wheat procurement: गेहूं खरीदी में बड़ा फैसला: मंझोले-बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू, तारीख बढ़ी, भुगतान भी तेज
Wheat procurement: Major decision in wheat procurement: Slot booking begins for medium and large farmers, date extended, payment also expedited

wheat procurement: प्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है और व्यवस्थाओं को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है। युद्ध जैसे चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद किसानों को बेहतर सुविधा देने और खरीदी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं, जिससे किसानों को समय पर भुगतान और सुविधाजनक व्यवस्था मिल सके।
गेहूं खरीदी का बढ़ाया गया लक्ष्य
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर करीब 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। इस बार सरकार ने इससे आगे बढ़ते हुए 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य उस समय तय किया गया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
संभागों में अलग-अलग तिथियों से स्लॉट बुकिंग
गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में 24 अप्रैल की शाम 6 बजे से मध्यम और बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू कर दी गई है। वहीं जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के जिलों में 25 अप्रैल दोपहर 12 बजे से यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह व्यवस्था पिछले वर्ष की तरह ही लागू की गई है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
स्लॉट बुकिंग की अवधि बढ़ाई गई
किसानों को अधिक समय देने के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख को भी आगे बढ़ाया गया है। पहले यह अवधि 30 अप्रैल 2026 तक निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब 9 मई 2026 कर दिया गया है। इसके अलावा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग और खरीदी का काम जारी रहेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान अपनी उपज बेच सकें।
अब तक की प्रगति का आंकड़ा
प्रदेश में अब तक बड़ी संख्या में किसान गेहूं बेचने के लिए आगे आए हैं। लगभग 7 लाख 76 हजार किसानों ने 32 लाख 16 हजार मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक कर लिया है। इनमें से 3 लाख 96 हजार 97 किसानों से 16 लाख 57 हजार 526 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके अलावा 2 लाख 1 हजार 254 किसानों को भुगतान के लिए 2166.29 करोड़ रुपये के ईपीओ जारी किए जा चुके हैं।
खरीदी क्षमता में किया गया बड़ा इजाफा
खरीदी प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए सरकार ने उपार्जन केन्द्रों की क्षमता में भी बढ़ोतरी की है। पहले प्रति केन्द्र रोजाना 1000 क्विंटल गेहूं की स्लॉट बुकिंग की सीमा थी, जिसे अब बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। इससे ज्यादा किसान एक ही दिन में अपनी उपज बेच सकेंगे और उन्हें इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
तौल कांटों की संख्या बढ़ाई गई
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपार्जन केन्द्रों पर तौल कांटों की संख्या भी बढ़ाई गई है। पहले जहां चार तौल कांटे होते थे, अब उनकी संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है। इससे एक ही समय में ज्यादा किसानों की उपज की तौल संभव हो सकेगी और खरीदी प्रक्रिया तेज होगी।
किसानों को मिली अतिरिक्त सुविधा
अब किसानों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर जाकर अपनी उपज बेच सकते हैं। इससे उन्हें एक ही स्थान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे अपनी सुविधा के अनुसार केन्द्र का चयन कर सकेंगे। इसके साथ ही केन्द्रों पर पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
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उपार्जन केन्द्रों पर पूरी तैयारी
खरीदी कार्य में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए सभी आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था पहले से कर ली गई है। केन्द्रों पर बारदाना, तौल कांटे, हम्माल, तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध हैं। इसके अलावा गुणवत्ता जांच के उपकरण और अनाज की सफाई के लिए पंखा और छन्ना भी रखे गए हैं। केन्द्रों की इन व्यवस्थाओं की फोटो लेकर भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड की जा रही है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
समर्थन मूल्य और बोनस की जानकारी
इस वर्ष किसानों से गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है। इस तरह किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिल रहा है, जो उनके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होगा।
भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था
सरकार ने खरीदे गए गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए हैं। जूट के बारदानों के साथ-साथ पीपी और एचडीपी बैग का उपयोग किया जा रहा है। इससे अनाज को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और किसी प्रकार की क्षति से बचाव होगा।
किसानों के लिए राहत भरी पहल
कुल मिलाकर इस बार गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। लक्ष्य बढ़ाने से लेकर सुविधाओं में सुधार और भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने तक हर पहलू पर ध्यान दिया गया है। इन व्यवस्थाओं से किसानों को न केवल अपनी उपज बेचने में आसानी होगी, बल्कि उन्हें समय पर भुगतान भी मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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