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Panchaayat Raj : अब सरपंचों के खिलाफ भी ला सकेंगे अविश्वास प्रस्ताव

Panchaayat Raj : मध्यप्रदेश में अब नगरीय निकायों की तरह सरपंचों के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। सरपंचों के प्रति अविश्वास प्रस्ताव तीन चौथाई बहुमत से पास हो सकेगा। वहीं तीन वर्ष पश्चात अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। यह जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दी।

Panchaayat Raj : अब सरपंचों के खिलाफ भी ला सकेंगे अविश्वास प्रस्ताव

Panchaayat Raj : मध्यप्रदेश में अब नगरीय निकायों की तरह सरपंचों के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। सरपंचों के प्रति अविश्वास प्रस्ताव तीन चौथाई बहुमत से पास हो सकेगा। वहीं तीन वर्ष पश्चात अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। यह जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दी।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री पटेल ने विभाग में किये जा रहे कल्याणकारी कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि सरपंचों के प्रति अविश्वास प्रस्ताव तीन चौथाई बहुमत से पास करने एवं तीन वर्ष पश्चात अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान नगरीय निकायों की तरह पंचायत में भी किए जाने का अनुरोध किया गया है, जिसे स्वीकार किया है।

इस अधिकार से बने पॉवरफुल

इस प्रावधान से एक ओर जहां सरपंचों पर नियंत्रण होगा वहीं दूसरी ओर कुछ अतिरिक्त अधिकार भी उन्हें दिए गए हैं। अब रोजगार सहायक एवं सचिव की एसीआर लिखने के अधिकार सरपंच को दिये गये हैं। जिसमें ग्राम रोजगार सहायक के मूल्यांकन प्रपत्र का स्वीकारकर्ता सरपंच को बनाया गया है।

धारा 40 का नहीं होगा दुरूपयोग

पंचायत राज ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 का दुरुपयोग सरपंच के विरुद्ध ना हो इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। सीएम हेल्पलाइन 181 पर झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले तथा आदतन शिकायतकर्ता के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिये लोक सेवा प्रबंधन विभाग से संवाद हुआ है।

पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 22 के अंतर्गत सरपंचों को जनपद पंचायत में रोस्टर के हिसाब से 20 प्रतिशत प्रतिवर्ष बुलाए जाने के प्रावधान का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।

हर पंचायत में बनाए जाएंगे भवन

मंत्री श्री पटेल ने बताया कि प्रदेश की शत-प्रतिशत पंचायतों में पंचायत भवन बनाये जायेंगे। पंचायत भवन विहीन 1400 ग्राम पंचायतों के लिये पंचायत भवनों की स्वीकृति प्रथम चरण में जारी की जा रही है। साथ ही स्थानीय ग्रामीण समुदाय के लिये सामुदायिक भवनों का निर्माण भी चरणबद्ध किया जाएगा।

जनपद स्तर पर संधारित होगा अनुपात

उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा योजना में श्रम सामग्री का अनुपात अभी तक जिला स्तर पर संधारित होता था। अब इसको जनपद स्तर पर संधारित किया जाएगा। 25 लाख तक के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने के अधिकार सरपंचों को दिए गए हैं। तकनीकी स्वीकृति के लिये सहायक यंत्री को अधिकृत किया गया है।

सहायक यंत्रियों के पॉवर में भी इजाफा

मंत्री श्री पटेल ने बताया कि सहायक यंत्री को तकनीकी स्वीकृति जारी करने के अधिकार की सीमा 15 लाख रूपये से बढ़कर 25 लाख की गई है। महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत कपिलधारा की इकाई लागत राशि तथा पेयजल के लिये बनाने वाले सामुदायिक कूप की लागत राशि में अंतर है। इसको युक्ति युक्त करने का अनुरोध किया गया है, इस पर विचार किया जाएगा।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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