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गुबरेल का मेघनाथ मेला: क्षेत्र में सुख-समृद्धि की कामना से होता है आयोजन, होती है तलवारबाजी भी

  • सचिन बिहारिया/अंकित सूर्यवंशी

    मध्यप्रदेश (MP) के बैतूल जिले में आमला विकासखंड से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गुबरेल में लगने वाले मेघनाथ मेले (Meghnath Mela) का खासा महत्व है। इस मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। इस मेले की विशेष बात यह है कि इसकी जिम्मेदारी एक ही परिवार द्वारा 5 पीढ़ियों से उठाई जा रही है। इस मेले में अखाड़े (arena) और तलवारबाजी (fencing) का आयोजन भी होता है।

    गुबरेल में लगने वाले इस मेले में सिंगारे परिवार द्वारा होलिका दहन के पश्चात धुरेंडी के दिन ग्राम में स्थित पूजा स्थल पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही यहां धुरेंडी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

    लगभग पांच पीढ़ियों से चली आ रही इस परम्परा में पूजा अर्चना तथा मेले से संबंधित सभी जिम्मेदारियां ग्राम पटेल कुंवर सिंगारे एवं उनके परिवार द्वारा निभाई जाती है। आसपास के ग्रामों से श्रृद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। इस पूजा में लोगों की बड़ी आस्था, भक्ति जुड़ी हुई है। यहां सभी श्रद्धालु सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

    तलवारबाजी, अखाड़े का होगा आयोजन

    ग्राम पटेल कुंवर सिंगारे, माधवराव सिंगारे, डॉ. टोडरमल नागवंशी, विनीत सिंगारे आदि ने बताया कि पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार होलिका दहन के दूसरे दिन धुरेंडी पर्व पर आयोजित होने वाले इस मेले में हमारे परिवार द्वारा मेघनाथ जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा अर्चना के बाद ग्राम में मेले का आयोजन किया जाता है तथा अखाड़े का आयोजन होता है।

    इसमें सिंगारे परिवार के द्वारा तलवारबाजी, अखाड़ा आदि का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि यह परम्परा उनके बुजुर्गों द्वारा ग्राम, क्षेत्र तथा सभी लोगों की सुख शांति तथा समृद्धि की कामना के लिए शुरू की गई थी। आसपास के गांव से श्रद्धालु मेघराज पूजा के अवसर पर पहुंचते हैं तथा सुख शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।

    रंग पंचमी तक होगी विशेष पूजा

    ग्राम गुबरेल‌ के डॉ. रितेश सिंगारे, उमेश पंवार, परसराम सिंगारे, टोलीराम सिंगारे, वीरेंद्र सिंगारे, सतीश सिंगारे ने बताया कि होलिका दहन के दूसरे दिन धुरेंडी पर्व पर ग्राम में मेघनाथ जी की विशेष पूजा अर्चना होती है। इसके पश्चात भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

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    लगभग 5 पीढ़ियों से सिंगारे परिवार इस परंपरा को कायम रखे हुए हैं। प्राचीन मान्यता के अनुसार धुरेंडी पर्व पर मेघनाथ जी की पूजा अर्चना करने से ग्राम तथा क्षेत्र में सुख शांति एवं समृद्धि मिलती है। उन्होंने आगे बताया कि धुरेंडी से लेकर रंग पंचमी पांच दिनों तक विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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