देश/विदेशबैतूल अपडेटमध्यप्रदेश अपडेटवायरल अपडेट

joshimath update : जोशीमठ के हाल जानने सीमा प्रबंधन सचिव और एनडीएमए के चारों सदस्य आज करेंगे उत्तराखंड का दौरा

joshimath disaster : प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने 8 जनवरी, 2023 को जोशीमठ में भवनों के क्षतिग्रस्त होने और भूमि धंसने के मामलों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस समीक्षा में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, जोशीमठ के  जिलाधिकारी व अन्य अधिकारी, उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के विशेषज्ञ भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए।

यह बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चिंतित हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ स्थिति की समीक्षा की है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने बताया कि केंद्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से राज्य और जिले के अधिकारियों ने जमीनी स्थिति का आकलन किया है। उन्होंने बताया कि करीब 350 मीटर चौड़ी जमीन की पट्टी प्रभावित हुई है।

एनडीआरएफ की एक टीम और एसडीआरएफ की चार टीमें जोशीमठ पहुंच चुकी हैं। जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ भोजन, आश्रय और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था के साथ उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए काम कर रहा है।

पुलिस अधीक्षक और एसडीआरएफ के कमांडेंट मौके पर तैनात हैं। जोशीमठ के निवासियों को घटनाक्रम से अवगत कराया जा रहा है और उनका सहयोग लिया जा रहा है। लघु-मध्यम-दीर्घकालीन योजनाएं तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है।

इसके अलावा, सीमा प्रबंधन सचिव और एनडीएमए के चारों सदस्य 9 जनवरी को उत्तराखंड का दौरा करेंगे। वे हाल ही में जोशीमठ से लौटे तकनीकी दल (एनडीएमए, एनआईडीएम, एनडीआरएफ, जीएसआई, एनआईएच, वाडिया संस्थान, आईआईटी रुड़की) के निष्कर्षों का विस्तृत आकलन करेंगे और राज्य सरकार को स्थिति का समाधान करने के लिए तत्काल, लघु-मध्यम-दीर्घकालिक कार्रवाइयों पर सलाह देंगे।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने जोर देकर कहा कि प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा राज्य के लिए तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य सरकार को प्रभावित लोगों के साथ एक स्पष्ट और निरंतर संवाद स्थापित करना चाहिए। व्यवहार्य उपायों के माध्यम से स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए तत्काल प्रयास किए जाने चाहिए। प्रभावित क्षेत्र की एक अंतर-विषयी जांच की जानी चाहिए।

कई केंद्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी), राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) को “संपूर्ण सरकार” दृष्टिकोण की भावना से उत्तराखंड राज्य के साथ मिलकर काम करना चाहिए।

एक स्पष्ट समयबद्ध पुनर्निर्माण योजना तैयार की जानी चाहिए। निरंतर भूकंपीय निगरानी की जानी चाहिए। इस अवसर का उपयोग करते हुए जोशीमठ के लिए जोखिम के प्रति एक संवेदनशील शहरी विकास योजना भी विकसित की जानी चाहिए।

Joshimath Sinking: क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हो जाएगी सच! उत्‍तराखंड के जोशीमठ में धंस रही जमीन, सामने आया डरावना मंजर..

 

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

Related Articles

Back to top button