MP Urban Roads Development: अब एमपी में शहरों की सड़कें होंगी चकाचक, पांच साल में खर्च होंगे 2 लाख करोड़
MP Urban Roads Development: मध्यप्रदेश में रोड कनेक्टिविटी पर खास जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में नेशनल हाईवे और हाईस्पीड एक्सप्रेसवे का जाल सा बिछ रहा है। इसके बाद अब शहरों की सड़कों की बारी आई है। जल्द ही शहरों की सड़कें भी चकाचक होने वाली है। इसके लिए अगले 5 सालों में शहरी सड़कों पर 2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह जानकारी भोपाल में शुक्रवार को आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सड़क अवसंरचना पर हुई कार्यशाला में दी गई। इस अवसर पर आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे ने कहा कि शहरों की तरक्की का आधार उनकी सड़कें होती हैं और जब सड़कें टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बनती हैं तो विकास की गति और भी तेज हो जाती है।
सड़क निर्माण में इंजीनियरों की जिम्मेदारी
आयुक्त ने कहा कि नगरीय निकायों से जुड़े अभियंताओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही है कि वे सड़क निर्माण और उसके रखरखाव में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों का स्तर घटने से केवल यातायात प्रभावित नहीं होता, बल्कि अन्य बुनियादी ढांचे पर भी इसका असर पड़ता है। इसलिए हर इंजीनियर को अपने कार्यक्षेत्र में पूरी गंभीरता से काम करना चाहिए।

शहरी सड़कों पर बढ़ रहा दबाव
श्री भोंडवे ने बताया कि प्रदेश में लगभग ढाई करोड़ लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। इतने बड़े जनसंख्या समूह के कारण शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत करीब दो लाख करोड़ रुपये की योजनाएं लागू की जाएंगी। इन योजनाओं में अमृत मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेयजल और सीवरेज व्यवस्था, हरित क्षेत्र का विकास तथा उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
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सड़कें होती है अर्थव्यवस्था की रीढ़
आयुक्त ने कहा कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे किसी भी शहर की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली को जोड़ने का प्रमुख माध्यम हैं। अच्छी सड़कें जहां लोगों के समय की बचत करती हैं, वहीं व्यापार, उद्योग और शिक्षा सहित हर क्षेत्र की कार्यक्षमता को भी बढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ इंजीनियरों को भी अपने कामकाज में नई पद्धतियां अपनानी होंगी। यही इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है।

विशेषज्ञों ने बताई आधुनिक तकनीक
कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर जानकारी साझा की। आईआईटी इंदौर और रूड़की, केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MORTH) और RODIC से आए विशेषज्ञों ने प्रस्तुतिकरण दिए। उन्होंने सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उपाय, निर्माण की नई तकनीक और बेहतर निगरानी प्रणाली पर विस्तार से बताया।
विषय-विशेषज्ञों की प्रस्तुतियां
RODIC से जुड़े आरएस महालहा और एचसी अरोड़ा ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और निविदा प्रक्रिया की बारीकियों पर जानकारी दी। वहीं अन्य विशेषज्ञों ने कंस्ट्रक्शन टेक्निक, क्वालिटी कंट्रोल, परीक्षण प्रयोगशालाओं की प्रक्रिया, डिजिटल प्रोजेक्ट प्रबंधन और रीयल टाइम मॉनिटरिंग जैसे विषयों पर चर्चा की।
पर्यावरण और सुरक्षा पर भी जोर
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि सड़क निर्माण में वेस्ट मटेरियल का उपयोग कैसे किया जा सकता है, ताकि पर्यावरण पर बोझ कम हो और निर्माण लागत भी घटाई जा सके। साथ ही, शहरी सड़कों पर सुरक्षा मानकों को लेकर भी इंजीनियरों को विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।
प्रदेश के अभियंताओं का प्रशिक्षण
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा ने राज्य की नगरीय अवसंरचना की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शहरी विकास के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं और इंजीनियरों की भूमिका इसमें सबसे अहम है। कार्यशाला में प्रदेश भर से करीब 600 इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे आधुनिक तकनीक और नई चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकें।
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