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रहस्य-रोमांच: इस गांव में मंडराता है मौत का खौफ, इसलिए नियत तिथि पर नहीं मनाते कोई भी त्योहार, होली भी मना ली पहले ही

  • उत्तम मालवीय, बैतूल
    त्योहार तो हर गम और तकलीफ भुलाकर हर्षोल्लास के साथ खुशियां मनाने के मौके देते हैं। लेकिन MP के बैतूल जिले का एक गांव ऐसा भी है जहां त्योहार आते ही मौत का खौफ लोगों के दिलोदिमाग पर मंडराने लगता है। इस खौफ और अनिष्ट से बचने वे कोई भी त्योहार उस तिथि पर नहीं मनाते, जिस तिथि को वह होता है।

    यह दास्तान कोई साल-दो साल की नहीं है बल्कि इस गांव में बीते 50 सालों से यही दस्तूर चला आ रहा है। यही कारण है कि इस साल भी भले ही सब जगह होलिका दहन आज होगा और रंग-गुलाल कल उड़ेंगे, पर उस गांव के लोग पहले ही यह सब कर चुके हैं।

    यह गांव है बैतूल शहर से 70 किलोमीटर दूर घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की डेहरी आमढाना पंचायत में बसा बरेलीपार। यह एक आदिवासी गाँव है। यहां हर तीज-त्योहार पर मौत का खौफ मंडराता है। गाँव में होली हो या दिवाली… जन्मष्टमी हो या बैलों को सिंगारने का त्योहार पोला… हमेशा बस यही एक चिंता ग्रामीणों को सताती है।

    तीन सौ परिवारों की इस बस्ती में मान्यता है कि त्योहार के दिन यदि त्योहार मना लिया तो किसी न किसी की मौत हो जाएगी या फिर और कोई अनिष्ट हो जाएगा। इसी अनिष्ट को टालने ग्रामीण नियत तारीख पर त्यौहार नहीं मनाते। 

    कोई भी त्यौहार यहाँ उस दिन नहीं होता जब पूरा देश त्यौहार मना रहा होता  है। गाँव में पिछले पचास साल से कोई भी त्योहार उसकी नियत तिथि पर नहीं मनाया गया। होली हो या दिवाली या फिर जन्माष्टमी हर त्यौहार यहाँ तिथि से पहले मना लिया जाता है।

    ग्रामीण सिंगुलाल बताते हैं कि मौत का यह खौफ बीते 50 साल से यूँ ही बना हुआ है। यही वजह है कि 17 मार्च को मनाई जाने वाली होली उन्होंने 15 मार्च की रात जला दी और बुधवार पूरे गांव के लोगों ने धुरेड़ी भी खेल ली। 

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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