Itarsi to Vijayawada freight corridor : इटारसी से विजयवाड़ा तक बनेगा फ्रेट कॉरिडोर, डीपीआर के लिए सर्वे शुरू, दर्जनों गांवों की जमीन की जाएगी अधिग्रहित

▪️ उत्तम मालवीय, बैतूल
ट्रेनों के माध्यम से एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में (from one state to another) सामग्री का तेजी से परिवहन (rapid transportation of materials) करने के लिए भारतीय रेलवे (indian railway) द्वारा फ्रेट कारिडोर बनाने का काम प्रारंभ किया गया है।
देश के उत्तर-दक्षिण को जाेड़ने के लिए विजयवाड़ा से इटारसी के बीच फ्रेट कारिडोर (freight corridor) बनाया जा रहा है। यह कारिडोर बैतूल जिले के करीब 88 गांवों के बीच से होकर गुजरेगा। इसके लिए सेटेलाइट सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। अब राजस्व विभाग की मदद से मैदानी सर्वे का कार्य ठेका कंपनी द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है। इसके सहारे डीपीआर तैयार की जाएगी। इस कारिडोर को बनाने के लिए जिले के सैकड़ों किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
रेलवे द्वारा इसे उत्तर-दक्षिण गलियारा नाम दिया गया है। इसके बनने के बाद मध्य प्रदेश समेत आसपास के राज्यों के किसान, व्यापारी, उद्योगपतियों समेत अन्य व्यवसायियों को फायदा होगा। वे कम समय में अपने माल का परिवहन रेलवे के जरिए करा सकेंगे।
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक मालगाड़ी के परिचालन के लिए स्वतंत्र रेल लाइनों (independent rail lines for freight train operation) को फ्रेट कारिडोर (freight corridor) कहा जाता है। इस तरह रेल लाइनों में मालगाड़ी ट्रेनों के चलने के लिए बकायदा समय सारणी होती है। एक शहर से बुक कराया गया माल भाड़ा दूसरे शहर में तय समय पर पहुंच जाता है।
अभी भोपाल समेत पश्चिम मध्य रेलवे में ऐसी व्यवस्था नहीं है। यहां उन रेलवे लाइनों पर ही मालगाड़ी ट्रेनों को चलाया जाता है जहां पर यात्री ट्रेन चल रही हैं। इस वजह से मालगाड़ी ट्रेन लेट हो जाती हैं और मालवाड़ा तय समय पर संबंधित शहरों में नहीं पहुंच पाता है।
डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड के महाप्रबंधक अजय कुमार ने 19 मई 2022 को कलेक्टर बैतूल को इस संबंध में पत्र लिखकर इंटरमाडल परिवहन एकीकरण के संबंध में अध्ययन-ग्राउंड कंट्रोल सर्वेक्षण, रेग के संचालन के लिए अनुमति देने का अनुरोध किया था।
- ये भी पढ़ें : MP Farmers Big Update: एमपी में उपज भुगतान की लागू हुई नई व्यवस्था, अब मंडी से इस तरह मिलेंगे रुपए
इसके साथ ही बैतूल जिले के उन गांवों की सूची भी दी थी जहां सामाजिक आर्थिक प्रभाव आकलन और आधारभूत अध्ययन किया जाना है। कलेक्टर ने इसकी अनुमति देने के साथ ही राजस्व अमले को सहयोग करने के लिए निर्देश दिए हैं।
विजयवाड़ा-नागपुर-इटारसी (975 आरकेएम) खंड वाले न्यू नार्थ-साउथ डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (एनएस-डीएफसी) के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए कंसल्टेंसी और संबंधित सेवाओं का कार्य आरवी एसोसिएट्स आर्किटेक्ट्स इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स प्रा. लिमिटेड, हैदराबाद को सौंपा गया है। पत्र में कहा गया है कि फ्रेट कारिडोर का उद्देश्य परिवहन की इकाई लागत में कमी और उच्च गति पर भारी और लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन द्वारा तेजी से वितरण सुनिश्चित करा है।
