Cucumber Early Farming: फरवरी में शुरू करें खीरे की अगेती खेती, 45 दिन में तैयार फसल से दोगुना होगा मुनाफा
Cucumber Early Farming: 18 से 30 डिग्री तापमान, सही मिट्टी और नर्सरी पद्धति से खीरे की अगेती खेती में बेहतर उत्पादन और ऊंचे दाम

Cucumber Early Farming: गर्मी के दिनों में खीरे की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में अगर किसान समय से पहले फसल तैयार कर लें तो उन्हें बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय, उपयुक्त मिट्टी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर खीरे की अगेती खेती से अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।
अगेती खेती के लिए कैसा चाहिए तापमान
खेती से जुड़े जानकार बताते हैं कि फरवरी के मध्य का समय खीरे की अगेती फसल के लिए अनुकूल रहता है। इस दौरान यदि तापमान 18 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहे तो बीज तेजी से अंकुरित होते हैं और पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है। यदि मौसम में ठंड अधिक हो तो सीधे खेत में बीज डालने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है। ऐसे हालात में पहले नर्सरी तैयार करना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी तरीका माना जाता है। जब बाजार में खीरे की उपलब्धता कम रहती है और मांग ज्यादा होती है, तब अगेती फसल किसानों को सामान्य दिनों की तुलना में बेहतर दाम दिला सकती है।
खेती के लिए इस तरह करें तैयारी
विशेषज्ञों के अनुसार खीरे की खेती के लिए ऐसी मिट्टी चुननी चाहिए जिसमें पानी जमा न हो। बलुई दोमट मिट्टी को इसके लिए उपयुक्त माना गया है, क्योंकि इसमें जल निकासी अच्छी रहती है। बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई कर मिट्टी को नरम और भुरभुरी बना लेना चाहिए। इससे जड़ों का विकास बेहतर होता है। प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है।
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मजबूत होने पर लगाए खेत में पौधे
अगेती फसल के लिए बीजों को पहले पॉलीथिन ट्रे या छोटे कप में तैयार किया जाता है। लगभग 15 से 20 दिनों में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। जब पौधे मजबूत हो जाएं तो उन्हें मुख्य खेत में लगा देना चाहिए। पौधों के बीच 45 से 60 सेंटीमीटर और कतारों के बीच करीब डेढ़ मीटर की दूरी रखना जरूरी है, ताकि बेलों को फैलने की जगह मिल सके। एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 2 से 2.5 किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। खेत में ऊंचे बेड या मेढ़ बनाकर रोपाई करने से सिंचाई और पानी की निकासी दोनों में सुविधा रहती है।
रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई
रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करना जरूरी है। इसके बाद मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए। अधिक पानी देने से जड़ें खराब हो सकती हैं, इसलिए ड्रिप प्रणाली या हल्की नालियों के माध्यम से पानी देना बेहतर विकल्प है। अच्छी उपज के लिए प्रति एकड़ 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस और 20 किलोग्राम पोटाश का संतुलित प्रयोग करना चाहिए। इससे पौधों में फलन बेहतर होता है।
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आवक कम होने से अच्छी कमाई
रोपाई के लगभग 45 से 50 दिन बाद फल तैयार होने लगते हैं। अगेती फसल का फायदा यह है कि बाजार में उस समय खीरे की आवक कम होती है, जिससे कीमतें अधिक मिलती हैं। सही योजना और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान कम लागत में अच्छी कमाई कर सकते हैं। यदि समय, मिट्टी, खाद और सिंचाई का ध्यान रखा जाए तो खीरे की अगेती खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
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