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प्रकृति का यौवन है बसंत, इसलिए कहलाता है ऋतुओं का राजा

युगों-युगों से पृथ्वी पर वसंत के आगमन के उपरांत यानी हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तक विद्यमान ऋतुगत सौंदर्य ब्रह्मांड का अप्रतिम सौंदर्य होता है। जिस प्रकार मनुष्य जीवन में यौवन आता है, उसी प्रकार बसंत इस प्रकृति का यौवन है। इसीलिए बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।

इस समय पेड़ों के सूखे पत्ते झड़ जाते हैं और नए पत्ते आने लगते हैं। चारों और रंग-बिरंगे फूल ही फूल दिखाई देते हैं। भारत में किसानी मुख्य आय का स्रोत है। उस हिसाब से बसंत को महत्वपूर्ण माना गया है। खेतों में नई फसलें पक जाती है। जिसे देखकर किसान गदगद होता है।

ये लौटती हुई सर्दियां, बड़े होते दिन, गुनगुनी धूप धीरे-धीरे तेज होती हुई, मनुष्य को आकर्षित करती है। कोयल की मधुर आवाज गुंजायमान होती है। एक ओर जहां आम के बौर वातावरण में मंद मंद खुशबू घोलते हैं तो वहीं खेतों में सरसों के फूल सहज ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

दो-दो महीने की छह ऋतु होती है। जिसमें वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, और शिशिर ऋतु शामिल हैं। प्रकृति इस ऋतु में चहुंओर संपन्न होने से जगत का हर एक जीव वसंत ऋतु में खुशहाल होता है। यही कारण है कि इन दिनों हर तरफ माहौल बड़ा खुशनुमा नजर आता है।

  • आलेख और फोटो: लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)
  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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