैं। गर्मी में जब नदी भी सूख जाती है और डोह भर बच जाता है।

श्री गढ़वाल कहते हैं कि इसी डोह का मवेशी भी पानी पीते हैं और ग्रामीण भी। मवेशियों की आवाजाही से पानी मटमैला हो जाता है। ऐसे में मजबूरी में इसी पानी का छानकर उपयोग करते हैं। कई बार डोह के पास ही झिरिया भी बनाते हैं ताकि साफ पानी मिल सके। लेकिन इसमें पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में डोह का पानी ही उपयोग करना होता है।

ग्राम भंडारपानी के सेखलाल आदिवासी का कहना है कि हमने कई बार पंचायत, एसडीएम शाहपुर और जिला प्रशासन बैतूल को लिखित आवेदन देकर पानी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई, लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हो पाया। हमारे गांव की मूलभूत बुनियादी समस्या तक हल नहीं हुई हैं।

केवल चुनाव के समय पहुंचते नेता

ग्रामीणों के अनुसार नेताओं को हमारे गांव की यादव केवल चुनाव के समय आती है। उस समय नेता आते हैं, तमाम आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव होते भूल जाते हैं और ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ देते हैं। गांव में 50 मकान, 300 मतदाता और कुल आबादी 500 के करीब है।

समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन

संगठन के श्री गढ़वाल बताते हैं कि प्रदेश में आजादी का महा उत्सव मनाया जा रहा है। हर गांव मै पानी, शिक्षा, स्वास्थ सुविधा, सड़कें पहुंचने की बात की जा रही है। लेकिन जमीन स्तर पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीण आज भी पीने के पानी सहित मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेल रहे हैं। भंडारपानी, दानवाखेड़ा, मंडूखेड़ा, पुत्तीनाला, नीलगढ़, उमरडोह, मालीखेड़ा इसके उदाहरण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एक सप्ताह में इन गांवों में पानी की व्यवस्था नहीं की जाती तो संगठन द्वारा आंदोलन किया जाएगा।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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