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Villages without electricity in MP: एमपी के इस गांव में आज तक नहीं पहुंची बिजली, भारी मुसीबतें झेल कर जी रहे ग्रामवासी

Villages without electricity in MP: मध्यप्रदेश में विकास के दावें तो खूब होते हैं, लेकिन आज भी यहां कई गांव ऐसे हैं जहां लोगों तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसा ही एक गांव बैतूल जिले के भैंसदेही ब्लॉक की ग्राम पंचायत बानूर का बुरहानपुर ग्राम है। यहां आज भी लोग बिना बिजली के जीने को मजबूर हैं। आजादी के 75 साल बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंच पाई है।

मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिला कलेक्टर से मांग की है कि जल्द से जल्द ग्राम बुरहानपुर में बिजली और पेयजल की व्यवस्था करवाई जाएं। उन्होंने कहा यह हाल तब है जब 20-22 सालों से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन आदिवासी बाहुल्य इस गांव में बिजली तक नहीं पहुंची।

नल जल योजना का भी नहीं मिल रहा लाभ

गांव में नल जल योजना की पाइप लाइन का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन बिजली न होने के कारण लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पानी के लिए लोग अब भी पुराने तरीकों पर निर्भर हैं। अब तक कई विधायक और सांसद यहां आकर सड़क और बिजली का वादा कर चुके हैं, लेकिन न सड़क बनी और न ही बिजली आई।

चुनाव बहिष्कार की भी दे चुके चेतावनी

पहले भी ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी थी, तब अधिकारियों ने समझाइश दी थी कि जल्द ही समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन, सालों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष हेमंत वागद्रे भी ग्रामीणों के साथ बुरहानपुर की समस्या को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने रैली निकालकर विरोध जताया और प्रशासन से जल्द समाधान करने की मांग की।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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