देश में माल ढुलाई के संचालन में एक आदर्श बदलाव लाने के लिए इसका निर्माण किया जा रहा है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को पूरा करने के लिए प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) के सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) और सामाजिक-आर्थिक आधारभूत अध्ययन करने की आवश्यकता है। इसके लिए मैसर्स सेंटर फार मैनेजमेंट एंड सोशल रिसर्च को नियुक्त किया है। अध्ययन में स्थानीय ग्रामीणों, पीएपीएस के साथ बातचीत और भूस्वामियों सहित प्रासंगिक जानकारी एकत्र की जाएगी। यह कार्य सितंबर 2022 तक जारी रहेगा।
बैतूल जिले के इन क्षेत्रों से गुजरेगा फ्रेट कारिडोर
विजयवाड़ा से इटारसी के बीच बनाए जाने वाला फ्रेट कारिडोर जिले के शाहपुर, बैतूल एवं मुलताई तहसील क्षेत्र के गांवों से गुजरेगा। इससे शाहपुर तहसील के अंतर्गत भौंरा, गुरगुंदा, कुंडी, बंकाखोदरी, चापड़ामाल, चिखलदाखुर्द, पतौवापुरा, पाठई, सेल्दा वनग्राम, निशानरैय्यत, मोतीढाना, पलासपानी, जामपानी, मोखारैयय्त, बरेठा, मोखामाल, हरदू, माली सिलपटी, देशावाड़ी, खोखरारैय्यत, टेमरारैय्यत, धापा, सितलझिरी ग्राम के किसान प्रभावित होंगे।
घोड़ाडाेंगरी तहसील के चिखली एवं झारकुंड गांव सहित बैतूल तहसील के बड़गीखुर्द (बड़गीगौंडी खुर्द), गजपुर, माथनी, मंडईखुर्द, मंडईबुजुर्ग, बोरगांव, बयावाड़ी, झाड़ेगांव, पांगरा, भडूस, परसोड़ा, धनोरा, भोगीतेड़ा, बडोरा, भरकवाड़ी, बैतूलबाजार, हनोतिया, बटामा, सिंगनवाड़ी, चकोरा, बाजपुर, केलापुर, भैसदेही, बुंडाला, मलकापुर, किल्लौट, रतनपुर, बागदा, बरसाली, लाखापुर, मोरडाेंगरी, ठानी रैयय्त ( विरान ग्राम) तथा ठानीमाल ग्राम के किसान प्रभावित होंगे।
- ये भी पढ़ें: Gold-Silver Price Today: नवरात्रि के पहले सोना-चांदी के दामों में भारी गिरावट, यही है खरीदारी का सही मौका
आमला तहसील के ससाबड़, आमला, रमली, केदारखेड़ा, परसोड़ा एवं रंभाखेड़ी और मुलताई तहसील के अंतर्गत अंबा बघोली, कान्हा बघोली, निरगुड़, सूखाखेड़ी, जौलखेड़ा, भिलाई, परमंडल, वलनी, पारेगांव, मुलताई, हीराखापा, सोनोली, जामगांव, खेड़ीजगाजी, सिरसावाड़ी, देवभिलाई, सांईखेड़ा, रायआमला, बघोड़ा, आष्टा, सांवगी, खेड़ीरामोसी, गंगापुर एवं कुंभीखेड़ा ग्राम के किसानाें की कृषि भूमि से कारिडोर बनेगा।
किसान मांग रहे आठ गुना मुआवजा
फ्रेट कॉरिडोर बनने की सुगबुगाहट लगते ही संबंधित क्षेत्रों के किसान भी अपनी जमीन को लेकर चिंतित हो उठे हैं। रेलवे की परियोजना है तो जमीन देने से इंकार करना तो संभव नहीं है। ऐसे में किसान चाह रहे हैं कि उनकी कीमती जमीन का अच्छा मुआवजा उन्हें मिल जाएं ताकि जमीन देने के बाद उन्हें परेशानियों से न जूझना पड़े। यही कारण है कि वे मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन की कीमत से उन्हें 8 गुना मुआवजा दिया जाएं। भारतीय किसान संघ द्वारा इसे लेकर ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है।



