Mulatai Child Murder Case: खेलने के बहाने ले गए, फिर कर दी हत्या; मुलताई के दिल दहला देने वाले कांड का खुलासा
Mulatai Child Murder Case: Lured away under the pretext of playing, then murdered; chilling incident in Mulatai revealed.

Mulatai Child Murder Case: बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र के ग्राम ताईखेड़ा में अंधविश्वास और जादू-टोने के संदेह ने एक मासूम की जान ले ली। 12 वर्षीय बालक अंकुश आहके की गुमशुदगी का मामला जब पुलिस के पास पहुंचा तो शुरू में यह सामान्य लापता होने की घटना प्रतीत हुई, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर एक भयावह सच्चाई सामने आई। पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और जंगल के नाले से बालक का शव बरामद किया।
जादू-टोने के संदेह में एक 12 वर्षीय बालक की निर्मम हत्या किए जाने के मामले का मुलताई पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने अंधविश्वास के चलते बालक को घर से बुलाकर अपने साथ ले गए और बाद में उसकी हत्या कर शव को जंगल में फेंक दिया।
पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश खरपुसे तथा एसडीओपी मुलताई श्री शिव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में थाना मुलताई पुलिस ने इस अंधे हत्याकांड का खुलासा किया। थाना प्रभारी श्री विकास पटेल के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने लगातार जांच और खोजबीन कर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की।

गुमशुदगी की रिपोर्ट से शुरू हुई जांच
जानकारी के अनुसार 22 जून 2026 को ग्राम ताईखेड़ा निवासी संगीता पति सद्दू आहके, उम्र 36 वर्ष, थाना मुलताई पहुंचीं और अपने 12 वर्षीय पुत्र अंकुश आहके के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनका पुत्र 20 जून 2026 की दोपहर लगभग तीन बजे से घर नहीं लौटा है।
संगीता ने पुलिस को बताया कि गांव के ही रहने वाले सुदामा पिता मोहन इनवाती उनके पुत्र को खेलने के बहाने अपने साथ ले गया था। इसके बाद से बालक का कोई पता नहीं चला। शिकायत के आधार पर थाना मुलताई में अपराध क्रमांक 524/2026 धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
विशेष टीम ने शुरू की सघन तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल विशेष टीम गठित की। पुलिस ने बालक की तलाश के लिए विभिन्न संभावित स्थानों पर खोज अभियान चलाया और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान पुलिस का ध्यान सुदामा इनवाती पर गया, जिसके बाद उसकी तलाश कर उसे अभिरक्षा में लिया गया।
तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर जब उससे पूछताछ की गई तो उसके बयान में कई विरोधाभास सामने आए। संदेह गहराने पर की गई सख्त पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया।

अंधविश्वास बना हत्या की वजह
पूछताछ में आरोपी सुदामा ने बताया कि उसने अपने साथी राकेश उइके के साथ मिलकर अंकुश आहके की हत्या की थी। दोनों को बालक के संबंध में जादू-टोना और अंधविश्वास से जुड़ा संदेह था। इसी वजह से उन्होंने पहले से योजना बनाकर अंकुश को घर से बुलाया और अपने साथ ले गए।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने बालक पर लोहे की रॉड से हमला किया और बाद में रस्सी से उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को एक बोरी में बांधा गया और ग्राम सालईढाना के जंगल में स्थित नाले में फेंक दिया गया।
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निशानदेही पर मिला शव
सुदामा इनवाती के मेमोरेंडम के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी राकेश उइके को हिरासत में लिया। पूछताछ में राकेश ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और शव छिपाने के स्थान की जानकारी दी। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम ग्राम सालईढाना के जंगल पहुंची, जहां नाले से बोरी में बंधा शव बरामद किया गया।
शव की पहचान मृतक अंकुश आहके के रूप में उसके परिजनों ने की। शव मिलने के बाद मामले में हत्या के पर्याप्त साक्ष्य सामने आने पर पुलिस ने धारा 103(1) और 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की।
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दोनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में सुदामा पिता मोहन इनवाती, उम्र 18 वर्ष 3 माह, निवासी ताईखेड़ा तथा राकेश पिता रमेश उइके, उम्र 36 वर्ष, निवासी ग्राम ताईखेड़ा थाना मुलताई को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। मामले की आगे की विवेचना जारी है।
अंधविश्वास से दूर रहने की अपील
पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन ने जिले के लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, जादू-टोना या अफवाहों पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि ऐसे अंधविश्वास कई बार निर्दोष लोगों की जान के लिए खतरा बन जाते हैं। किसी भी प्रकार की शंका, विवाद या समस्या की स्थिति में कानून का सहारा लें और तत्काल पुलिस को सूचना दें। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच, सामाजिक जागरूकता और कानून पर विश्वास ही इस प्रकार के जघन्य अपराधों को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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