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Badnaseeb Ganv : पुलिया बहने से गांव तक नहीं आ पा रही स्कूल वैन, आवाजाही भी बंद ; इधर पुल नहीं होने से टापू बन गया एक गांव

◼️ अंकित सूर्यवंशी/नवील वर्मा

आमला/शाहपुर। बेशक बारिश का मौसम अधिकांश लोगों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आता है। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए यह मौसम बड़ा मुसीबत भरा साबित होता है। यह मुसीबत कहीं निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखे जाने से आती है। तो कहीं शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते आती है। जिले के आमला ब्लॉक के ग्राम देवठान और शाहपुर ब्लॉक के जामुनढाना गांव के निवासी भी इन्हीं कारणों से भारी परेशानियों से दो-चार होने को मजबूर हैं।

आमला ब्लॉक के ग्राम देवठान में इसी साल लाखों की लागत से पुलिया का निर्माण किया गया था। इस कार्य में गुणवत्ता का कितना ध्यान रखा गया है, यह इसी से नजर आ जाता है कि पिछले दिनों हुई पहली बारिश में ही यह बह गई। इससे ग्राम देवठान के वार्ड क्रमांक 20 डोलढाना के लोगों को भारी परेशानी झेलना पड़ रहा है। पुलिया का एक हिस्सा बह जाने से इससे न वाहन निकल पा रहे हैं और न ही लोग ही आसानी से आ-जा पा रहे हैं।

ग्राम के प्रकाश सोलंकी बताते हैं कि पुलिया बह जाने के कारण स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। स्कूल की वैन गांव तक नहीं आ पा रही है। इससे 4 से 5 वर्ष तक के बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत नांदपुर के सरपंच एवं सचिव से निवेदन किया है कि क्षतिग्रस्त पुलिया को तुरंत दुरूस्त करवाएं। ताकि ग्रामीणों को हो रही परेशानी से निजात मिल सके। देखें वीडियो…

इसी तरह शाहपुर तहसील की ग्राम पंचायत पावरझंडा के अंतर्गत आने वाले ग्राम जामुनढाना में नदी पर पुल नहीं है। इससे नदी में पानी आने के बाद से ही ग्रामीणों का आवागमन बंद हो गया है। ग्राम पूरी तरह से टापू में तब्दील हो गया है। ऐसे में यदि कोई गंभीर बीमार पड़ जाए तो उसका भगवान ही मालिक है। किसी को बेहद जरुरी काम आने पर भी वह न तो गांव से बाहर जा सकता है और न ही कोई बाहरी व्यक्ति गांव में पहुंच पाता है।

ग्रामीण बलवंत कवड़े, सोरेज कवड़े, दस्सु तेकाम, विमल उइके का कहना है कि उनसे हमेशा झूठे वादे करके वोट तो ले लिए जाते हैं। हर बार कहा जाता है कि अगर हम जीते तो यहां पर पुल का निर्माण किया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि जीतने के बाद यहां कोई नेता मुड़कर भी नहीं देखता है। यही कारण है कि यह समस्या सालों से बनी हुई है। इस गांव की आबादी लगभग 1000 की है। इसके बावजूद उनकी ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है।

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ग्रामवासी सूरज तेकाम, बलिराम तेकाम, बस्तीराम तेकाम, बलिराम कवड़े बताते हैं कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ता है। बाढ़ आने से ग्राम में संचालित प्राइमरी और मिडिल स्कूल बंद होने से शिक्षक भी नदी पर पुल नहीं होने से ग्राम तक नहीं पहुंच पाते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने नदी पर जल्द से जल्द पुल बनाए जाने की मांग की है ताकि उन्हें परेशानियों से निजात मिल सके।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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